नर्मदा स्तुति / रेवा गीतम – वसंततिलका
विन्ध्याचले अमरकंटक रुप बाला!
पहेरी वहे तरु-लता-द्रुम नो दुशाला!
प्रादुर्भवी जगतने सुख मोक्ष देवा!
नौमि! त्वदीय पद पंकज मात रेवा!!१
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विन्ध्याचले अमरकंटक रुप बाला!
पहेरी वहे तरु-लता-द्रुम नो दुशाला!
प्रादुर्भवी जगतने सुख मोक्ष देवा!
नौमि! त्वदीय पद पंकज मात रेवा!!१
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!!छंद नाराच!!
गळे विशाळ मुक्त माळ शीश पाघ सोहती!
मुखाकृति मनोहरं वळी रहै विमोहती!
सवार लीले घोड़लै धजा सुश्वेत ना धणी!
घणी खमा श्री रामदेव बार बीज ना धणी!!१
खमा घणी! खमा घणी! खमा घणी! खमा घणी!
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।।मत्तगयंद छंद।।
हे इकदंत! सुसेवित संत! अनादि! अनंत! गणाधिप! प्यारै।
सिंधुर आनन! नाथ गजानन! श्रीगिरजा शिव राजदुलारै!
गान प्रबीन! पखावज बीन, लिए मुझ दीन के गेह पधारे!!
श्रीगणनायक! सिद्धि विनायक! देव! हरो दु:ख द्वंद हमारे!!१!!…
🍀गीत:सावझडो/गाहा चौसर🍀
थूं नवलख सरताज डोकरी!
थारै हाथां लाज डोकरी!
रीझै तो दे राज डोकरी!
खीज्यां छीनै ताज डोकरी!।।१।।
अबखी वेल़ां आज डोकरी!
मेहाई महाराज डोकरी!
देवै वित धन वाज डोकरी!
खरचौ पांणी नाज डोकरी!।।२।।[…]
चौपाई
जय! शिव शंकर! जयति! महेशा!
आशुतोष! मृड! अनघ! उमेशा!१!
अंग-गौर-कर्पूर-सुपावन!
रूप कोटि कंदर्प लजावन!!२
भस्म-अंग-धुरजट-बिच-गंगा!
नीलकंठ! गौरी-अरधंगा!!३
श्री गणपति चालीसा दोहा एक रदन!करिवर वदन, सदन ज्ञान! शशि-भाल! विघ्न हरन मंगल करन, शिव गिरिजा के लाल!! १ महागणपतिम् विमल अति, यति मति गति दातार! तव पद रति रिधि सिधि पतिम्, जयति जयति सुखसार!! २ चौपाई श्रीगणेश जय!जय गणदेवा! मात भवानी पितु महादेवा!१ गणाध्यक्ष गजमुख शिवपायक! द्वैमातुर ! सुर संत सहायक!२ लंबोदर!हेरंब! विघ्नहर! शूर्पकर्ण! इक-दंत! मनोहर!३ पृथुलकाय!मोदक-आहारी! गिरितनया शिव गोद विहारी!!४ धूम्र वर्ण !मुदमंगलकारी!! पिंगल-नयन!प्रणत भय हारी!५ मूषकवाहन!षण्मुख भ्राता! श्रुति लेखक!वांछित-फलदाता!६ धन वैभव दीर्घायुष दाई! सुमति सौख्य सौभाग्य प्रदाई!!७ वक्रतुंड!गजशुंड! दयाला! लंबकर्ण! भक्तन प्रतिपाला!८ स्वस्तिक-चरण! हरण भय भारी! अशरण शरण! सुवन त्रिपुरारी !!९ बुद्धि विवेक ज्ञान शुभ दायक! गुणपति! […]
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चौपाई
जय भैरव! काशीपुर स्वामी!
करतल-सुलभ-सिद्धि! बहुनामी!१
त्रिभुवन-निलय !श्वान-असवारा!!
कलि-मल-संहारक! फणि-हारा!२
कापालिक! दिगवसन! अघोरा!
श्यामल गौर स्वरूप किशोरा!!३
दोहा
पुर-काशी-वासी! बटुक!, अविनाशी! चख-लाल!
खर्पराशि! सुखराशि! विभु, नाशी भय भ्रम-जाल!!१
भैरव! भयहर! भूतपति!, रुद्र! वेश-विकराल!!
दास जानि करियो दया, व्योमकेश! दिगपाल!!२
भैरव-आरती
आरती! मधुर उचारती, भारती! भैरवनाथ तिहारी!
दुर्धर-रव! खप्पर कर! अभीरव! जय शमशान विहारी!!१[…]
मत्तगयंद सवैया
लाल हि चूनर, कोर ‘रु लाल हि लाल हि कंचुकि लाल हि डोरी!
सिंदुर लाल सुबिंदी कपाल , ‘रु लाल हि भाल सुकुंकुम रोरी!
लालमलाल उछाल कियौ नभ भोर रु सांझ समे रंग ढोरी!
थाल अबीर गुलाल लिए कर,श्री हिंगलाज मनावत होरी! १
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।।दोहा।।
दुर्गे! दुर्गतिनाशिनी, वासिनी गिरिकैलास!
मंदहास! मृदुभाषिणी!, माॅं! काटौ यमपाश!
।।चौपाई।।
जयति! जयति! जगदंब भवानी!
शिवा! सांभवी! भवा! मृडानी!! १[…]