माँ गंगा की स्तुति – महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण

॥भुजङ्गप्रयातम् गीर्वाणभाषा॥

नमस्ते नमस्ते नमो देवि गङ्गे,
नमो जह्नुजे पूतपाथस्तरङ्गे।
नमस्ते कपर्दासने भर्गजाये,
नमस्ते ज्वलत्सम्बरे मूलमाये॥१॥

[…]

» Read more

नर्मदा स्तुति / रेवा गीतम – वसंततिलका

विन्ध्याचले अमरकंटक रुप बाला!
पहेरी वहे तरु-लता-द्रुम नो दुशाला!
प्रादुर्भवी जगतने सुख मोक्ष देवा!
नौमि! त्वदीय पद पंकज मात रेवा!!१

[…]

» Read more

रामदेव पीर वंदना

!!छंद नाराच!!
गळे विशाळ मुक्त माळ शीश पाघ सोहती!
मुखाकृति मनोहरं वळी रहै विमोहती!
सवार लीले घोड़लै धजा सुश्वेत ना धणी!
घणी खमा श्री रामदेव बार बीज ना धणी!!१
खमा घणी! खमा घणी! खमा घणी! खमा घणी!

[…]

» Read more

सिद्धि विनायक वंदना

।।मत्तगयंद छंद।।
हे इकदंत! सुसेवित संत! अनादि! अनंत! गणाधिप! प्यारै।
सिंधुर आनन! नाथ गजानन! श्रीगिरजा शिव राजदुलारै!
गान प्रबीन! पखावज बीन, लिए मुझ दीन के गेह पधारे!!
श्रीगणनायक! सिद्धि विनायक! देव! हरो दु:ख द्वंद हमारे!!१!!…

» Read more

यह मंदिर मंदिर नहिं केवल, यह गौरव सौगात है

 आज प्रफुल्लित अवध धरा है, पूर्ण अधूरे काम हुए पुनः प्रतिष्ठित नव मंदिर में, भारत गौरव राम हुए सदियों की काली अंधियारी, जैसे बीती रात है। यह मंदिर मंदिर नहिं केवल, यह गौरव सौगात है।।01।। आज उल्लसित कण-तृण सारे, स्वयं पधारे रघुनंदन। लेत बलैयां झुकी लताएं, करते पादप अभिनंदन। मधुर मधुर स्वर छेड़ विहंगन, सबका हिय हरखात है। यह मंदिर मंदिर नहिं केवल, यह गौरव सौगात है।।02।। मंदिर की क्या बात राम के, मंदिर हर इक ग्राम मिले। घर घर में मंदिर भारत के, हर मंदिर में राम मिले। हर हिन्दू के स्वाभिमान का, नाता इसके साथ है। यह […]

» Read more

शिव-चालीसा

चौपाई
जय! शिव शंकर! जयति! महेशा!
आशुतोष! मृड! अनघ! उमेशा!१!
अंग-गौर-कर्पूर-सुपावन!
रूप कोटि कंदर्प लजावन!!२
भस्म-अंग-धुरजट-बिच-गंगा!
नीलकंठ! गौरी-अरधंगा!!३

» Read more

श्री गणपति चालीसा

श्री गणपति चालीसा दोहा एक रदन!करिवर वदन, सदन ज्ञान! शशि-भाल! विघ्न हरन मंगल करन, शिव गिरिजा के लाल!! १ महागणपतिम् विमल अति, यति मति गति दातार! तव पद रति रिधि सिधि पतिम्, जयति जयति सुखसार!! २ चौपाई श्रीगणेश जय!जय गणदेवा! मात भवानी पितु महादेवा!१ गणाध्यक्ष गजमुख शिवपायक! द्वैमातुर ! सुर संत सहायक!२ लंबोदर!हेरंब! विघ्नहर! शूर्पकर्ण! इक-दंत! मनोहर!३ पृथुलकाय!मोदक-आहारी! गिरितनया शिव गोद विहारी!!४ धूम्र वर्ण !मुदमंगलकारी!! पिंगल-नयन!प्रणत भय हारी!५ मूषकवाहन!षण्मुख भ्राता! श्रुति लेखक!वांछित-फलदाता!६ धन वैभव दीर्घायुष दाई! सुमति सौख्य सौभाग्य प्रदाई!!७ वक्रतुंड!गजशुंड! दयाला! लंबकर्ण! भक्तन प्रतिपाला!८ स्वस्तिक-चरण! हरण भय भारी! अशरण शरण! सुवन त्रिपुरारी !!९ बुद्धि विवेक ज्ञान शुभ दायक! गुणपति! […]

» Read more

भैरव चालीसा

चौपाई
जय भैरव! काशीपुर स्वामी!
करतल-सुलभ-सिद्धि! बहुनामी!१
त्रिभुवन-निलय !श्वान-असवारा!!
कलि-मल-संहारक! फणि-हारा!२
कापालिक! दिगवसन! अघोरा!
श्यामल गौर स्वरूप किशोरा!!३

» Read more

चारण वंशोत्कीर्तनं – सत्येंद्र सिंह चारण झोरड़ा

।।गीत – त्रिकुटबंध।।
शुभ जात चारण सोवणी,
महदेव रे मन मोवणीं,
कंठा’ज शारद भुज भवानी, देवियां री दूत।
खग समर मांही खांचता।
भट ओज आखर बांचता।
कवि गीत डिंगल सृजन कर कर।
कहत दहुकत सबद खर खर।[…]

» Read more

कारगिल युद्ध – डॉ. शक्तिदान कविया

।।छंद नाराच।।
लड़े लड़ाक धू धड़ाक जंग पाक जोवता।
किता कजाक व्हे हलाक हाक बाक होवता।।
धुवां धमाक झीकझाक रुद्र डाक रूंसणा।
बज्राक हिन्द जुद्ध वीर धाक शत्रु धूंसणा।।
जी धाक रिम्म धूंसणा[…]

» Read more
1 2 3 66