चलना तेरा काम
जीवन पथ का तू राही मन!, चलना तेरा काम।
भोर खिले या साँझ ढले, तू मत करना विश्राम।।
पग-पग पर अवरोध मिलेंगे,
सुख-दुःख के युगबोध मिलेंगे।
विकट मोड़, गतिरोध मिलेंगे,
कुछ अनुनय अनुरोध मिलेंगे।
चलते जाना है तुमको बस, करके उन्हें प्रणाम। 1
जीवन पथ का तू राही मन!, चलना तेरा काम।।
आँसू, खुशियाँ, आहें होंगी,
हसरत भरी निगाहें होंगी।
हाँ! पथरीली राहें होंगी,
कुछ चीजें अनचाहे होंगी।
सफर तुम्हारा जारी रखना, शीत लगे या घाम।।
जीवन पथ का तू राही मन!, चलना तेरा काम।।2
उपवन, सरिता, कूल दिखेंगे,
झाड़ी-झंखड़, धूल दिखेंगे।
पग-पग मग पर शूल दिखेंगे,
कहीं-कहींकुछ फूल दिखेंगे।।
तू बस पग गतिमय रखता जा, बिन सोचे परिणाम!
जीवन पथ का तू राही मन!चलना तेरा काम। 3
जो गहरे सागर तल जाते!
मणि-मौक्तिक, माणिक-धन पाते।
लहरों से जो हैं घबराते,
तट पर हाथ धरे रह जाते।।
जिस की नस नस में हो साहस, होता उनका नाम।।
जीवन पथ का राही तू मन!, चलना तेरा काम। 4
यात्रा है कुछ पल का नाता,
साथ न हर क्षण कोई निभाता।
कोई रोता, कोई गाता,
कोई हँस-हँस के बतियाता।
बढता जा आगे तू करके, सबको दुआ सलाम!
जीवन पथ का राही तू मन!, चलना तेरा काम!!5
जीवन-माघ-अमावस-मेला!
लगा भीड का रेला पेला!
कभी साथ कोई कभी अकेला!
स्वयं गुरु बन खुद ही चेला!
“चरवैति!चरवैति ” से ही, मिलता यहाँ मुकाम!
जीवन पथ का राही तू मन!, चलना तेरा काम!6
~~©डा नरपत आशिया “वैतालिक”
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