दासोड़ी

राजस्थान सरकार गांव-गांव रो इतिहास लिखावण री सोच रैयी है। आ बात वास्तव में सरावणजोग है। इण दिशा में म्है, कीं छप्पय आपरी निजर कर रैयो हूं। इण छप्पयां रै मांय म्है म्हांरै बडेरां नैं मिलियै गांवां री विगत बतावण री खेचल करी है। परमवीर देवराज भाटी रै प्राणां री रक्षा करणियै द्विजवर वसुदेवायत पुरोहित रै बेडै रतन री संतति चारणां में रतनू बाजै। इणी रतनू वंश परंपरा में म्हांरा बडेरा आसरावजी रतनू (सिरुवो) होया जिकां स्वामीभक्ति री मिसाल कायम करतां थकां राव जगमाल मालावत सूं जैसलमेर री रक्षा करी अर दूदा जसहड़ोत नै जैसलमेर रावल़ बणावण में महताऊ भूमिका […]

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उम्मेदां माजी

उम्मेदां माजी रो पीहर मोटेई(फलोदी)अर दासोड़ी सासरो हो। आप री जात बीठू ही। सांगड़ सूं बीठू आय इण गाव मे बसग्या हा। अठैरे किण ठाकुर इण बीठुवां नै जमी दी ओ ठाह नी है अर नीं ओ ठाह है कै इण बीठुवां रो किण ठाकुर साथै जमी रो विवाद होयो। ओ मोटेई पातावतां री जागीर रो गांव हो। बीठुवां रे किणी खेत नै लेय ठाकुर सूं वाद बढग्यो। ठाकुर रा आदमी आया अर खेत जोत दियो। चारणां घणा ई समझाया पण पार नी पड़ी छेवट बात जमर तक पूगगी। प्रश्न उठियो कै जमर करे कुण? पण जमर री बात किणी […]

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कविवर मुरारदानजी आसिया नोखड़ा

सरल हृदय, सहज सुलभ, सौजन्य मूर्ति, सर्वजन हितेषी, न्याय प्रिय अर संत प्रकृति रा मिनख हा मुरारदानजी आसिया नोखड़ा। नोखड़ा रै जेठूदानजी आसिया रै घरै आपरो जन्म होयो। समाज में व्याप्त रूढियां रा आप घोर विरोधी हा। अन्याय रा आप कदै ई समर्थक नीं रैया। न्याय रै प्रतिबद्धता रो एक दाखलो देणो समीचीन रैसी। आपरै आगै-नैड़ै रिस्तै में एक बूढा अर बेवा माजी हा जिणां रै कोई औलाद नीं ही। आपरै पिताजी जेठूदानजी उणां रै खेत माथै कब्जो कर लियो। आ बात मुरारदानजी सूं सहन नी होई। इणां माजी रै पक्ष में आपरै पिताजी रो ई विरोध कियो अर जेठूदानजी […]

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हाथी रै दांतुसल़ां बींध्योड़ै वीर, हाथी रो कुंभस्थल़ चीरियो

राजस्थानी वीरां री वीरत री कीरत यूं ई नीं है। इणां बगत पड़ियां आपरो आपाण बतायो अर जगत में सुजस लियो। किणी कवि सही कैयो है कै “सिर पड़ियां खग सांभणा इण धरती उपजंत।” इणी वीरां री अतोल वीरता रै कारण शक्तिदानजी कविया इणां नै नर रत्न मानतां लिखियो कै मरू प्रांत रै रतनां मे वीर एक अमोल रतन है :- संत सती अर सूरमा सुकवि साहूकार पांच रतन मरू प्रांत सोभा सब संसार।। सगल़ै संसार में इणां रै सुजस री सोरम पसरी थकी। ऐड़ो ई एक सूरमो होयो भाटी जोगीदास। भाटी जोगीदास जिकी वीरता बताई वा आज ई सुणियां वीरां […]

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सनातनी रिस्तां री रक्षार्थ मरण तेवड़णियो कवि कुशलजी रतनू

महाराजा मानसिह जोधपुर आप री रीझ अर खीझ री समवड़ता रे पाण चावा रैया है । रीझियां सामल़ै नै आपरो काल़जो तक देवण मे ओछी नी तकता तो खीझियां सामल़ै रो कालजो चीलां नै चबावण सूं पैला नैचो नी करता। एकर महाराजा मानसिंह आपरै मर्जीदान बिहारीदास खिची माथै किणी बात कारण अरूठग्या। खिची महाराजा री आदत नै जाणतो सो दरबार रे डर सूं जोधपुर स्थित साथीण री हवेली गयो अर साथीण ठाकुर शक्तिसिंह भाटी सूं शरण मांगी। शक्तिसिंह स्वाभिमानी, अर टणकाई री टेक राखणिया वीर हा। उणां दरबार रे कोप री गिनर नी कर र शरणागत नै अभयदान देतां आपरे अठै […]

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कवि सम्मान सारु आपरै गांव रो तांबा पत्र अडाणै राखणिया रायमल रतनू

कवि रो सम्मान किणी उदार पुरुष खातर कितरो महताऊ होवै आ बात आज रे समय मे समझणी आंझी है क्यूं अबै नी तो दिलां मे उदारता है नी कविता री कूंत। मध्यकाल़ मे रतनू रायमलजी होया। बधाऊड़ा (उण बगत रे जैसलमेर मे) मे रतनू मयारामजी रै शंकरदानजी होया जिणां नै बीकूंकोर रा ठाकुर जैतसी भाटी हरल़ायां गांव दियो। इणां री वंश परंपरा मे महेशदासजी होया जिणां रे अभैरामजी होया। अभैरामजी नै महाराजा अजीतसिंह घोड़ारण (नागौर) दियो। कोई आ ई कैवे कै घोड़ारण महेशदासजी नै मिली। अभैरामजी रै च्यार बेटा हा जिणां मे रायमलजी सबसूं छोटा हा। उणां दिनां लगोलग काल़ पड़ता रैता […]

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कीरत रो धाड़ो कियो !!

“दियां रा देवल़ चढै” री बात भक्त कवि ईशरदासजी सटीक कैयी है। उणां सही ई कैयो है देवणियो अमर है। राजा कर्ण आपरी वीरता सूं बत्तो दातारगी रै कारण जाणियो जावै-

दान के नहर की लहर तो दुरूह देखो,
प्रात की पहर तो ठहरगी रवि जाये की।।

इणी बात री हामी भरतां कविराजा बांकीदासजी कैयो कै आज कठै तो आशो डाभी है अर कठै बाघो कोटड़ियो ? पण उणां रे सुजस री सोरम आज ई अखी है।

कोटड़ियो बाघो कठै, आसो डाभी आज।
गवरीजै जस गीतड़ा, गया भींतड़ा भाज।।[…]

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दातार बांकजी रतनू सांढां

चेलार (वर्तमान पाकिस्तान) रो एक बांमण ओ प्रण लेर निकल़ियो कै जिको दातार वचन देवैला उणी सूं वो दान ग्रहण करेला। इणी द्रिढ संकल्प रै साथै निकल़ियो वो घणै दातारां कनै गयो पण उणनै वचन देवणियो दातार नी मिलियो। वो मेवाड़, मारवाड़, आमेर, जांगल़ आद स्थानां मे घूमतो घूमतो माड रै केई दातारां कनै फिरियो पण कोई उणनै वचन देवण री हिमत नी कर सकियो। छेवट निरास होय पाछो आपरै गांव जावतो साढां (जैसलमेर) रै रतनू बांकजी रै घरै रुकियो। दिनुगै रवाना होवती वेल़ा बांकजी उणनै दक्षिणा देवणी चाई तो उण आपरे प्रण रे बाबत पूरी बात बतावतै दक्षिणा लेवण सूं नटग्यो। […]

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जूझार हणूंवंतसिंह रोहड़िया सींथल़ रो सुजस

सीयां हमीरां सांगड़ां, मिल़ियै जाझै मांम
सांसण सीथल़ है सिरै, वीसासौ विसराम

महाकवि दुरसाजी आढा रो ओ दूहो सींथल़ री सांस्कृतिक विरासत, स्वाभिमान साहस अर टणकाई री टेक राखण री अखी आखड़ी रो साखिधर है। सींथल रा संस्थापक सांगड़जी रो पाटवी सपूत मूल़राज। मूलराज करनीजी रा अन्नय भक्त। करनीजी खुद सींथल़ पधारिया जद मूल़राजजीनै खुद आपरै हाथां सू जागा बताय कैयो कै आगै सूं अठै देवी री पूजा करजै आज उणी जागा करनीजी रो भव्य मंदिर है। इणी मूलराजजी री वंशज सींथल़ मे मूल़ा बाजै। मूल़राजजी री वंश परंमपरा मे पदमसिंह हुया अर इणां रै घरै हणुंवतसिंह रो जनम होयो। उण दिनां बीकानेर माथै महाराजा रतनसिह रो शासन हो, उणां रो एक मुलाजिम रिड़मलसर रो सिपाही मुसलमान हो। वो एक वार आपरी टुकड़ी साथै सींथल़ रुकियो। […]

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धिन चंदू राखी धरा-1

भगवती चंदू रो जनम माड़वा (पोकरण) रै संढायच उदैजी दलावत रै घर मा अणंदू मिकस री कूख सूं उनीसवै शताब्दी रै पूर्वाद मे हुयो। अणंदूबाई ई गुडी रै पोकरणां रै अत्याचारां रै खिलाफ जंवर कर चारणां रै स्वाभिमा नै अखी राखियो।  देवी चंदू रो ब्याव दासोड़ी रै रतनू रतनजी सूरदासोत रै साथै हुयो। उण दिनां पोकरण माथै सालमसिंह चांपावत रो अधिकार हो, सालमसिंह चांपावत, चांपावतां री ऊजल़ी परंमपरा रो निर्वाह नीं कर सक्यो, उण आप रै सलाहकारां री उल्टी सीख मानर माड़वा री कदीमी सीम नै उथाल़ण अर अखैसर ताल़ाब नै कब्जे मे करण सारू माड़वै रै अखैसर ताल़ाब तक आपरी सेना […]

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