एक झूठ को सभी ने बिना पड़ताल सच्च मान लिया
….विरोध के और भी कारण हो सकते हैं। उन पर अनुसंधान की आवश्यकता है। लेकिन सरूपदेजी झाली का एक चारण की हठधर्मिता से हाथ टूटने की कथा नितांत झूठी है। यह एक कपोल कल्पित व भ्रामक कथा गढ़ी गई ताकि निरपराध सैंकड़ों चारणों के मरने के आरोप में राज व राजा के प्रति झूठी हमदर्दी बटोरी जा सके।…
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