वैरी पर विकराल डोकरी!

वैरी पर विकराल़ डोकरी
दोहा
सिंघ सजायो संकरी, थिरू त्रिसूला थम्भ।
डाढी वाल़ी डोकरी, जय हो नित जगदंब।।१
सिंह को सजाकर शंकरी! हे महामाया! आप त्रिशूल का स्तंभ लिए स्थिर है। हे डाढीवाली डोकरी ! आप की सदैव जय हो! आप का जय जय कार हो!
सिंघ बिराजी सांभवी, असुर हणण उतबंग।
रे डाढाल़ी डोकरी, रंग मेहाई ! रंग।।।।२
हे मां सांभवी आप असुरों के मस्तकों का शिरोच्छेदन करने को सिंह पर सवार होकर सदैव तत्पर रहती हो! हे डाढी वाली डोकरी! हे मां ! मेहाई आप को रंग है। आप को पुन: रंग है। आप का अभिनंदन है।
खडग लियां कर खप्परा, शिवा त्रिशूलां संग।
वरदाई वाहर रहै, रंग मेहाई! रंग।।३
कर में खड़ग और त्रिशूल लिए हे शिवा! हे वरदायिनी ! मां मेहाई! आप भक्तों की मदद के हेतु सदैव तत्पर रहती हो आप को रंग है। आप को पुन: रंग है। आप का अभिनंदन है।
गीत: सावझडो, गाहा चौसर
थूं नवलख सरताज डोकरी!
थारै हाथां लाज डोकरी!
रीझै तो दे राज डोकरी!
खीज्यां छीनै ताज डोकरी!!१
हे मां ! हे डोकरी! तू नौलख शक्तियों की सरताज है। नौ लाख लोबड़ीयाली की सिरमौर है। हे मां! मेरी लाज तुम्हारे हाथों में है। हे डोकरी! तू अगर प्रसन्न हो जाए तो राज्य वैभव प्रदान करती है! (राव बीका को मां करनी ने बीकानेर का राज्य प्रदान किया था) तू अगर खीज जाए तो राजाओं के ताज छीन लेती है! (राव कान्हा पर कुपित होने पर मां करनी ने एक निमिष मात्र में उसका ताज छीन लिया था)
वित धन देवे वाज डोकरी!
खरचौ पांणी नाज डोकरी
सदा भरै सुख साज डोकरी!
भय सब देणी भांज डोकरी!।।२।।
वही वित्त, धन और घोड़े (वाज) आदि ऐश्वर्य प्रदान करने वाली डोकरी मां करनी ही है। मेरा खर्चा पानी (जीवन की दिनचर्या के निबाह का सामान) और अनाज आप ही हो, डोकरी आप ही तो मेरे सभी सुख साज को भरती हो। हे डोकरी आप मेरे सारे भय का नाश करती हो
वंदन वड वसुधा ज डोकरी!
गंजण अरियां गाज डोकरी!
लोपी मैं कुल़ लाज डोकरी!
तौ पण थूं री मां ज डोकरी!३
इस वसुधा की सबसे बड़ी शक्ति आप ही हो! दुश्मनों के संहार हेतु आप बीजली की तरह उन पर तूट पड़ती हो! हे! मां! हे! डोकरी! मैं ने अपनी कुल मर्यादा का उल्लंघन किया है। पर हे डोकरी! तू हमेशा ममताययी रही है। हे डोकरी तू ने मां जैसे एक पुत्र से स्नेह रखती है उसी भांति मुझसे स्नेह करती रही हो!
अबखी वेल़ां आज डोकरी!
मेहाई महाराज, ! डोकरी!
जबर फंसी है जाज डोकरी!
किणनैं दूं आवाज डोकरी!४।।
आज मेरी दशा खराब है। समय और परिस्थितियां प्रतिकूल है। मेरा समय खराब चल रहा है। हे! मेहाई महाराज! (मेहाजी किनिया की सुपुत्री) हे डोकरी!मेरी सुधि लो!मेरी नाव, मेरा जहाज बीच भॅंवर मैं फॅंस गया है। हे डोकरी!अब मैं तुम्हारे अलावा किसको गुहार लगाऊं?
कूके जगडू शाह डोकरी!
दीसै कोई न राह डोकरी!
आगे समद अथाह डोकरी!
सिर पर रात सियाह डोकरी!५
हे डोकरी!यह वणिक जगडू शाह करुण स्वर में आर्तनाद कर रहा है! मुझे और कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है। हे डोकरी ! मेरे आगे अथाह जलराशि से युक्त समुद्र के अलावा कुछ भी नहीं है। सिर पर सियाह (घोर अमावस्या और मेघाच्छादित काली) रात है!
गरजे मेघ घटाह डोकरी!
छतराळी कर छांह डोकरी!
करी उदधि बिच राह! डोकरी!
निज रो बिरद निबाह डोकरी!६
ग्रही बीसहथ बांह डोकरी!
मात बणी मल्लाह डोकरी!
जंगल़धर पतशाह डोकरी!
वाह! करनला! वाह! डोकरी!!७
हे डोकरी!इस भयंकर तूफान में मेघ की घटाएं गरज रही है। सदैव सिर छत्र धारण करने वाली डोकरी ने ! अपनी कृपा की छत्रछाया भक्त जगडूशाह पर कर दी। और समुद्र में उस के लिए रास्ता निकाला! और तुफान में स्वयं का भीड़ भंजनी के बिरुद का निर्वाह कर वणिक भक्त की की मदद की और और बीस हाथ वाली ने उसकी बांह पकड़ कर उसकी मदद कर उसको बचाया! हे डोकरी!आप स्वयं उस वणिक की मल्लाह बनी और आप ने उसकी नाव को पार लगाया! हे जंगल धर पतशाह डोकरी! इस अदभुत कार्य से आप की प्रशंसा चतुर्दिक। होने लगी! सभी वाह डोकरी! वाह करनला! की आवाज से आप का गुणगान करने लगे!
सुत लाखण रे काज डोकरी।
जाय भिडी जमराज डोकरी।
कियौ अलौकिक काज डोकरी।
रंग! रंग! रिधूराज डोकरी!८
हे डोकरी! जब आप का पुत्र लाखण कोलायत झील में डूब गया तो आप यमराज से जाकर अड़ गये और आप ने अलौकिक कार्य कर उस को पुनर्जीवित किया! (आप ने मुर्दे में जान डालकर अपने पुत्र को जीवन दान दिया!) ! हे डोकरी!आप अपने भक्तों के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है। हे रिधू बाई राज ! आप को रंग है। आप का अभिनंदन है।
कोहला गिरि अधिराज डोकरी!
संग ले देव समाज डोकरी।
सातां दीप! बिराज डोकरी!
राजे मां! हिंगलाज डोकरी। ९
हे डोकरी! आप ही कोहला पहाड़ की अधिराज हो जहां पर आप साता द्वीप पर अन्य देव समाज सहित विराजमान होकर आप वहां शोभायमान हो रही हो!
सगत वड़ी संसार डोकरी।
करै गजब शिणगार डोकरी।
हेमाळो गळहार डोकरी।
श्री करनी किरतार डोकरी। १०
हे डोकरी! आप ही संसार की सबसे बड़ी शक्ति हो। आप अद्भुत शृंगार करती हो जो वर्णन से परे है। आप हिमालय को गले का हार बनाकर पहनती हो। हे डोकरी! श्री करनी आप स्वयं ही किरतार हो! ईश्वर हो!
देशनोक मढ़ द्वार डोकरी।
रोज भरे दरबार डोकरी।
पालण पोखणहार डोकरी।
पाप प्रजाळणहार! डोकरी!११
देशनोक मढ़ के द्वार पर हे डोकरी आप दरबार भरके रोज वहां बैठती हो जहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है। हे डोकरी आप ही पालन पोषण करने वाली हो। हे डोकरी! आप हमारे समस्त पाप के पुंज को जलाकर ख़ाक़ करती हो।
नवखंड रही निहार डोकरी।
होय सिंह असवार डोकरी
लेय हाथ तलवार! डोकरी!
लखनव झूलर लार !डोकरी!!१२
हे डोकरी! आप सिंह पर सवार होके हाथ में तलवार लिए नवखंड को निहारती रहती हो। आप के पीछै सदैव नवलख लोवड़ियालीयों का समूह चलता रहता है।
चंड मुंड संहार डोकरी!
करै दैत पर वार डोकरी!
हरो भोम रो भार डोकरी!
अंब करो उपकार डोकरी!१३
हे डोकरी ! आप चंड मुंड आदि का संहार करो! हे डोकरी !आप दैत्यों पर आक्रमण कीजिए। हे डोकरी! आप भूमि पर चंड मुंड इत्यादि दैत्यों का नाश कीजिए और भूमि पर बढ़े पाप के भार को हर लिजिए। हे डोकरी! हम सब पर इतना उपकार कर दीजिए!
कान्है लोपी कार डोकरी!
करी आप सूं रार डोकरी!
बाघण बण तिणवार डोकरी!
दियो भेज जमद्वार डोकरी!१४
हे डोकरी! जब राव कान्हा ने आप से बहसबाजी की और अपनी मर्यादा की लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन किया (आप द्वारा खींची गई लकीर का उल्लंघन करने की कोशिश की) तब और तब आप ने बाघिन बन कर उस के प्राण हरे और उसे यमद्वार भेज दिया! उस को मार दिया!
विपद विदारणहार डोकरी!
करै भगत! जयकार! डोकरी
नमें थनें नर नार डोकरी।
खमा!खमा!खोडियार डोकरी!!१५
हे विपत्ति को हरने वाली विपत विदारनि! डोकरी! तुम्हारी हर कोई भक्त जय जय कार करते हैं। हे डोकरी! सभी नर नारी तुम्हें नमन करते हैं। हे खोडियार आप को खमा! खमा करते हुए खमकारे देते हैं।
कीनियाणी किरपाळ डोकरी।
बैठ’र जूनी जाळ डोकरी।
बणनै नैनी बाळ डोकरी!
पुरसै थाळ रसाळ डोकरी। १६
हे कृपालु! किनियानी डोकरी मां करनला! आप सुवाप ग्राम में जाल के अति प्राचीन वृक्ष के नीचे एक कन्या के रूप में बैठकर अपने भक्तों को मिष्ठ भोजन करवाया करती हो और रस से भरे भोजन के थाल परोसती रहती हो! (ऐसा कहा जाता है कि मां करनी ने बालिका स्वरूप में राव शेखा की फौज को उसी जाल के वृक्ष के तले दही और बाजरे की रोटी परोस कर भोजन करवाया था और विजयश्री का आशीर्वाद भी दिया था)
रहे बाल रखवाल़ डोकरी!
प्रीत पुत्र सूं पाल़ डोकरी!
काल़ तणौ पण काल़ डोकरी!
मां मोगल मछराल़ डोकरी!।।१७।।
हे डोकरी! आप सदैव बालक की रखवाली करते हो। रक्षा के लिए तत्पर रहते हो। हे डोकरी !आप अपने भक्तों से पुत्रवत प्रेम रखती हो! आप काल की भी काल हो। हे डोकरी! मछराली! मां मोगल भी आप ही हो।
वहै हाथ लै व्याल डोकरी!
कसी हाथ किरमाल डोकरी!
डणकै डुंगर गाल़ डोकरी!
वैरी पर विकराल़ डोकरी!।।१८।।
हे डोकरी! आप एक हाथ में नाग लिए और दूसरे हाथ में तलवार लिए सदैव विचरण करती रहती हो। आप गिरि शिखरों और कंदराओं में सदैव सिंह गर्जना करती रहती हो! हे डोकरी!आप वैरीजनों पर बहुत ही विकराल हो।
पूगै जाय पयाळ डोकरी!
भरे आभ में फाळ डोकरी!
अंबा! आव उताळ डोकरी!
बाईं! करजै बाळ डोकरी!१९
हे डोकरी कभी आप पाताल में पहुंच जाती हो तो कभी आकाश में लंबी छलांग लगाती हो। हे डोकरी! हे अंबा आप शीघ्र आओ और हमारी फिक्र करो। हे डोकरी! हे बाई (मां) मेरी सुधि लो!
बोलावै है बाळ डोकरी!
टाळ विघन ततकाळ डोकरी!
पुहमि री प्रतिपाळ डोकरी!
लाख रंग लटियाळ डोकरी!२०
हे डोकरी ! आप को आप के बालक बुला रहे हैं। पुकार रहे हैं। हमारे विघ्नो को तत्काल टाल दीजिए। हर लीजिए।
आप धरती की प्रतिपालक हो। हे लटियाली आप को लाख रंग है। आप का अभिनंदन है।
खूबड़ मां! खोडियाळ डोकरी!
चामुंडा चिरताळ डोकरी!
वांकल! जीण! भुवाल डोकरी!
श्री बिरवड़ बिरदाळ डोकरी!२१
हे डोकरी! आप ही मां खूबड़ हो। आप ही खोड़ियाल़ या खोडियार हो। हे डोकरी। आप ही चिरताली मां चामुण्डा हो। आप ही वांकल, जीण भुवाल और बिरदाली मां बिरवड़ी हो!
करडी पण करूणाल़ डोकरी!
वेरै हरदम व्हाल डोकरी!
ओखा धर उजवाल़ डोकरी!
दैत मार डाढाल़ डोकरी!।।२२।।
हे डोकरी आप उपर से भले ही सख्त (करड़ी) लगती हो पर भीतर से करुणामयी हो। आप अपने भक्तों के लिए सदैव प्रेम की वर्षा करती रहती हो। प्रेम बिखेरती रहती हो। हे डोकरी!आप ओखा मंडल का उजाला हो (जाम नगर के पास भीमराणा जो कि ओखामंडल के पास जोगमाया मां मोगल का एक शक्ति पीठ) दैत्यों को मारने वाली डाढाल़ आप ही हो!
भलो नींब तर भाल़ डोकरी!
दीपै गोरवियाल़ डोकरी!
धूप दीप अर माल़ डोकरी!
धरूं लापसी थाल़ डोकरी!।।२३
हे डोकरी! मां मोगल के स्वरूप में आप एक अच्छे नीम के पेड़ के नीचे गोरवियाला ग्राम में विराजमान हो। हे डोकरी! आप को धूप, दीप और माला भेंट चढ़ाऊं। हे डोकरी! या आप को लापसी के थाल का भोग मैं लगाऊं।
बणनें चील विहंग डोकरी!
आप बणी अवलंब डोकरी।
शेखे री सुख थंभ डोकरी।
करनल कृपा कदंब डोकरी। २४
हे डोकरी! आप अपने भक्त राव शेखा की रक्षा करने हेतु चील पक्षी का रूप धारण कर उस का सहारा बनी थी। (ऐसी मान्यता है कि मां करनी ने चील का रुप धारण कर अपनी पीठ पर बिठाकर अपने भक्त राव शेखा को मुल्तान से वापस सकुशल पूंगल वापस लाई थी) हे डोकरी! राव शेखा की सुख स्तंभ आप ही हो। हे डोकरी! हे करनला! आप ही कृपा की कदंब वृक्ष हों।
छपन क्रोड चामंड डोकरी!
चौसठ जोगण संग डोकरी!
मझ चौरासी अंग डोकरी!
अड़े आभ उतबंग डोकरी!२५
हे डोकरी! आप में ही छप्पन करोड़ चामुण्डा है। आप के साथ चौसठ योगिनी है। आप के अंग में चौसठ योगिनीयाॅं है। आप में चौरासी चारणी आप के अंग में समाहित है। हे डोकरी !आप का मस्तक तो आकाश को छू रहा है।
जय आवड़ जगदंब! डोकरी!
भली मात भुजलंब डोकरी!
भेल़ा वणै भुजंग डोकरी!
ओढै लोवड अंग डोकरी!।।२६।।
हे डोकरी! हे भली (अच्छी) जगदंबे मां!हे भुजलंबे!आप ही आवड़! हो आप की जय हो। आप भुजंग की बुनावट से बुने हुए भेल़िये को या लोवड़ी को अपने अंग पर ओढ़ती हो अपने अंग पर धारण करती हो। (नाग या सर्प रस्सीनुमा होता है ठीक धागे की तरह! जोगमाया के बारे में यह कहा जाता है की वो काली ऊन से बुना गया भेलिया या लोहड़ी जो कत्थई रंग का होता है। धारण करती है।)
जीत दिराणी जंग डोकरी!
सदा रेय शिशु संग डोकरी!
रंग मां आवड रंग डोकरी!
रोक्यौ जेण पतंग डोकरी!।।२७।।
हे डोकरी! आप ही जंग में विजयश्री को देनेवाली हो। हे डोकरी! आप सदैव अपने बच्चों के साथ रहती हो। हे मां आप को रंग है। आप को साधुवाद है आप का अभिनंदन है! आप ही नें तो सूर्य को उगने से रोक लिया था! (ऐसा कहा जाता है की जब भाई महिरख को सर्पदंश हुआ और मां खोडियार उसे सूर्योदय से पहले सजीवन करने हेतु अमृत कुंभ लेने जब पाताल गये और खोडियार को देरी हुई तो सूर्योदय न हो उसके लिए मां आवड़ ने सवा प्रहर तक सूर्य को रोक दिया था। उसी भाव को इन पंक्तियों में समाविष्ट किया है। )
थानक बाजै चंग डोकरी!
मादल़ भेरी मृदंग डोकरी!
ध्रींगड ध्रींगड ध्रंग डोकरी!
सुण व्है आणंद अंग डोकरी!।।२८।।
हे मां! डोकरी! आप के थांनक या मंदिर में चंग, मादल़, भेरि, मृदंग आदि वाद्ययंत्र बजते रहते हैं। जिसकी ध्रींगड ध्रींगड ध्रंग ध्वनि सुनकर हमारे अंग अंग में आनंद व्याप्त हो उठता है।
सिध चारण मुनि संग डोकरी!
मानैं थनैं मलंग डोकरी!
गुणियल नीरमल गंग डोकरी!
रखे छोडती संग डोकरी!।।२९
सिद्ध, चारण और मुनियों के साथ साथ आप को फकीर या मलंग भी हे डोकरी मानते हैं और आप का पूजन अर्चन करते हैं। हे निर्मल गंगा के समान डोकरी हमारा साथ सदैव देना। आप हमारा साथ मत छोड़ना!
आई रह अगवाण डोकरी!
नरपत है नादान डोकरी!
करजै मां कल्याण डोकरी!
वरदा दे वरदान डोकरी!।।३०
हे डोकरी! हे आई आप मेरी सहायता में अग्रसर रहो। हे डोकरी !नरपत तुम्हारा एक नादान शिशु है! हे डोकरी! हे मां! मेरा कल्याण करो। हे डोकरी! वरदायिनी! वरदा! मुझे वरदान दो!
आन बान अर शान डोकरी!
सदा रखै कुल़ मान डोकरी!
कविता री कलगान डोकरी
वसू करै विद्वान डोकरी!।।३१
हे ! डोकरी! आप ही मेरी आन बान और शान हो। हे डोकरी! आप सदैव कुल की मां मर्यादा को बचाए रखती हो। हे डोकरी! आप ही तो कविता का कल कल गान हो। आप ही तो वसुधा पर हमें मां सरस्वती के रूप में प्रसन्न हो कर विद्वान बनाती हो।
पींगल़ छंद प्रमाण डोकरी!
डिंगल़ रो दे दान डोकरी!
अलंकार दे आन डोकरी!
रस री कर थूं ल्हाण डोकरी!।।३२
हे डोकरी! आप ही तो पींगल के छंदो का प्रमाण हो। डिंगल का हे डोकरी मुझे दान देकर मेरी कविता में नाद सौंदर्य प्रदान करो। हे डोकरी! कविता में अलंकार इत्यादि आप ही प्रदान करके रस की बौछार करती है।
महि बढावै मान डोकरी!
तूं सुर पंचम तान डोकरी!
गज़ल गीत दे गान डोकरी!
साम गान री वाण डोकरी!।।३३
हे डोकरी! धरती पर मान सम्मान आप ही तो बढ़ाती हो। हे डोकरी आप ही तो पंचम सूर की तान हो। आप ही तो मां सरस्वती के रूप में गीत ग़ज़ल आदि का गान वरदान में देती हो। हे डोकरी! आप ही साम गान की वाणी हो।
बिसहथी मां बांण डोकरी!
बीसोतर कुळ भाण डोकरी!
बगसो छोरू जांण डोकरी!
अवगुण जांण अजांण डोकरी!३४
हे डोकरी! आप ही बीसहथी बाण मां हो। हे डोकरी! आप ही बीसोतर समाज की सूर्य हो। आप मुझे अपना छोरू (पुत्र) जान कर बक्स दो। हे डोकरी मेरे जाने अंजाने में हुए अवगुण या कृत्य माफ़ करदो आप नज़र अंदाज़ करो।
आंख्यां चंदो भांण डोकरी!
बाजै गगन निशाण डोकरी!
बैठी सिंघ पलाण डोकरी!
करुणानिधि किनियांण डोकरी!३५
हे डोकरी! सूरज और चंद्रमा आप की आंखें हैं। हे डोकरी !आप के नगाड़ै की ध्वनि गगन में बजती रहती है। हे डोकरी! हे करुणानिधि किनियाणी आप सिंघ को पलाण कर के उस पर सवारी करती हो।
दीपत मढ़ देशाण डोकरी!
धिन जंगल़ धणियांण डोकरी!
थिर नेड़ीजी थांन डोकरी!
महि रो करै मथाण डोकरी!!३६
हे डोकरी! आप देशनोक मढ़ में में दीप्तिमान हो रही हो। जंगलधर की स्वामिनी आप को धन्यवाद है साधुवाद है। देशनोक में नेडीजी के स्थान में आप स्थिर विराजमान रहते हैं और सदैव महि बिलोते रहते हैं।
मामडियाल़ी मात डोकरी!
सगत जगत साक्षात डोकरी!
हेलै हाजर थात डोकरी!
बाल़क करवा बात डोकरी!।।३७
हे डोकरी! मामड़ियाली मात आप ही हो। आप ही जगत की साक्षात शक्ति हो। जो पुकार करने पर शीघ्र ही हमारे पास आती है। हस्तामलकवत है। और सदैव बालक से बात करने को तत्पर रहती हो!
भैरव थारै भ्रात डोकरी!
चमर करै दिन रात डोकरी!
नवलख संग नवरात डोकरी!
रमै रास खुश थात डोकरी!।।३८!।
हे! डोकरी! भैरव तुम्हारा भ्राता है। जो रात दिन तुम्हारा चंवर ढुलाता रहता है। हे डोकरी !नौलख लोवड़ियाली संग नवरात्रि में आप रास खेलकर प्रसन्न होती हो!
घुंघर घम घम थात डोकरी!
डम डम डाक बजात डोकरी!
मुदरै सुर में गात डोकरी!
लियां मुंड नर हाथ डोकरी!।।३९
हे डोकरी रास के वक्त तुम्हारे घूंघरु की घम घम ध्वनि होती रहती है। साथ में आप डम डम की ध्वनि से डाक बजाती रहती हो। हे डोकरी आप हाथों में नर मुंड लिए मधुर स्वर में गा रही हो।
पूजूं उठ प्रभात डोकरी!
अंब मात अवदात डोकरी!
टाल़ै तन री घात डोकरी!
वातां वसु विख्यात डोकरी!।।४०
हे डोकरी! में सुबह उठते ही तुम्हारा पूजन करता हूं। हे डोकरी! हे अंबा! हे जननी! आप अवदात हो। हे डोकरी! आप तन की घात (आधि, व्याधि उपाधि आदि) को टाल देती हो! हे डोकरी आप की बातें संसार में बहुत ही विख्यात है। प्रसिद्ध है।
हरपळ जोडूं हाथ डोकरी!
भर भगती रो भात डोकरी!
तात मात तूं भ्रात डोकरी!
सबळ निबळ रो साथ डोकरी!!४१
हे डोकरी! में हरपल तुम्हे हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं। हे डोकरी! विनती है की मुझ को भक्ति का भात भरिये। हे डोकरी!आप ही पिता, माता, भाई सबकुछ हो!हे डोकरी! सबल और निर्बल का एक मात्र सहारा आप ही हो।
गाई तव गुणगाथ डोकरी!
रीझौ! आईनाथ डोकरी!
प्रणमें नरपत पात डोकरी!
रख मम सिर पर हाथ डोकरी!४२
हे डोकरी! मैंने तुम्हारे गुणों की गाथा को गाया है। हे डोकरी! हे आईनाथ मुझपर आप रीझिये! प्रसन्न होइये। हे डोकरी! कवि नरपत आप को प्रणाम करता है। हे डोकरी! अपना हाथ मेरे मस्तक पर रख मुझे आशीर्वाद दो!
दोहा
वान विरद वरदायनी, दरस तिहारा देख।
मिटत भवो भव मिनख रा, लाखों भूंडा लेख।।१
हे वान विरद वरदायनी आप के दर्शन करने मात्र से मनुष्य के जन्म जन्मांतर के विधाता द्वारा लिखे हुए लाखों अशुभ लेख भी मिट जाते हैं और शुभ हो जाते है।
(स्तुति का प्रथम दोहा दलपत सिहजी मथानिया और अंतिम दोहा काल़ू सिंह जी गंगासरा का साभार) मां के श्री चरणों में।
©डॉ. नरपत आसिया “वैतालिक”
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बहुत सुंदर रचना
जय माँ करणी
जय मां करणी भवानी
श्री करणी सदा सहाय
असंभव को संभव करने वाली शक्ति
जय मां करणी
हुक्म आज वैरी पर विकराल डोकरी
जदे आज इये नो पढ़न बैठो तो लेकिन पढ़न रो तो बहानो ही हतो बाकी डोकरी इतो प्रसन्न कर दियो ओर इण ने गावण लाग गयो
मन रे मीन इती खुशी हुई पूछो भी मत वाकई में डोकरी रो चमत्कार हुओ मनो महसूस भी हुओं
डोकरी रो आशीर्वाद सदा यूं ही बन्यो रेवै सबों माथे
जय मां करणी माता
जय मां करणी
तू सब जग जाण है डोकरी!
दे सब तारी आण डोकरी!
सब योद्धा रो प्राण डोकरी!
रावण मार्यो बाण डोकरी!
बहुत ही सराहनीय, अर सुन्दर स्तुति हैं मां री ,अप्रतिम रचना करी हैं सा ,
जय माताजी
बहुत सुंदर रचना हुकम
भक्ति रस में में तल्लीन करनारी रचना
मां करनी आपको और प्रेरणा देवे!!!
में महीपाल रतनू
चाणकदानजी रतनू का पुत्र
ठिकाना देवरासन
गुजरात, मेहसाना
धन्यवाद! जय मां करनी!
इसका हिंदी में कहां से समझ सकते हैं
Jai ho nit jagdamb jai maa karni
Jai mata ji ki sa
अति सुंदरम लेखन — नरपत् सा
जय माँ करणी
Jai ho deshnok dhirani ki sa
करणी सदा सहायते जय माँ भवानी
करणी सदा सहायते
जय मां करणी
मां का गुणगान करते समय पाया कि मैं मेहाई के समीप हुं,
मन आनंदानुभव कर रहा है
बहुत सुंदर
जय माताजी!
Jai ho maa karni ri sa
बहुत ही सुंदर शब्दो में माँ करनी का बखान किया है जय हो माँ करनी जी की
धन्यवाद सा। जय मां करनी!
Jai maa karni
बहुत ही शानदार सा
Jai ma karni
In my dream I see karni mata
And I comes there
Jai maa karni