फूंफी रासो – ठाकुर मुरार दान जी मण्डपी कृत
दोहा पति जयपुर जोधाण पत, भेळा होय दो भूप। सांभर की किन्हीं सला, रच्यो राड़ को रूप।। 1।। कूरम भाखी कमधजां, असी करां उपाय। उभयराज राखां अठै, आख्या चौड़े आय ।। 2 ।। आप पति आमेर है, कही कमध कर जोड़ । मो आफत बीती हमे, रूस रह्या राठौड़ ।।3।। तिण जागां इक तुरकड़ी, आई करण उपाय । बहकाई दळ देखकर, जकी सुणाई जाय ।।4।। जयपुर दळ आयो जबर, हारो मत अब धीर। ताण दिया तम्बु बड़ा, नळियासर की तीर।।5।। शेख समद काजी मुगल, सुण सारा समचार । मदद बुलायो मीर खां, धीरज मन में धार ।।6।। आठ दिवस आयो […]
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