मा अर मातृभाषा

हे मातृभाषा!
तूं म्हारी रग -रग में रमगी है
जिण भांत –
म्हारी जामण रो ऊजल़ो दूध
विमल़ बुद्ध देवण वाल़ो
बो न्हाल़ म्हारी
नाड़ी -नाड़ी में
रम्योड़ो
भाल़ हे !बडभागण
तैं में अर म्हारी जामण में […]

» Read more

चंवरां वाल़ी चूंप, भुरजां सूं दीसै भली!

।।मुरधर रा रूप झूंपड़ा मांटी।।
।।गीत वेलियो।।

मुरधर रा रूप झूंपड़ा मांटी,
आनधारियां तण-आवास।
आगर-नेह ओपता नौखा,
अतँस सैणां भरण उजास।।1[…]

» Read more

घर बेटी बिन जेम गिणो

।।छंद रैंणकी।।
सरवर बिन नीर मांम बिन सायर,
दान बिनां दातार दखां।
भूपत बिन राज काज बिन भलपण,
अंतस बिन अपणास अखां।
धेनूं बिन दूध बिनां धन धणियां,
मांण बिनां मेहमांण मुणो।
गिरधर कवियांण सुणी कथ गहरी
घर बेटी बिन जेम गिणो।।१[…]

» Read more

चीरहरण

धरण रो मत कर चीरहरण
कल़जुग रा दुसासण!
मत मान
दुजोधन रो कैणो
सैणो है तूं
ऐणो क्यूं बणै है?
खिणै क्यूं है खाडो ?
निज हाथां सूं
निज नै ई पटकण ऊंडेरो
सत मत मिटा […]

» Read more

ओल़भो

ओल़भो!
कीकर देवांला ?
देवांला किणनै ओल़भो?
पाव री ठौड़ !
पंसेरी रो घाव!
कर रैया हो डाव ऊपर डाव
साव साचाणी
बल़ियोड़ै मूंडै
कीकर देवांला फूंक
अपरोगा लाग रैया है […]

» Read more

आसरो

तल़तल़ीज्या तल़तल़ाटै सूं
हल़फल़िया
डरिया -घिरिया
आकल़ -बाकल़ होय
थकतां -थकतां ई
तकतां -तकतां ई
जोय लियो एक आसरो!
गांव रै गवाड़ में
घेर घुमेर ऊभा
आभै सूं बंतल़ करता […]

» Read more

छत्रिय मित्र रो वैर लेवणियो चारण कवि कान्हा आढा

सांई दीन दरवेस सही ई लिखियो है कै मित्र ई करणो है तो चारण नै करणो चाहीजै क्यूंकै वो ई जीवतै नै अर मरियां पछै ई समरूप सूं चितारै – मित्र कीजै चारणां, बाकी आल़ पँपाऱ। जीवतड़ां जस गायसी, मूवां लडावणहार।। इण बातरी सार्थकता सिद्ध करणिया घणा ई किस्सा है। ऐड़ो ई एक किस्सो है कविवर कान्है आढै रो। बीकानेर राव जैतसी रो समकालीन कवि कान्हो इणी रियासत रै गांव भालेरी रो वासी हो। मोटो अमल रो बंधाणी। एक सेर अमल रो मावो थित रो। कम आमदनी रो गांव अर इतरो नसो सो पार पड़णी दोरी। कणै किणी ठाकर रै तो कणै […]

» Read more

मतीरै री राड़, रोकण रै जतन में जूझणियो कवि चांदो बारठ

ईंदोकली (नागौर) गांव आपरी साहित्यिक अर सांस्कृतिक चेतना रै पाण चावो रैयो है। इण गांव में एक सूं बधर एक कवि अर सूरमा होया जिणां चारणाचार नै मंडित कियो अर जगत में सुजस लियो। बारठ अखैजी रै वंशजां रै इण गांव में आंकधारी जनमिया जिणां आपरी बांक नै कायम राखी। रणांगण में जूझण री इण घराणै री आदू ओल़ रैयी है।सिहड़दे सांखलै रै साथै रूण री राड़ में अलाऊदीन रै खिलाफ वीरगति वरणियो सांढल, आऊवै रै धरणै में चारणां री कीरत निकलंक राखणिया बारठ अखोजी, च़ंद्रसैण रै साथै जूझणियो बारठ भल्लण अर वीर रतनसी जैड़ै सपूतां री कड़ी में ई […]

» Read more

डिंगल़ साहित्य साधकां रै नाम

राजस्थानी डिंगल़ साहित्य री साधना में जिकै साहित्य साधक लागोड़ा है वै नाम री नीं काम री वाट बैय रैया है।इणां री रचनावां में राजस्थान रै इतिहास, संस्कृति अर लोक भावनावां री सजोरी व्याख्या होई है।भक्ति ,संस्कृति अर प्रकृति रै पेटै इणां आपरी कलम रो कमाल दिखायो है।म्हारा कीं दूहा ऐड़ै ई साहित्य साधकां नैं समर्पित-

दूहा
गोविंद सुत कवियो गुणी, वसू वडो विद्वान।
गिरा गरिमा गजब्ब री, दाटक शक्तिदान।।१ […]

» Read more
1 43 44 45 46 47 51