राजस्थान री संस्कृति, प्रकृति, जीवनमूल्य, परंपरा अर स्वाभिमानी संस्कारां री अंवेर करण वाळो अंजसजोग छापो ‘रूड़ौ राजस्थान’ तर-तर आपरौ रूप निखारतो, सरूप सँवारतो, समै री माँग मुजब सामग्री परोटतो पाठकां री चाहत रो केंद्र बणतो जा रैयो है। इण ओपतै अर उल्लेखणजोग छापै रा सुधी-संपादक भाई श्री सुखदेव राव मायड़भाषा राजस्थानी अर मायड़भोम राजस्थान रै गौरवमय अतीत रा व्हाला विरोळकार है। इण रूड़ौ राजस्थान छापै रै दिसंबर, 2019 अंक में आपरै इण नाचीज़ मित्र रो एक आलेख छपियो है, इण सारू भाई सुखदेव जी राव रौ आभार अर आप सब मित्रां सूं अपेक्षा कै आज रै समै परवाण ‘संस्कारां रै संकट सूं जूझता रिश्ता’ री साच सोधण सारू ओ आलेख ध्यान सूं पढ़ण री मेहरवानी करावजो।[…]
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