न्यात न्यात में होवत नाथो!
जोधपुर माथै महाराजा सूरसिंहजी रो राज। सूरसिंहजी रै खास मर्जीदानां मांय सूं एक पुष्करणा ब्राह्मण नाथोजी व्यास ई हा। नेकदिल अर उदारमना मिनख। उणांरै एकाएक बाई ही। दिन लागां बाई परणावण सावै हुई।
बेटी मोटी हुवै जणै बाप सूं पैला मा नै चिंता हुवै। इणी चिंता रै वशीभूत एक दिन गुराणी रै मन में जची कै हमै बाई रा हाथ पील़ा कर दैणा चाहीजै। इण सारू एक दिन उवां व्यासजी नै कह्यो कै –
“जगत में खांचिया फिरो। डूंगर बल़ता निगै आवै पण पगै नीचै सिल़गती निगै नीं आवै। बाई मोट्यार माल हुई है अर थे आंधा हुयोड़ा हो। कांई आ बोल’र कैसी कै म्हनै हमे परणावो।”[…]