राजस्थानी रो पैलो जनकवि रंगरेलो वीठू

राजस्थानी डिंगल़ काव्य धारा रो इतियास पढां तो आपांरै सामी मध्यकाल़ रै एक कवि रो नाम प्रमुख रूप सूं ऊभर र आवै बो है रंगरेला वीठू रो। रंगरेला वीठू री कोई खास ओल़खाण इतियास ग्रंथां में देखण नैं नीं मिल़ै। रंगरेला रो जनम सतरवैं सईकै में जैसल़मेर रै सांगड़ गांम में होयो। कवि रो मूल़ नाम वीरदास वीठू हो। काव्य रा कणूका कवि में परंपरी सूं ई हा। कवि री रचनावां घणकरीक कुजोग सूं काल़ कल़वित होयगी पण जिकी रचनावां लोक रसना माथै अवस्थित रैयी, उणनैं पढियां वीरदास रो जनवादी कवि सरूप आपांरै सामी आवै। जिण बगत सत्ता सूं शंकतै […]

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सोनै जेड़ी कल़ंकित वस्तू पैरी तो तीन सौ तलाक

।।जैतमाल राठौड़ अर पीठवै मीसण रै अदभुत प्रेम री कहाणी।।

पीठवो मीसण पन्द्रहवीं सदी रो मोटो चारण कवि। इण पीठवै रो गांम कोई बोगनियाई कैवै तो कोई कैवै कै पक्को नीं कै ओ कवि किण गांम रो होतो।

खैर। एकर भयंकर काल़ पड़ियो तो इण रा माईत गुजरात गया जठै जाल़िवाड़ै गांम रे झूलै समंद्रसी इण रै बाप नैं मारर इणरी बैन नैं माडै परण लीनी।  पीठवो उण दिनां आपरी मा रै कूख में हो सो इणरी मा आपरी पीठ चिराय धणी री ऐल राखण नैं इणनैं जलम दियो, अर बा आपरै धणी रो साथ करर सुरगां पूगी।[…]

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कलो भलो रजपूत कहीतो

कल्ला रायमलोत अर स्वाभिमान एक दूजै रा पर्याय मानीजै। जोधपुर रै राव मालदेव रै बेटै रायमल रो प्रतापी सपूत कल्लो (कल्याण दास) सीवाणै रो धणी। वो सीवाणो, जिण री थापना विक्रमादित्य रै बेटै वीर नारायण करी अर उण री साख रै खातर चहुंवाण वीर सातल अर सोम खिलजी सूं जूझता सुरग पथ रा राही बणिया। कोई इणनै़ सोम रै नाम सूं सोमियाणो अथवा समियाणो ई कैवै। उण दिनां अकबर रो राज हो। मोटै राजा उदयसिंहआपरी बेटी मानाबाई रो ब्याव अकबर साथै करणो तय कियो […]

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कवि स्व. अजयदान जी रोहडिया के जीवन की कुछ रोचक घटनाएं

कवि नरपत दान आसिया की जुबानी अपने नानोशा कवि अजयदान जी रोहडिया के जीवन की कुछ रोचक घटनाएं: काशी नागरी प्रचारिणी सभा की विशारद की परीक्षा में मेरे नानोशा अजयदान जी लखाजी रोहडिया, मलावा भुगोल में फेल हो गए, फिर क्या था उन्होंने भुगोल के सारे सवाल के जवाब कविता में लिखकर तैयार किए और एक कुंजी काव्यमय भुगोल की बना दी। उनको फिर भुगोल में दुसरी बार परीक्षा देने पर सौ में से तेरानवै नंबर आए. कुछ उदाहरण: प्रश्न :भारत में उत्तम बंदरगाह की क्यों कमी है? जवाब:तट प्रदेश का कटा, फटा, रेतीला, सम है। इसी लिए भारत में […]

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मेघवाल़ होयो तो कांई ? म्है इण नैं भाई मानूं

माड़ रो माड़वो गाम जूनो सांसण। नैणसी, हमीर जगमालोत रो दियो लिखै तो उठै रा वासी उणस़ूं ई पुराणो मानै। इणी गांम में सोढैजी संढायच रै दो बेटा – अखोजी अर भलजी। भलजी स़ंढायच रै घरै मा वीरां री कूख सूं लोक पूज्य चारण देवी देवलजी रो जलम होयो – भलिया थारा भाग, देवल सरखी दीकरी। समदां लग सौभाग, परवरियो सारी प्रिथी।। देवलजीरी शादी ऊमरकोट रै गांम खारोड़ा रा देथा बापनजी साथै होई। यूं तो देवलजी रा घणा दिव्य चमत्कार अर लोकोपकारी काम चावा है, पण कमती लोग जाणता होसी कै आपां आज जिण दलित विमर्श अर दलितोत्थान री बातां […]

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गढ में तो ऊभो बड़ियो हूं, सो आडो ई निकल़सूं

इण दिनां फेसबुक अर वाटस्एप माथै जोगीदास चारण अर महाराजा मानसिंह सूं संबंधित एक जोरदार कहाणी पढण नै मिल़ रैयी है। कुण लिखी आ तो ठाह नीं पण आगै सूं आगै धकावण में खासै ढंगरै मिनखां रा नाम पढिया। म्है उण सगल़ै लेखक मित्रां नैं बतावणी चावूं कै आप जिण जोगीदास नै चारण बता रैया हो बै पातावत राठौड़ हा। बात यूं है – जोधपुर माथै उण दिना अभयसिंहजी रो राज हो महाराजा रा हल थकिया अर लागण लागो कै अबै ओ शरीर कणै ई बरतीज सकै। जद उणां आपरै स्वामीभक्त अर विसवासी सिरदारां नैं बुलाय वचन लियो कै जे […]

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आऊवै धरणै रा महानायक अखोजी बारठ

मारवाड़ रै मध्यकालीन इतिहास में आऊवा रो चारण धरणो चावो है। मारवाड़ रै शासकां अर चारणां रा संबंध प्रगाढ रैया है पण जोगानजोग राजा उदयसिंह री बगत ऐ संबंध किणी गल़तफहमी रा शिकार होय बिगड़ग्या। उदयसिंह चारणां रा गांम जबत कर लिया। विरोध होयो। समझाइस होई पण राजा नीं मानियो। छेवट1643 वि. में चारणां आऊवै री आंटीली धरती माथै धरणो दियो।
आऊवो उण दिन ठाकुर गोपाल़दासजी चांपावत री जागीर रो एक गांम हो। राजा गोपाल़दासजी नैं कैवायो कै धरणो म्हारै खिलाफ है सो आप धरणो उठावो। नीतर हूं गांम खालसै कर दूंला।

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ले, वडभागी हल़ में म्हनै जोड़

सत कर्मां रै सुजस री सोरम इणगत पसरै कै उणरै सुखद लहरकै रो स्वाद हर कोई लेवणो चावै। इण विमल़ बेकल़ू में केई ऐड़ा नर रतन जनमिया जिणां रै नाम साम्य रै पाण लोकां आपरी मनघड़त सूं आपरै भांयखै रै आदम्यां रा नाम उणां री अजंसजोग कथा साथै जोड़ दिया।
ऐड़ो ई एक नर रतन हो भाटी देपाल़दे जैतूंग। जैतूंग राव तणू रो छोटो भाई।[…]

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जैतियै रै च्यार जूत जरकावो नीं !

कॉलेज में आया जद किणी राजस्थानी विद्वान सूं एक व्याख्यान में राजस्थानी रो एक दूहो सुणियो- मरस्यां तो मोटै मतै, सो जग कहै सपूत। जीस्यां तो देस्यां जरू, जुलम्यां रै सिर जूत।। व्याख्यान कर्ता इण दूहै रै रचणहार रो नाम जनकवि शंकरदान सामोर बतायो। दूहै रो मर्म अंतस नैं प्रभावित अर मानस में घर करगयो। बिनां सच्चाई जाणियां म्है ई इण दूहै नै शंकरदानजी रो ई मानण लागग्यो। आ ई नीं म्है इणनैं म्हारै एक आलेख”डिंगल़ गीतां में चारण कवियां रो सूरापण “में इणी कवि रै नाम सूं उद्धृत ई कर दियो, पण हकीकत में म्हारी आ भूल ही। इण […]

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कवि सम्मान में आपरो कंवर अर्पित करणियो कर्मसी राठौड़

राजस्थान रै साहित्यिक इतिहास में कविवर आसाजी / आसाणंदजी बारठ रो नाम जितरो चावो उतरो ई आदरणीय। सत्य वक्ता, निर्लोभी, मित्र धर्म पाल़णिया, घण जोड़ा अर चारणाचार सूं मंडित आसोजी समूल़ी राजपूत रियासतां में मोटो नाम। भाद्रेस रा बारठ दीताजी रै घरै कवि रो जनम होयो अर नाथूसर कवि री कर्मस्थल़ी – दीतावत मालुम दुनी सो जाणै संसार। नाथूसर मथुरा नगर आसो हरि अवतार।। कोटड़ै रा राठौड़ वाघोजी कोटड़ियो उणां रा मन रा मीत ।एकै दांत रोटी तूटै।वाघैजी नैं राव मालदेव डावड़ी भारमली दीनी।रूप री रंभा अर लावण्य री मूर्ति। रावजी रो मन भारमली रै बिनां लागै नीं।उणां आसैजी नैं […]

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