बारहमासा गीत – विरह शृंगार

॥सावन॥
सावन बरसे! सब जन हरसे, झिरमिर बरसे मेह!
बैठे तुम परदेस में प्रियतम, निठुर छोड़ के नेह!!
बूँदों की पाजेब पहनकर, ओढ़ चुनरिया धानी!
करे नवोढ़ा धरती इस रुत, बादल से मनमानी!!
राह तकूँ मैं बैठ अकेली, सूनी सरोवर पाल!
घर आजा परदेसी! तुम बिन, जीना हुआ मुहाल!![…]

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चारण को जानें – प्रश्नोत्तरी – 2026

चारण को जानें – ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी – 2025 वर्तमान मेरिट – शीर्ष 15 प्रतिभागी नोट: यदि किन्हीं दो प्रतिभागियों के समान अंक हैं तो सबसे नए जुड़े प्रतिभागी को वरीयता क्रम मे ऊपर रखा गया है। प्रश्नोत्तरी में भाग लेने के लिए निम्न लिंक को क्लिक करें। <<<चारण को जानें – प्रश्नोत्तरी -2026 (यहाँ क्लिक करें)>>>   नियम चारण परंपरा, चारण साहित्य एवं चारण इतिहास विषयक प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमे कोई भी भाग ले सकता है। पात्रता के लिए किसी प्रकार की कोई शर्त नहीं है। कुल 100 वस्तुनिष्ट प्रश्न होंगे जिसके लिए ओसतन 90 मिनट (डेढ़ घंटे) का समय […]

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देवी विनय स्तुति

हिमगिरि-विन्ध्य-निवासिनी! नग-कोहला तव वास!
त्रिपुरसुंदरी! त्र्यंबके! त्वरित हरो यम-त्रास!!1
ब्रह्मचारिणी! भैरवी! करो दनुज का नाश!
सुर-नर-किन्नर-नाग-मुनि, खड़े लिए यह आश!!2…

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बूडत है भवसिंधु में बेरो

…।।मत्तगयंद सवैया।।
कोंधत बीजु अकास भयंकर, आज अमावस रैन अँधेरो!
घोर घटा नभ में गरजै, जनु बाजत जुद्ध नगारन ढेरो!
डोलत है जलपोत, उठै जल-वीचि, ज्यूँ शृंग उतुंग घनेरो!
अंब! करूं अरदास उबारहु, बूडत है भवसिंधु में बेरो!!
श्री करनी! हर संकट मेरो।।1।।…

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