आवड मां रा रंग रा दूहा

नाम लेय नामी भयी,जग बाजी जगदंब।
उण करनल री इष्ट जो,वा वड आवड रंग॥97
जिणनें सब जग में नमें,दीन अर दुखी दबंग।
तखत तेमडै जो तपै,वा वड आवड रंग॥98
लोवड सूर लुकावियो,भाई डसत भुजंग।
खरी खोडली री बहन,मावड आवड रंग॥99
रवि रथ सगती रोकियो,देख’र दुनिया दंग।
चारण कुळ अँजसावणी,मावड आवड रंग॥100[…]

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मढ में आवड मात रे

मढ में आवड मात रे, बजै ढोल तोतींग।
धींगड धींगड धींग ध्रं, धींगड धींगड धींग।।177

मढ में आवड मात रे, मोटो बजै मृदंग।
तिरकिट तिरकिट तुम ततक, तिरकिट तिरकिट तंग।।178

मढ में आवड मात रे, झालर बजै विराट।
झणणण झणणण झणण झण, झणण झणण झणणाट।।179

मढ में आवड मात रे, थाळी वजै अनंत।
थणणण थणणण थणण थण, थणण थणण थण थंत।।180[…]

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हिये दरस री हाम

पंथ विकट पाळो चलण, माथे अनड मुकाम।
हुकम करो हिंगळाज मां, हिये दरस री हाम॥1
मन मंदिर मँह मावडी, करता रोज मुकाम।
महर करो माजी हमें, हिये दरस री हाम॥2
अलख निरंजन री सखी, अनपूरण अभिराम।
धरा कोहला री धणी, हिये दरस री हाम॥3 […]

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छंद करनीजी रा – कवि गंगारामजी बोगसा

छंद करनीजी रा-गंगारामजी बोगसा रा कहिया 

देवी डाढाल़ीह, काछेली हेलो कियां।
आवै उंताल़ीह, व्रन रुखाल़ी वीसहथ।।

।।छंद।।
बोत विरोध विचार अकब्बर
नीच अनीत करी अनियाई।
भामण तेड़ लही छल़ भीतर
हिंदूस्थान म्रजाद हटाई।
साहल़ भूप पीथल्ल की सांभल़
एकण साद तणै पुल़ आई
वीसहथी करनी व्रन वाहर म्हांरीय साय करो महमाई।।१[…]

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सोनल स्तवन – अजय दान जी लखाजी रोहडिया

🌺छंद -रेणकी🌺
चारण प्रिय पर्म धर्म जब तज कर, करन कर्म प्रतिकूल लगे।
कारण इन कु-मन सुमन भय दिन दिन,दया दान सब दूर भगे।
मारन मद मोह ताहि मय तन्मय, यह लख नवलख चिंत्य करम।
करनल दुःख दूर करन सोय दारूण, धर पर सोनल रूप धरम्॥1

निरमल मति अंग गंग सम उज्जवल ,वचन वारि अघ ओघ दलम।
निश्छल जिहि कान पान कर खल दल, काल व्याल तें तुरत टलम।
अविचल गति गहन सरल चित अविरल,हरि हर जो गुणगान करम।
करनल दुःख दूर करन सोय दारूण, धर पर सोनल रूप धरम्॥2[…]

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सोनल स्तुति – अजय दान लखाजी रोहडिया

।।मत्तगयंद सवैया।।
आज परे हम पे दुःख दारुण , लाज तजी निज काज सँवारे।
देव कहाय, भये पर दानव, मानव के सद् गुण बिसारे।
काह कहें न कह्यो कछु जायजु, है सबही विधि हिम्मत हारे।
सोनल मात सहाय करो हम पापी तथापि है पुत्र तिहारे।।1

फैल फितूर मे फूल रहै अरु, भूल अतूल भरे हम भारे।
खेलत खेल खुले खल सों मिल, ऐसे है हाल हवाल हमारे।
काल कराल के गाल में कालहि, जावनों पें न जराहि बिचारे।
सोनल मात सहाय करो हम पापी तथापि है पुत्र तिहारे।।2[…]

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श्री सिध्धेश्र्वरा महादेव स्तुति

।।छंद त्रिभंगी।।
समरत जेहि शेषा, दिपत सुरेशा, पुत्र गुणेशा, निज प्यारा।
ब्रह्मांड प्रवेशा, प्रसिध्ध परेशा, अजर उमेशा, उघ्धारा।।
बेहद नरवेसा, क्रत सिर केशा, टलत अशेषा, अधरेशा।
जयदेव सिध्धेशा, हरन कलेशा, मगन हमेशा, माहेशा।।1।।[…]

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करणी जी रो गीत

गीत – सपाखरु

वेदां वरन्नी आलोकां भेदां तुळज्जा तरन्नी बाळा,
रंगी शूळ तोकां ओकां भरन्नी रगत्त।
अधोकां राकेश शीश धरन्नी धरन्नी ईस,
सरन्नी त्रिलोकां नमो करन्नी शगत्त॥1॥

आभा निलै नूर छाजै नवीनां मयंक वाळी,
छीनां लंक वाळी वाजै घंटका छुद्राळ।
जुगां वाळी देहा री पै वेहा री अनुजा जयो,
मेहा री तनुजा जयो घंटाळी मुद्गाळ॥2॥

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आवडजी रो चित्त इलोळ गीत

।आवडजी रो चित्त इलोळ गीत।
उमा रुप अनूप अवनि, आवडां लखि आदि।
बरण चारण जलम बाढी,आप किरती अनादि।
तौ अन्नादि जी अन्नादि अंबा अवतरी अन्नादि॥1॥
तौ धन्य जैसलमेर धरती,ग्राम चाळक गण्य।
साहुआं शाख तणो सुरज,मामडो कवि मन्य।
तौ धन्य हो जी धन्य,धारी देह उण धर धन्य॥2 […]

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सदा ऋचावां साम री

रस मय कविता गागरी, छलके दोहा छंद।
डिंगळ री डणकार में, आठ पोर आणंद॥1

मन रो नाचै मोरियौ, आठ पोर अणमाप।
डिंगळ री डणकार में, डफ मृदंग री थाप॥2

वीण पाणि वर दायिनी, बसती अठे विशेस।
आठूं पोर उछाळती,कविता रतन हमेश॥3 […]

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