साजन अर सजनी

मन रो नाच्यौ मोरियौ, धण रो किण रे काज।
बात मने औ बावडौ, कविता में कविराज॥
सुंदरता री पुतळी, अर उपर है लाज।
गजब नाचती गोरडी, घूमर रे अंदाज॥
नखराळी ए नारीयां, दे ताळी नाचैह।
घूंघट वाळी कामणी, मतवाळी सांचैह।
साजण सुपने आविया, कह्यौ आवसूं आज।
इण कारण धण नाचती, गीत रसीलै राज॥ […]

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आखर रा उमराव

आखर रा उमराव रे, नित मन बजै नगाड।
कवित लोग उणने कहै, धींगड धींगड धाड॥1
आखर रा उमराव रे, मन कोलाहल होय।
जिण ने कुछ कहता कवित, ध्वनि प्रदूषण कोय॥2
आखर रा उमराव रे, मन मे नाचै मोर।
मलजी नाठौ मेल ने, गजबण आबू और॥3 […]

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त्रिपुर सुंदरी त्र्यंबका

अधिनायक नवलाख औ, वरदायक विख्यात।
सुखदायक दुःख दालणी,वड आवड विख्यात॥1
यशदायी वरदायिनी, अभय दायनी आइ।
अखिल जगत अनपायनी, जयदायी जगराइ॥2
शंकरनी शाकंभरी, त्रिपुरा अरजी तोय।
वंदनीय विश्वंभरी, किंकर कीजौ मोय॥3 […]

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कविता ना व्यापार

कवि नांही छोटा बडा, रंक किंवा उमराव।
सबकी अपनी कल्पना, अपने अपने भाव॥1
कवि कवि होता है सखे!, क्या आला क्या तुच्छ।
अपनी अपनी पसंद से, गढता पुष्पित गुच्छ॥2
कविता मन की कल्पना, कल्पक की सुकूमार।
मंचौ की महिमा नही, कविता ना व्यापार॥3 […]

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संत फकीर मलंग शिवागिरि

मस्त जटी मन बैठ मढी मह बांसुरि खूब बजाय रह्यो है।
हाथ कडा पहने नित धूरजटी शिव आप रिझाय रह्यौ है।
साधक औ सुर रो शिव सेवक तानन सूं कछू गाय रह्यौ है।
आतम ने कर कृष्ण मयी परमातम राधा रिझाय रह्यौ है॥

सुंदर मोहनि मूरत बांसुरि, फेर लियां अधरां सुखकारी।
मस्त बजाय रह्यौ जिम मोहन, औ शिव है वृषभानु दुलारी।
आप बिना नह आश्रय है रख लाज हमार सुणौ जटधारी।
संत फकीर मलंग शिवागिरि पांव पडूं सुण हे अलगारी॥ […]

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आव गज़ल थुं आव अठे

छम छम करती पांव अठे।
आव गज़ल थुं आव अठे।
मन री बातां थनें सुणादूं,
नहीं कपट रा दाव अठे।
दाद ,कहकहा ,वाह वाह री,
अपणायत अणमाव अठे।
मन रा सुर थुं मांड मुळकती,
लय री झांझ बजाव अठे। […]

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नव नाथ स्तवन

🌺छंद त्रिभंगी🌺
जय अलख निरंजण, भव दुःख भंजण, खळ बळ खंडण, जग मंडण।
शंकर अनुरंजण, नित रत जिण मन, प्रणव प्रभंजण, जिम गुंजण।
गुरू देव चिरंतन, आदि अनंतन, सब जग संतन, रूप दता।
नव नाथ निवंता,आणंद वंता,मन मुदितंता, नाचंता॥1॥ […]

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भैरव स्तवन

🌺छंद त्रिभंगी🌺
काशी रा काळा, दीन दयाळा,वीर वडाळा, वपु -बाळा।
कर दंड कराळा, डाक-डमाळा, चम्मर वाळा, खपराळा।
मथ अहि मुगटाळा, ललित लटाळा, घूंघरवाळा, छमां छमा।
खं खेतरपाळा, रह रखवाळा, रूप निराळा, नमां नमां॥1॥ […]

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गणपति वंदना

🌺छंद त्रिभंगी🌺

दुख भंज दुँदाळा, देव दयाळा, सुत शिव वाळा, गिरजाळा।
जय चार भुजाळा, हे फरसाळा, नमन निराळा, मन वाळा।
वंदन विरदाळा, तरसूळाळा आव उताळा, गणनाथम्।
रिधि सिधि रा स्वामी, नाथ नमामी, हुं खल कामी, माफ करम्।1

आखू असवारी, गज मुख धारी, हुं बलिहारी, हुं थारी।
नह जिण री कारी, संकट भारी, उण दो जारी, दुख हारी।
भगतां रा भारी, हे हितकारी, द्रढ व्रत धारी, इक दंतम्।
रिधि सिधि रा स्वामी नाथ नमामी, हुं खलकामी, माफ करम्।।2

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