अमर शबद रा बोकडा
🌺अमर शबद रा बोकडा🌺
अमर शबद रा बोकडा, रमता मेल्या राज।
आई थारै आंगणै, मेहाई महराज॥1
सरस विधा संजीवनी, सीखी सबद खरीह।
पढता जीवित होत है,कविता नहीं मरीह॥2
अमर शबद रा बोकडा, चरै भाव रो घास।
कविता बण प्रकटै सदा, कुण कर सकै विनास॥3 […]