मां मोगल मछराळ

शीश नमाऊं शारदा, सुमरू देव सुण्डाळ।
जस बरणूं जगतंब रो, मां मोगल मछराळ।।1
ओखा धर जनमी उमय, ईहग बरण उजाळ।
तिहू लोकां तारण तरण, मां मोगल मछराळ।।2
आवे जद अबखी बखत, करकश घूमे काळ।
उण पळ अम्ब उबारणी, मां मोगल मछराळ।।3

» Read more

मां मोगल मछराळ

वरदे वीणा वादनी, बसजै ह्रदय विशाळ।
कीरत आई री कथूं, मां मोगल मछराळ।।१
समद समीपां सोहती, बीस भुजी विकराळ।
तनें नमन तारण तरण, मां मोगल मछराळ।।२
ओखा री आणंद घन, वंदन बीस भुजाळ।
सबळ निबळ री स्वामिनी, मां मोगल मछराळ।।३
साद सुणंता शंकरी, तीजी आवै ताळ।
झटप बाज जिम जोगणी, मां मोगल मछराळ।।४[…]

» Read more

करंत देवि हिंगळा

छंद: नाराच

विडारणीय दैत वंश सेवगाँ सुधारणी।
निवासणी विघन अनेक त्रणां भुवन्न तारणी।
उतारणी अघोर कुंड अर्गला मां अर्गला।
करंत देवि हिंगळा कल्याण मात मंगळा॥1॥

रमे विलास मंगळा जरोळ डोळ रम्मिया।
सजे सहास औ प्रहास आप रुप उम्मिया।
होवंत हास वेद भाष्य वार वार विम्मळ।
करंत देवि हिंगळा कल्याण मात मंगळा॥2॥[…]

» Read more

नाळेरी नेस आवड मढ रो शबद चितराम

गीर रा गाढ ओरण रे माय एक वळे जगह है जिण रो नाम नाळियेरी नेस/नाळेरीनेस है जठे आवड जी महाराज मढ में बिराजियोडा है। वन पशु पंखेरू अर प्राणी मात्र नें मां आवड अनपूरण रे ज्यूं प्रकृति रे अनुपम अखैपातर सूं केर , करमदा बोर, जांबु, केरी, चीकू, केळा रो नित भोजन करावै। माता रो रसोडो अणखूट है किणी नें मा निराश नी करे। प्रकृति री इण अनुपम भेट ने आधार बणायर म्है ओ बात नें कविता मे केवण री कोशिश करी है कि आप अगर तर्क री दीठ सूं प्हैला शगती अवतरण रा मिथक ने देख अर राव शेखा […]

» Read more

लीला पांणी नेस आवड मढ रो शबद चितराम

गीर रा जंगल रे माय एक जगह है जठे आवड जी महाराज रो मढ है। जंगल अर झाडी इतरी गाढी है के सूरज री किरणां धरती पर दीसै नी। म्है उण बात ने आवडजी महाराज री पुराणी मिथक कथा सूं प्रकृति रे सागै समन्वित करी। अगर किणी आदमी रे मन में इण बाबत री कोई शंका कुशंका वा तर्क हुवै तो वै लीलापाणीनेस जाय ने जंगल री झाडी देख सके जठै आज भी आवड जी महाराज प्रकृति री वनराजि री अनुपम लोवडी/भेळियो ओढर आज भी रोज सूरज नारायण ने साक्षात रोक रह्या है। दोहौ इण तरह सूं है। मन शंको […]

» Read more

काळे डूंगर राय रे

काळे डूंगर राय रे, नित मढ बजै नगाड।
गरजै घन जाणक गगन,आवत मास असाढ॥129
काळे डूंगर राय है,भाखर री भूपाळ।
सात बहन सँग ब्राजिया,खेलत खेतरपाळ॥130
कमळ दळां आसन करै, आवड मावड आप।
काळै डूंगर राय मढ,बैठा थें मां बाप॥131 […]

» Read more

लख नव लोवडियाळ

जद आवड जी महाराज री मन में कल्पना आवै तद मन कृष्ण रे विराट रूप ज्यू उण री कल्पना करे अर एक अनंत चितराम खडो हुवै। मां नें आपे विराट वपु धारणी चारणी जगतारणी कह सकां। उणमें छपन क्रोड चामुंड नव लख लोवडियाळ अर चौरासी चारणी रो एकीकृत अवतार समझ सकां। गर छपन क्रोड नवलाख अर चौरासी वपु धारणी आवड मां आप रा उतरा मुख सूं मां सुभाषीष देवै। उणसूं दुगणी आंख सूं पुरा जगत रा चराचर जीव ने देख सके।उण सूं बीस गुणा हाथ (बीस हथी) सूं सबने आसीस दे सके अर उण री सब आंगळी सूं जगत रा […]

» Read more

गांव खांण रे गुंदरे

गांव खांण रे गुंदरे, बैठी मां बिरदाळ।
आवड आंबलियाळ, जुग जुग जूनी जोगणी॥49
रखवाळी निश दिन करै, कर पकडै किरमाळ।
डोकरडी डाढाळ, गाढाळी गढवी तणी॥50
आया जिण दिन आसिया,लाखणथूंब ज छोड।
आवड मढ थाप्यौ उ दिन,कर कर मन मँह कोड॥51 […]

» Read more

जोगण जूनी जाळ

आभ धरा अवलंब, खंभ खरो जगदंब थूं।
थूं टेको थूं थंब, आखा जग रो आवडा॥1
रमती चाळकराय, मन रँग थळ में मावडी।
सुकवि रहै सहाय, बीस हथी वरदायिनी॥2
जोगण जूनी जाळ, प्रतपाळक पुहमी तणी।
चाळकने चरिताळ,आप बिराजी आवडा॥3 […]

» Read more

सांप नेस आवड मढ रो वर्णन

गीर रा गाढ ओरण रे मांय एक जगह है जिणरो नाम सांप नेस है। उठै भगवती आवड जी रो थान है। मैं मारी रचना “आवड आखै आसिया” रे मांय उण जगह री प्राकृतिक छटा रो वर्णन दोहा , सोरठा, तुंबेरा दोहा अर बडा दूहा रे माध्यम सुं करण री कोशिश करी है। आप सब लोगों सारू औ रचना सादर । […]

» Read more
1 18 19 20 21 22 30