अपणायत
मिनखां रै रेलै में
तासल़ियै बेलियां रै बिचाल़ै
पाणी !पाणी ! विलकती
मांगती प्राणां री भीख
तूटोड़ै ऊंठ ज्यूं डरती
गैणांग में उडतै गिरजां सूं।
खुरड़ा खोतरती _गिरणती
मदत रै सारू झांफल़ा खावती
हल़फल़ती सी
जाण अजाण बणती […]
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मिनखां रै रेलै में
तासल़ियै बेलियां रै बिचाल़ै
पाणी !पाणी ! विलकती
मांगती प्राणां री भीख
तूटोड़ै ऊंठ ज्यूं डरती
गैणांग में उडतै गिरजां सूं।
खुरड़ा खोतरती _गिरणती
मदत रै सारू झांफल़ा खावती
हल़फल़ती सी
जाण अजाण बणती […]
राजस्थानी वीरां री वीरत री कीरत यूं ई नीं है। इणां बगत पड़ियां आपरो आपाण बतायो अर जगत में सुजस लियो। किणी कवि सही कैयो है कै “सिर पड़ियां खग सांभणा इण धरती उपजंत।” इणी वीरां री अतोल वीरता रै कारण शक्तिदानजी कविया इणां नै नर रत्न मानतां लिखियो कै मरू प्रांत रै रतनां मे वीर एक अमोल रतन है :- संत सती अर सूरमा सुकवि साहूकार पांच रतन मरू प्रांत सोभा सब संसार।। सगल़ै संसार में इणां रै सुजस री सोरम पसरी थकी। ऐड़ो ई एक सूरमो होयो भाटी जोगीदास। भाटी जोगीदास जिकी वीरता बताई वा आज ई सुणियां वीरां […]
» Read moreकलम री कड़पाण वाल़ा
तूं सबां सूं साव न्यारो।
मिनख तुंही देख साचो
मिनखपण ही धरम थारो।।
राम सूं अनुराग तोनै
रहीम सूं उर भाव प्यारो।
तूं नहीं हिंदु नहीं मुसल़ो
देख सदियां ओही ढारो।। […]
महाराजा मानसिह जोधपुर आप री रीझ अर खीझ री समवड़ता रे पाण चावा रैया है । रीझियां सामल़ै नै आपरो काल़जो तक देवण मे ओछी नी तकता तो खीझियां सामल़ै रो कालजो चीलां नै चबावण सूं पैला नैचो नी करता। एकर महाराजा मानसिंह आपरै मर्जीदान बिहारीदास खिची माथै किणी बात कारण अरूठग्या। खिची महाराजा री आदत नै जाणतो सो दरबार रे डर सूं जोधपुर स्थित साथीण री हवेली गयो अर साथीण ठाकुर शक्तिसिंह भाटी सूं शरण मांगी। शक्तिसिंह स्वाभिमानी, अर टणकाई री टेक राखणिया वीर हा। उणां दरबार रे कोप री गिनर नी कर र शरणागत नै अभयदान देतां आपरे अठै […]
» Read moreकवि रो सम्मान किणी उदार पुरुष खातर कितरो महताऊ होवै आ बात आज रे समय मे समझणी आंझी है क्यूं अबै नी तो दिलां मे उदारता है नी कविता री कूंत। मध्यकाल़ मे रतनू रायमलजी होया। बधाऊड़ा (उण बगत रे जैसलमेर मे) मे रतनू मयारामजी रै शंकरदानजी होया जिणां नै बीकूंकोर रा ठाकुर जैतसी भाटी हरल़ायां गांव दियो। इणां री वंश परंपरा मे महेशदासजी होया जिणां रे अभैरामजी होया। अभैरामजी नै महाराजा अजीतसिंह घोड़ारण (नागौर) दियो। कोई आ ई कैवे कै घोड़ारण महेशदासजी नै मिली। अभैरामजी रै च्यार बेटा हा जिणां मे रायमलजी सबसूं छोटा हा। उणां दिनां लगोलग काल़ पड़ता रैता […]
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“दियां रा देवल़ चढै” री बात भक्त कवि ईशरदासजी सटीक कैयी है। उणां सही ई कैयो है देवणियो अमर है। राजा कर्ण आपरी वीरता सूं बत्तो दातारगी रै कारण जाणियो जावै-
दान के नहर की लहर तो दुरूह देखो,
प्रात की पहर तो ठहरगी रवि जाये की।।
इणी बात री हामी भरतां कविराजा बांकीदासजी कैयो कै आज कठै तो आशो डाभी है अर कठै बाघो कोटड़ियो ? पण उणां रे सुजस री सोरम आज ई अखी है।
कोटड़ियो बाघो कठै, आसो डाभी आज।
गवरीजै जस गीतड़ा, गया भींतड़ा भाज।।[…]
बीकानेर जिले री कोलायत तहसील रै गांव खेतोलाई रै सालमसिंह भाटी रो बेटो मूल़जी एक वीर क्षत्रिय हो। सं १८६६ री भादवा सुदि १२ रै दिन ओ वीर चोखल़ै री गायां री रक्षार्थ जूझतो थको राठ मुसलमानां रै हाथां वीरगति नै प्राप्त होयो। किवंदती है कै सिर कटियां पछै ओ वीर कबंध जुद्ध लड़ियो। आथूणै राजस्थान रे बीकानेर, जैसलमेर नागौर अर जोधपुर मे इण वीर री पूजा एक लोक देव रे रूप मे होवै।मूल़जी जूझार रे नाम सूं ओ अजरेल आपरी जबरैल वीरता रे पाण अमरता नै वरण करग्यो।जैड़ो कै ओ दूहो चावो है :- मात पिता सुत मेहल़ी बांधव वीसारेह सूरां […]
» Read moreचेलार (वर्तमान पाकिस्तान) रो एक बांमण ओ प्रण लेर निकल़ियो कै जिको दातार वचन देवैला उणी सूं वो दान ग्रहण करेला। इणी द्रिढ संकल्प रै साथै निकल़ियो वो घणै दातारां कनै गयो पण उणनै वचन देवणियो दातार नी मिलियो। वो मेवाड़, मारवाड़, आमेर, जांगल़ आद स्थानां मे घूमतो घूमतो माड रै केई दातारां कनै फिरियो पण कोई उणनै वचन देवण री हिमत नी कर सकियो। छेवट निरास होय पाछो आपरै गांव जावतो साढां (जैसलमेर) रै रतनू बांकजी रै घरै रुकियो। दिनुगै रवाना होवती वेल़ा बांकजी उणनै दक्षिणा देवणी चाई तो उण आपरे प्रण रे बाबत पूरी बात बतावतै दक्षिणा लेवण सूं नटग्यो। […]
» Read more गीत सोहणो
किण किण मे दोस काढसो कवियां
राज कुवै मे भांग रल़ी
साच कूड़ समभाव आदरै
गुण ओगण री बात गल़ी १
संत्री मंत्री एक सारखा
संविधान नै रैट सही
धज कानून उडावण धरती
वाव आपणै देश बही २ […]
लोकतंत्र रो ओई लेखो
दीख रही स़ो मत ना देखो
छाती जा दूजां री छेको
समझ आपरी रोटी सेको १
कंवल़ी कंवली बातां कैजै
राम भरोसै मतना रैजै
वाट सुंवोड़ी अब मत बैजै
संकट बंकट हंसतो सैजै २ […]