सरस कल्पना रा सखी

लाखौ बिणजारौ कवी, बाळद भर भर याद।
नवी पुरांणी जोडतो, उकति भाव उस्ताद॥1

यादों वाळी जान जद, आवै आंगण द्वार।
उण दिन कविता धारसी, अलंकार रो भार॥2

यादों री जद जद चले, दो धारी तलवार।
वा हीचकी लेती रहै, अठै दरद अणपार॥3 […]

» Read more

मंत्री नै कुण मूंडियो

संसद रै इक सदन री,बात कहूं बतळाय।
मंत्री मूंड मुंडायनैं,आसण बैठो आय।।
सगळा पूछै सैन में, बोले नांय विशेष।
बीती कद आ बारता, कटिया कीकर केस।।
संवेदनवश सागलां, स्वर में धीर समाय।
पूछ्यो पूसारामजी, दूणों दुख्ख दिखाय।। […]

» Read more

रंग रै राजस्थान

छंद – रेंणकी
मन इक रीते परण मरण मन, उवा धरण है देख इया।
मरिया पग रोप राड़ बिच माणस, जीवट उर में राख जिया।
सोभा इण भांत सांभल़ी सुरपत, ऐरावत चढ जात अयो।
सुरधर समराथ अनै मुरधर सतजग पर समवड़ रूप जयो।।१

पेखो इम वीर धर प्रण पाल़ण, सत पख चाढण नीर सदा।
ऊनी हद खीर दहै कर उणमे, जुड़ै भीर ना होय जुदा।
भांजण सो भीड़ अबल़ पख भिड़ियां, पीड़ निजु नह सोच पयो।।
सुरधर समराथ अनै मुरधर सतजग पर समवड़ रूप जयो।।२ […]

» Read more

करै कुण कोड बेटी रा

करै कुण कोड बेटी रा, खड़्या खम ठौर मारण नैं।।
जगत में आण सूं पै‘ली, जकी रा लाख दुश्मण है।।

हुई जद आस आवण री, नयो मेहमान निज घर में।
बधायां बांटती दादी, फिरी हर एक घर-घर में।।
मिली जद जाँच में बेटी, लगी क्यों लाय लागण नै।
करै कुण कोड बेटी रा, खड़या खम ठौर मारण नै।।1।।[…]

» Read more

मत कर

दास मत बण दौर रो,तूं-
और री कीं आस मतकर।
गौर कर इतिहास गहला,
ठौर री ठकरास मत कर।।

मायतां रै माण मांही,
हाण देखै सौ हरामी।
काण कुळ री हाथ वांरै,
देण री दरखास मत कर।। […]

» Read more

नैण

नैणा री मद धार वै, तौ प्याला बेकार।
नशौ प्रेम रो सब सिरै, सजण परूसण-हार।।1

नैणा री मनुहार नें, सैण करौ स्वीकार।
जैण नसो होसी जबर, रैण तणै अंधार।।2

नैणा घी री धार कर, पिया! लापसी-प्यार।
राज परोसूं आप कज, जिमौ  बारंबार।।3[…]

» Read more

वाणी वरदानी वदां

वाणी वरदानी वदां, आखर दानी आइ।
भाव उपानी भव्यतम, गिरा भवानी माइ॥1

वीण वजंती सरसती, आगै जेण मराल।
धवला सन धवलांबरा, गळ में स्फाटिक माळ॥2

फटिक मालिका फूटरी, फबती जिणरै तन्न।
वीण पांणि हंसासनी,म्हारी बसौ रसन्न॥3 […]

» Read more

कागा पग लागा थनें

कागा पग लागां थनै, मागां इतरो मीत।
घर री जागा बैठ मत, उड कर विरहण हीत॥1

कागा पुरसूं आप कज, खांड मलाई खीर।
खाय’र उडजा आवसी, तदै नणद रो बीर॥2

कागा थुं करकस घणौ, कडवा थारा बेण।
विरहण तौ पण राखती, नत्त नजीकां नेण ,॥3 […]

» Read more

आखर रो उमराव – सोरठिया गज़ल

आखर रो उमराव,अवस कवि सुण आशिया।
समपै लाख पसाव, अवस कवि सुण आशिया।

दाखत दोहा छंद, गज़ल गीत कहतौ गज़ब।
भरने उरमें भाव, अवस कवि सुण आशिया॥

गीत दोहरा छंद, ह्रदय भाव बेकार है ,
गैला रो औ गांव,अवस कवि सुण आसिया॥ […]

» Read more

दासोड़ी

राजस्थान सरकार गांव-गांव रो इतिहास लिखावण री सोच रैयी है। आ बात वास्तव में सरावणजोग है। इण दिशा में म्है, कीं छप्पय आपरी निजर कर रैयो हूं। इण छप्पयां रै मांय म्है म्हांरै बडेरां नैं मिलियै गांवां री विगत बतावण री खेचल करी है। परमवीर देवराज भाटी रै प्राणां री रक्षा करणियै द्विजवर वसुदेवायत पुरोहित रै बेडै रतन री संतति चारणां में रतनू बाजै। इणी रतनू वंश परंपरा में म्हांरा बडेरा आसरावजी रतनू (सिरुवो) होया जिकां स्वामीभक्ति री मिसाल कायम करतां थकां राव जगमाल मालावत सूं जैसलमेर री रक्षा करी अर दूदा जसहड़ोत नै जैसलमेर रावल़ बणावण में महताऊ भूमिका […]

» Read more
1 82 83 84 85 86 91