आवड वंदना – त्रिकूटबंध गीत

।।गीत-त्रिकूट बंध।।
मन रंग थळ री मावडी,
नरपत उदधि भव नावडी,
शिणगार सोळह सजै सुंदर, लाख नव संग लेय।
अगवाण नाचै आवडा,
मन मोद कर धी मामडा,
धर चाप पद शुभ धरणि धसकत।
घुघर घण रव घमम घमकत।
ठमक ठम ठम रमत ठमकत।
फरर फर फर वसन फरकत।
चमक दुति जिम चपल चमकत।
विविध नभ शुभ सुमन वरसत।
नमन सुर नर करत निरखत।
नयण दरसण करत नित प्रत। देवी आणंद देय।।1।।[…]

» Read more

खोडल थारां बाळरी

खोडल थारां बाळरी, बाई करजे बाळ। चढ झट आ घडियाळ पर, टाळ विघन ततकाळ॥1 खोडल के खोडी भई, या भूली थुं वाट। ‘बाळक रे बिपदा पडी, मेट आय गभराट॥2 खोडल थुं बेठी कठे, कुकुं कर कर साद। बाळकियारी कर बळण, आई हरो अवसाद॥3 खोडल क्युं बोळी बणी, मारी वेळा मात। माफ करो माजी हमे म्हारा थै अपराध॥4 खोडल थुं हरदम आयनें, आफत हरती अंब। पण नरपत री वेळ क्युं, आई कियो विलम्ब॥5 खोडल थैं कीधी खरी, डरी देख मम दुःख। पडी जदे विसमी विपत, मां न दिखायो मुख॥6 खोडल छोड अबोलडा, कर छोरु संग बात। माता व्हे रुठी रहो, ओ […]

» Read more

दुहा सोरठा गीत री

🌺दुहा सोरठा गीत री🌺

कदे शबद रा फूलडां, कदै भाव नाळेर।
धरतौ हुं मारै धकै, जैडी म्हौ मन लेर॥1
आखौ हुं अरपूं कदै, कदै वधेरुं फोड।
हरपळ मां स्वीकारती, करै घणौ मन कोड॥2

पांच सात इगयार कर , भेळा घण नाळेर।
लीलौ तोरण मढ धकै, अरपूं मां ने फेर॥3 […]

» Read more

शिव स्तवन

🍀छंद :त्रिभंगी🍀
वसतौ गिरि हिम पर,अर गिरिजावर,तन बाघांबर , है धारी।
गळ राखत विषधर, भाल चंद्रधर,जटा गंगधर , त्रिपुरारी।
मन धरत उमंगधर जिणनै मुनिवर,देव दिगंबर, महादेवम्।
जय जय शिवशंकर, हे प्रलयंकर, सुंदर सुखकर, सत्य शिवम्॥1॥ […]

» Read more

करुं शबद रा खाजरू

मदिरा प्हैली धार री, डिंगळ री डणकार।
जाजम जमगी जोर री, आवौ सब सिरदार॥1
हुं मां रो, मां माहरी, किण रे उण सूं काह।
मन मांनै वा पुरस दूं, बिनां किया परवाह॥2
करुं शबद रा खाजरू, भाव तणी दूं धार।
पीवै माता प्रेमसूं, सदा करै स्वीकार॥3 […]

» Read more

जूझार मेहरदान संढायच माड़वा

माड़वो पोकरण रै दिखणादै पासै आयोड़ो एक ऐतिहासिक गांव है। जिणरो इतिहास अंजसजोग अर गर्विलो रैयो है। पोकरण राव हमीर जगमालोत ओ गांव अखैजी सोढावत नै दियो। जिणरी साख रै एक जूनै कवित्त री ऐ ओल़्यां चावी है।

हमीर राण सुप्रसन्न हुय, सूरज समो सुझाड़वो
अखै नै गाम उण दिन अप्यो, मोटो सांसण माड़वो

इणी अखैजी रै भाई भलैजी रै घरै महाशक्ति देवल रो जनम हुयो।

भलिया थारो भाग, देवल जेड़ी दीकरी
समंदां लग सोभाग, परवरियो सारी प्रिथी

ओ ई बो माड़वो है जठै भगवती चंदू रो जनम हुयो जिण सांमतशाही रै खिलाफ जंमर कियो। इणी माड़वै मे अखै री गौरवमय वंश परंमपरा मे माणजी रै धड़ै मे धरमदान रै घरै मेहरदान संढायच रो जनम हुयो।[…]

» Read more

फोग रो छंद

छंद – नाराच
फबै थल़ी ज फोग तूं फल़ै ज फूठरो फबै
महक्क धोरियां मुदै सजै ज मोहणो सबै
थल़ी ज थाट तूंज सूं रल़ीज पूरणो रसा
अपै ज रूप ओयणां जुड़ैज होड ना जसा १

मुदै ज मात भोम सूं सप्रीत रीत तो सिरै
दखांज भोम दूसरी धिनो ज ध्यान ना धरै
बहैज एक वाट ही मरू रूपाल़ तूं मँडै
मनां तनां थल़ू मही ज तूं छटांक ना छँडै २ […]

» Read more

जीवट ही जीवण है

जीवट ही जीवण रो नाम अरे, जग देख तमासो हारी ना
जूझ्या ही कीमत जीवण री, लड़तोड़ो हीमत हारी ना

चींचड़ बण चूंटै काया नै, माया रा लोभी मतवाल़ा
पग पग रे छेड़ै परड़ां है, घट घट मे काल़ा फणवाल़ा
पावै जिण प्यालां दूध बता, विसड़ै री जागा की मिलसी
हेवा कर चुल़सी पाछो तूं, झाटां अर डंकड़ा घण मिलसी […]

» Read more

हिंगोल़राय री स्तुति

पिछमाण धराल़िय तैं प्रतपाल़िय थांन तिहाल़िय जेथ थपै
सत्रु घट गाल़िय संत सँभाल़िय देव दयाल़िय रूप दिपै
पुनि पात उजाल़िय तैं पखपाल़िय लंब हथाल़िय कूण लखै
कर काज सदा हिंगल़ाज कृपाल़िय राज तुंही मम लाज रखै १ […]

» Read more

कवित्त करणीजी रा

वय पाय थाकी हाकी न केहर सकै शीघ्र
कान न ते सुने नहीं किसको पुकारूं मैं
चखन तें सुझै नहीं संतन उदासी मुख
कौन ढिग जाय अब अश्रुन ढिगारुं मैं
तेरे बिन मेरो कौन अब तो बताओ मात
दृष्टि मे न आत दूजो हिय धीर धारूं मै
कहै गीध चरणन मे छांह मिले थिर
शरण जननी की फिर मन को न मारूं मै १ […]

» Read more
1 87 88 89 90 91