कांई ठा कांई होवेला
कांई ठा कांई होवेला
म्है थारै मूंडै री मीठी मुल़क
आंख्यां मे झरती अपणास
विश्वास रै बोलां पर
चमगूंगो सो, चितबगनो सो
उतरतो रैयो अजाणी
ढल़तोड़ी ढाल़ां पर
चढतो रैयौ ऊंचोड़ी पाल़ां पर
घालतो रैयो हींड लंफणां मे […]
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कांई ठा कांई होवेला
म्है थारै मूंडै री मीठी मुल़क
आंख्यां मे झरती अपणास
विश्वास रै बोलां पर
चमगूंगो सो, चितबगनो सो
उतरतो रैयो अजाणी
ढल़तोड़ी ढाल़ां पर
चढतो रैयौ ऊंचोड़ी पाल़ां पर
घालतो रैयो हींड लंफणां मे […]
बीकानेर रै आथूणै कड़खै रो छे’लो गांव है दासोड़ी। इण गांव रै आथूणै अर उतरादै पासै जोधपुर रो अंतिम गांव है मिठड़ियो। मिठड़ियै री लागती कांकड़ माथै आयोड़ा दासोड़ी रा खेत करनेत बाजै। लगै टगै वि.सं. १८०० रे आसै पासै दासोड़ी मे पेमां माजी होया। दासोड़ी उणां रो ससुराल हो। पीहर किण जागा हो ओ तो ठाह नी है पण बै जात रा बीठवण (बीठू) हा। आ बात म्हारा जीसा (दादोसा) गणेशदानजी रतनू कैया करता हा। पेमा माजी रे गायां घणी होती सो बै आपरै खेत करनेत ढाणी विराजता। उण दिनां मिठड़ियै रो ठाकुर कल्लो पातावत हो। ठाकुर री कुदीठ माजी […]
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माड़वो(पोकरण)आपरी सांस्कृतिक विरासत रै पाण चावो गांम रैयो है। इणी गांम में महाशक्ति देवल रो जनम होयो। इणी धरा नै बूट बलाल बैचरा जैड़ी महाशक्तियां रो नानाणो होवण रो गौरव प्राप्त है। इणी धरा री मा चंदू माड़वा गांव री रक्षार्थ अखेसर री पावन पाल़ माथै पोकरण ठाकुर सालमसिंह रे खिलाफ १८७९ वि° मे जमर कियो। चंदू मा सूं पैला इणां री मा अणंदूबाई, गुड्डी रै पोकरणां रै खिलाफ जमर कियो। जद इण गांम री ऐ गर्विली गाथावां सुणां तो लागै कै शायद इण माटी में ईज ऐड़ो आपाण भर्योड़ो हो कै अठै रो वासी आपरै माण नै मुचण नीं […]
» Read more🌺छंद रोमकंद/त्रिभंगी🌺
तनया गिरि राजम ,बैल बिराजम, बाळक लाजम, राख सदा।
कर कंज त्रिशूलम , रूप अनूपम, चंदम पूनम, रश्मि प्रदा।
वर वांछित दातम, हे अवदातम , मो घट घातम, टाळ मया।
दुरगा नव वंदण, भै मन भंजण, वैरि विखंडण, जै विजया।1 […]
भय भंजण गंजण बंड भयंकर, दण्डण दैत समस्त दळं।
वळ रुण्डण मुण्डण माळ धरे वपु, जोत अखंड जळं झळळं।
लिय चौसठ जोगण झुंड नवेलख, कोदंड दंड करं कमळं।
चँड मुंड प्रचंड उदंडण चामंड,अंब कदंब अणंद इळं।1 […]
🌺अमर शबद रा बोकडा🌺
अमर शबद रा बोकडा, रमता मेल्या राज।
आई थारै आंगणै, मेहाई महराज॥1
सरस विधा संजीवनी, सीखी सबद खरीह।
पढता जीवित होत है,कविता नहीं मरीह॥2
अमर शबद रा बोकडा, चरै भाव रो घास।
कविता बण प्रकटै सदा, कुण कर सकै विनास॥3 […]
।।रणचंडी खंडी खळां।।
नमो मसाणी, भैरवी, चामुंडा चरिताळ।
नमो डाकिनी साकिनी, दैत मार डाढाळ।।1
छिन्न मस्तिका, सांभवी, बगला, तारा, मात।
त्रिपुरसुंदरी, सोडसी, मातंगी अवदात।।2
पंचानन कमलासनी, कमल नयनि कर कंज।
शवारूढ, काली, शिवा, भय भगतां तण भंज।।3[…]
🌹छंद त्रिभंगी🌹
लखनव अगवाणी, हे सुररांणी, मां महरांणी, कल्यांणी।
कर खडग कृपाणी, जोगण जांणी,शिव पटराणी, वाखाणी।
धोरां धणियांणी, निरमल वांणी, वीणापाणी, वरदाया।
जोगण जाळेची, चाळकनेची,नमो नभेची, महमाया॥1
जय नमो नभेची सुरराया। […]
🌺त्रिभंगी छंद🌺
आंख्या अणियाळी, काजळ वाळी ,काळी काळी, गाढाळी।
सावक हिरणाळी, रसिक रुपाळी, भोळी भाळी, नखराळी।
नित रहूं निहाळी, सरल सुखाळी, करुणावाळी, मन भावण।
राधा रस कामण, रुप रीझावण, दमकै दामण, जिम सावण॥1 […]
कानों मे है गूंजता,
झालर जैसा नाद।
जब भी तुझसै बात की,
मन का मिटा विषाद॥
रे मन चंचल बांवरै,
यहां तुम्हारा कौन।
जिसको तू अपना कहै,
वह पंछी है मौन॥ […]