मालण माताजी रा त्रिभंगी छंद – कवि डा. शक्तिदान कविया
।।दोहा।।
देवी दूलाईह, सुरराई शगत्यां शिरै।
मालण मंहमाईह, वसै विराई विसहथ।।
।।छंद – त्रिभंगी।।
देवी दूलाई, अंबे आई, परचां छाई प्रभुताई।
पावक प्रजाळाई, उठर आई, पग अरुणाई, प्रगटाई।
बाळापण बाई अम्ब उपाई पुनि पलटाई नींब प्रथी।
मालण महामाई, सदा सहाई, है सुरराई विशहथी।
जिय है वरदाई विशहथी॥1॥
टीकम टणकाई सुजस सवाई पह परणाई तिण पुलही।
गायां घेराई सिंध सराई वाहर धाई बिलकुल ही।
कव जीत कराई हुतब हलाई जमदढ खाई गळै जथी।
मालण महमाई सदा सहाई है सुरराई वीसहथी।
जिय है वरदाई वीसहथी॥2॥[…]