हां कवि दीठ माथो देवूंलो!!

कवि अर कविता रा प्रेमी इण धरा माथै ऐड़ा-ऐड़ा होया है कै आज ई उणां रै इण प्रेम री बात पढां तो छाती हेम होवै परी।
ऐड़ो ई एक कवि प्रेमी होयो गोकल़दास भाणावत।
मेवाड़ रै मोटै सिरायतां में शुमार गोकल़दास राणै उदयसिंह रै बेटे सगतसिंह रै बेटे भाण रो बेटो हो।
मेवाड़ रै इण वासी रो नानाणो मारवाड़ हो। मोटे राजा उदयसिंह री बेटी राजकंवर रो बेटो हो गोकल़दास।
महाभड़ गोकल़दास भीम सिसोदिये रो खास मर्जीदान हो जद भीम, बागी शाहजादे खुर्रम रै कानी सूं लड़ै हो उण बखत गोकल़दास रै घणा घाव लागा जिणसूं घायल होयो जद गजसिंहजी इणनै जोधपुर ले आया अर पाटा कराय साजो कियो तो साथै ई राहिण रो पटो ई दियो।[…]

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भोम नमो भाद्रेस!!

भक्त कवि पीरदानजी लाल़स आपरै मानस गुरु ‘ईशरा परमेसरा’ नै वंदन करतां सटीक ई लिख्यो है-

उथियै साहब ऊपना, भोम नमो भाद्रेस।
पीरदान लागै पगां, ईसाणंद आदेश!!

आथूणी धरा रो ओ गांम सांसणां रो सेहरो है।
मल्लीनाथजी ओ दतब पूनसी रोहड़िया नै दियो। पूनसी आपरै भाई गादूजी रै साथै अठै रैवास कियो।
गादूजी बारठ री परंपरा में भक्त बारठ दीतोजी अर दीतैजी रै सूरोजी, आसोजी, जैतोजी, चागोजी, जीयोजी, राघवजी मेहाजल़जी आद सात बेटा अर बेटी देपू होई।[…]

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म्हनै कांचल़ी रा मांगिया पांच वरस दे!!

आपां मध्यकाल़ रै राजस्थान नै पढां कै सुणां तो ऐड़ै-ऐड़ै पात्रां सूं ओल़खाण होवै जिकै फखत आपरी बात रै सारू ई जीया अर बात सारू ई मरिया। बीजी भांगघड़त में उणां रो कोई विश्वास ई नीं हो।
भलांई आपां जैड़ा आजरा तथाकथित समझणा उणां री इण प्रतिबद्धता नै खाली सनक कै कालाई समझता होसी पण उणां सारू वा बात फखत सहज ही। इयां तो राजस्थानी कवियां ई आ बात मानी है कै दैणो, मरणो अर मारणो जैड़ा तीन काम समझणां सूं पार नीं पड़ै ऐ तो नाम राखण सारू काला ई कर सकै-

नर सैणां सूं व्है नहीं, निपट अनौखा नाम।
दैणा मरणा मारणा, कालां हंदा काम।।

ऐड़ी ई एक बात है लोहियाणा रै कुंवर नरपाल देवल री।[…]

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बाजीसा बालुदान जी रतनू बोनाड़ा री बातां

।।३।।
हमे माड़वै सरण लो!!

रुघजी फतेहसिंह रै रो बेटो ऊमजी (ऊमसिंह) भोमै रै तल़ै रै सिंधी भोमै रा ऊंठ खोस लायो। बात इयां बणी कै मंगल़िया अर जंज दोनूं सिंधी। एक मंगल़ियै अर एक जंज री लुगाई अरटियै माथै ऊंन कातती “कोठा कल़प्या” यानि आपरै पेट पड़्यै बेटे-बेटी री सगाई करी। दोनां कवल कियो कै दोनां रै आपस में भलांई जको ई होवो, बेटे-बेटी री सगाई करांला।
जोग ऐड़ो बणियो कै जंज री लुगाई रै बेटो होयो अर मंगल़ियै री लुगाई रै बेटी!![…]

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काजी ई काजी रैयग्या

अेक समै री बात । पांच मिनख आपोसरी मांय कोई बात पर उळझग्या। जिद बहस रै बिचाळै रीस में रसाण पैदा हुयो। माड़ै दिन रो फेर आयो। अेक जवानड़ै रीस ई रीस में सामलै रै कुजाग्यां दे मारी। देखतां ई देखतां सामलो चित्त। नीचै पड़्यो अर प्राण पंखेरू उडग्यो। आपरै सागलै री मौत देख बाकी च्यारूं धोळा-धप्प हुग्या। च्यारां रा मूंढा जूतां ऊं कूट्योड़ा सा। लागै जाणै बापड़ां रा माइत मरग्या हुवै। पैली जोर-जोर सूं चीख अर गाळ बकणियां अबार निसासां न्हाखै। आप जाणो कै रीस स्याणी घणी हुवै। बा तो लारली गळ्यां भाजगी। अबै च्यारूं अेक-दूजै रै सामी जोवै।[…]

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जसोड़ां रा बूंठा छोड देई

दिन अर दशा हरएक री बदल़ती रैवै, इणी कारण इणनै घिरत-फिरत री छिंयां कैयो गयो है। जिकै जसोड़ कदै ई जैसलमेर में जोरावर होता, जिणां रो राज में घातियो लूण पड़तो पण सगल़ी मिनखां री माया रा प्रताप हा!कृपारामजी खिड़िया सटीक ई लिख्यो है कै-

नरां नखत परवांण, ज्यां ऊभां संकै जगत।
भोजन तपै न भांण, रांवण मरतां राजिया!!

ज्यूं-ज्यूं मिनखां रो तोटो आयो, ज्यूं-ज्यूं जसोड़ पतल़ा पड़िया अर त्यूं-त्यूं उणां रो मरट मिटतो ग्यो।[…]

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वाह रे! अमरा वाह!!

राजस्थान रै इतियास में दो अमरसिंह घणा चावा है। एक अमरसिंह कल्याणमलोत अर दूजा अमरसिंह गजसिंहोत। दोनूं ई राठौड़ अर आपरी आखड़ी पाल़ण रै सारू आज ई अमर है।
अमरसिंह गजसिहोत तो घणो चावो नाम है पण अमरसिंह कल्याणमलोत नै कमती ई लोग जाणै। जदकै ऐ अमरसिंह किणी मायनै में कम नीं हा।
राव कल्याणमल बीकानेर रा सपूत अर महाराजा रायसिंह रा अनुज अमरसिंह स्वाभिमान रो सेहरो अर गुमेज रो गाडो हा। आपरै भाई रै साथै अकबर रै दरबार में उपस्थित हा। मुगल पातसाह अकबर अरगीज्योड़ै राजपूतां पेटै कोई हल़को आखर परोटियो। दरबार में विरोध करण री किणी बीजै री हिम्मत नीं होई जाणै गाडर रै कानै माथै जूती राखी होवै पण ओ वीर अगराज उठियो अर बिनां पातसाह री रजा दरबार छोड घोड़ै जीण कस बारोटियो होयो।[…]

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दे नादावत भीमड़ा

जोधपुर महाराजा गजसिंह जैड़ा दातार अर वीर हा वैडा ई दातार अर वीर इणां रा केई सामंत ई हा। इणां रै ऐड़ै ई एक दातार सामंत रो नाम हो पड़िहार भीम नादावत। भीम रै विषय में किणी कवि लिखियो है कै ‘सतजुग में बल़ि, द्वापुर में करन अर कल़जुग में विक्रमादित्य रै साथै भोज इण परंपरा नै सहेत टोरी पण हालती बखत में दातारगी री गाडी रा पहियां धसण लागा उण बखत भीम आपरो सबल़ खांधो देय जुतियो–

तिणवार भीम नादा तणो,
धुर जीतो ताडा धमल़।।

जाझीवाल़ रा जागीरदार भीम नादावत, नादै पड़िहार रा बेटा हा। भीम रो मन मोटो हो। कोई किणी वेल़ा आयग्यो तो ई नाकारो नीं कियो।[…]

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गायां तांझी नीं मांझी गी!!

दासोड़ी रै उतरादी कांकड़ रै कड़खै एक मोटो धोरो है, जिणनै गौयर धोरो कैवै। गौयर मतलब गायां रै स्थाई बैठण री जागा। रात री बखत चौमासै में गांम री गायां अठै बैठती अर इण गायां रो ग्वाल़ो मोहर अथवा मेहर जात रो मुसल़मान हो। पैला दासोड़ी में इण जातरै मुसल़मानां रा खासा घर हा।
एक दिन रात री गायां बैठी अर बो सूतो हो कै अचाणचक उणनै लागो कै कोई गायां नै टोर रैयो है। बो हाकल करर उठियो कै उणनै तीन -च्यार जणां पकड़र बांध दियो। उण पड़ियै पड़ियै ई किरल़ी (जोर से किसी को हेला करना या आवाज देना) करी।

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दोय उदैपुर ऊजल़ा!!

उण दिनां उदयपुर माथै महाराणा जगतसिंह राज करै। उदार अर मोटै मन रा राजा। जिणां रै विषय में ओ दूहो घणो चावो है-

पारेवा मोती चुगै,
जगपत रै दरबार!!

एक दिन उणां रो दरबार उमरावां अर कवियां सूं थटाथट भरियो। बात चाली कै ‘आज री बखत महाराणा जगतसिंह री बराबरी रो कोई दातार नीं!! जितै किणी कैयो कै एक है!! उदयपुर छोटा(शेखावाटी) रा धणी टोडरमल!!’
किणी कैयो कै ‘कठै बापड़ो उदयपुरियो अर कठै उदयपुर!! तुलै सोनो अर मींडीजै ईंटां!!’

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