अर्जनदान मूहड़ सनवाड़ा

आदरणीय अर्जुनदानसा मूहड़ सनवाड़ा रो नाम डिंगल़ रे वर्तमान कवियां मे हरोल़ है। आपरी मोकल़ी कवितावां काव्य प्रेमियां रे विचालै चावी है। पंचायण पच्चीसी, वाह वाह विज्ञान, करणीजी रा छंद, पाकिस्तान नै चेतावणी, कश्मीर रो मामलो, वड़लै रो मर्सियो आद रचनावां अर्जुनसा रे बहु पठित अर बहु श्रुत ज्ञान री परिचायक है। डिंगल़ काव्य नै जुगबोध सूं जोड़तां थकां अर्जुनसा समकालीन साहित्य री दौड़ मे डिंगल़ नै समवड़ ऊभी करणियै कवियां मे शुमार है। “वाह वाह विज्ञान” री कीं दूहा आपरी निजर कर रैयो हूं जिण मे कवि विज्ञान रे पेटै आधुनिक विकास नै दरसायो है वाह वाह विज्ञान (अर्जुनदान […]

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चारण हूँ मैं – पद्मश्री सूर्यदेव सिंह बारहट

मैं समुद्र की लहर, चंद्र की ज्योति,
पुष्प की गन्ध, अथक विश्वास
समय दर्पण हूँ मैं ||
चारण हूँ मैं ||
इतिहासों ने पढ़ा,
रसों ने जिसको गाया
तलवारों की छौहों ने,
जिसको दुलराया,
वही कलम का धनी,
ज्ञान का कारण हूँ मैं||
चारण हूँ मैं|| […]

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अपसूंण – चंद्रप्रकास देवल

सईकां लांबी
उण धा काळी रात रै सूटापै
सैचन्नण चांनणै
नाचण रै कोड सूं पग मांडिया ई हा
मादळ रओ आटौ थेपड़ियौ हौ आलौ कर
थाळी सारू डाकौ सोध्यौ हौ
के चांणचक म्हे-
आजादी रै मंगळ परभात
अमंगळ व्हैग्यौ ।

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