आवाहण गीत

गोखां गिरनार हुंत गज गामण,
कामणराय आप शिव कामण,
जवाळामुखी आव जग जामण
संकट हरण महा सुर सामण॥1॥

धवळ गिरे सौधे धिणयाणी.
सिहलदीप हूंतां सूर राणी
कामरु देश कमख्य कहाणी
करि छोरु उपर किनीयाणी ॥2 […]

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आई मोगल चालीसा

आई मोगल चालीसा
(कवि परताप री कही)

जगदंबा जगदीशरी, मोगल मोरी मात।
भव भय हरणी अंबिका, समपी तौने जात॥1॥

देवी चारण जात री, जग पुजाती बाइ।
ओखा धर उजवाळवा, मोगल प्रगटी आइ॥2॥

आद भवानी इशरी, प्रगटी जिण दन वार।
भगतां रो मंगळ हुओ, जग मांहि जयकार॥3॥ […]

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आज हमारी बेर इति करनादेय

दूहा

सिंवर सिंवर रसणा थकी अम्बे करी अबेर।
दुविधा मेटण दास री सगत आव चढ़ शेर।

छंद-सवैया

मामड़ियाल डस्यो अहि मैर को,जैर को होय सक्यो नहीं जारण।
आवड़ ऊगत आण दरायके ,भाण पे लोवड़ को पट डारण।
पाय पीयूष दियो झट लाय’र है निज भ्रात जीवारण।
आज हमारीय बैर इति करणादेय देर करी केहि कारण।।।1।। […]

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नमो चंडिका रुप चाळक्कनेची-वजमाल महेडू

छंद भुजंगी

तुही आदि अन्नादि वाणी विधाता।
तुंही रिध्धि सिद्धि नवेनिध्धि दाता।
वदे क्रोड तैतीस सुरं वरेची।
नमो चंडिका रुप चाळक्कनेची॥1

कळा चंद्र ज्योति झळेळे कपाळं।
वळे कुंडळं कान शोभंत माळं।
धरे शूल पाणं कृपाणं धरेची।
नमो चंडिका रुप चाळक्कनेची।2 […]

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शत्रु पराजय देवी आवाहण स्तोत्र – कवि डोसा भाई झीबा

छंद : छप्पय

आवड,खोडल आव, आव मोंगल मछराळी।
मात आव मेलडी,जाग ज्वाळा डाढाळी।
अंबा ,करनल आव,आव बहचर बिरदाळी।
हाली आव हिंगोळ,गैल , राजल , महाकाळी।
समरथ सकळ नव लख शगत,चौरासी सह चारणाँ।
उपरां देवी आवो अवस ,सेवग काज सुधारणाँ॥1[…]

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खोडियार माताजी री स्तुति- भावनगर रा राजकवि पिंगळसिंह पाताभाई नरेला

दोहा।

तारण कुळ चारण तणो,उगारण तुं आइ।
मारण महिषासुर री,दुनिया पर दरसाइ॥1

छंद दुरमिल

खळ जोर खळावण भै अळसावण,शर्ण उगारण तुं शगति।
हियमें हरखावण,अम्रत लावण,भाव उपावण तुं भगति।
मनरोग मटावण शोक शमावण जोग दिपावण तुं जबरी।
कुळतारण काज सुधारण कारण खोडल चारण देव खरी॥1 […]

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खोडियार माताजी रो सपाखरु गीत – पुष्पेन्द्र जुगतावत

खोडियार माताजी रो सपाखरु गीत
(रचयिता: पुष्पेन्द्र जुगतावत, गाँव पारलाउ)

हंसावाहणी नमावौ शीश मां तणी आशिश हेर,
बेर अणी कुळांदेवी नमूं बार बार।
चारणां उबार मार पापियां तणा समूह
खळ दळ खपावणी खंग खोडियार॥1॥ […]

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काल़िया के सोरठे-शंभू दान बारठ कजोई

पाल़ै सदा हि प्रीत,अबखी वेल़ा आयने।
मानो साचो मीत,कल़जुग मांही काल़िया।।१।।
गफलत मांय गंवार,लङे अपणोंं सु लोक में।
सम्पती मे ही सार,कल़जुग मांही काल़िया।।२।।
लगनी नित लगाय,हरि ने सिमरे हेत सूं।
निरफल जासी नांय,करणी वांरी काल़िया।।३।। […]

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ख्यात आईनाथ री अनोपो वखाणे-अनोप जी वीठू

श्री सुरसती गणपति वृहसपति शारदा,उकति सम्मपो अन्नदाता।
सापतातम्म री वारता सुणावां,मोतीवाळी हुई जगत माता॥1

हेमाळा पहाड सुं निसरे हालतो,गळियोडा बरफ रो नीर गोटो।
हिंद अर सिन्ध रै बीच मंह होयनै,मोतियां भरोडो पेट मोटो॥2

तिब्बत कम्बोज सुं उतरे ताकडो,हाकडो नांम दरियाव हाले।
घिरोळा देवतो बण्यो घण घमंडी,रतन रतनाकरो मांय राळै॥3 […]

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