सांस्कृतिक-झरोखा – डा. आई दान सिंह भाटी
मैं चानण खिड़िया बोर ग्राम मारवाड़ निवासी आपके सामने कुछ बातें रखना चाहता हूँ। यों तो इतिहास राजपूतों और चारणों के सम्बन्धों से भरा पड़ा है पर मैंने जो देखा और किया वैसा विरलों ने ही देखा होगा, किया होगा। मैं जिस बोर ग्राम में जन्मा, उसे छोड़कर मेरे पिता लुम्बटजी पाघड़ी ग्राम में आ बसे। यह ग्राम सूराचंद ठिकाने का था और सूराचन्द के ठाकुर मेरी कविताओं पर रीझ गये थे। मैं पिताजी के साथ यहीं रहने लगा। पर यह तो मेरी यात्रा का प्रारम्भ था।[…]
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