जब कवि ने शौर्य दिखाया
जोधपुर के महाराजा मानसिंह का कव्यानुराग, विद्याप्रेम, कलाप्रियता, दानशीलता, गुणग्राहकता, गुरुभक्ति, स्वतान्त्र्यप्रेम के साथ शासक के तौर पर कठोर दंड व्यवस्था में निर्दयी दंडात्मक विधियाँ लोकमानस में आज भी जनश्रुतियों के रूप में काफी लोकप्रिय व प्रचलित है। उनके आचरण के दोनों रूप – पहला प्रतिकारी हिसंक रूप और दूसरा प्रशंसा और आभार प्रदर्शन का रूप “रीझ और खीझ” नाम से प्रसिद्ध है। “रीझ” मतलब खुश होना जिस पर प्रसन्न हो गए उनको आकाश में बिठा देना और “खीझ” मतलब नाराजगी, जिससे नाराज हो गए उसका अस्तित्व ही मिटा डालते। उनके इसी रीझ व खीझ वाले स्वभाव को एक चारण […]
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