वाह रे! अमरा वाह!!
राजस्थान रै इतियास में दो अमरसिंह घणा चावा है। एक अमरसिंह कल्याणमलोत अर दूजा अमरसिंह गजसिंहोत। दोनूं ई राठौड़ अर आपरी आखड़ी पाल़ण रै सारू आज ई अमर है।
अमरसिंह गजसिहोत तो घणो चावो नाम है पण अमरसिंह कल्याणमलोत नै कमती ई लोग जाणै। जदकै ऐ अमरसिंह किणी मायनै में कम नीं हा।
राव कल्याणमल बीकानेर रा सपूत अर महाराजा रायसिंह रा अनुज अमरसिंह स्वाभिमान रो सेहरो अर गुमेज रो गाडो हा। आपरै भाई रै साथै अकबर रै दरबार में उपस्थित हा। मुगल पातसाह अकबर अरगीज्योड़ै राजपूतां पेटै कोई हल़को आखर परोटियो। दरबार में विरोध करण री किणी बीजै री हिम्मत नीं होई जाणै गाडर रै कानै माथै जूती राखी होवै पण ओ वीर अगराज उठियो अर बिनां पातसाह री रजा दरबार छोड घोड़ै जीण कस बारोटियो होयो।[…]