धरंत ध्यान आपको – गिरधारी दान रामपुरिया
।।छंद नाराच।।
धरंत ध्यान आपको, अणंद भाव आवतो।
नमंत नाम नेम सूं, जपंत रोग जावतो।।
करंत याद कीरती, मिटंत दोस मावड़ी।
करो सहाय आप आय, धाय बेल धावड़ी।।[…]
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।।छंद नाराच।।
धरंत ध्यान आपको, अणंद भाव आवतो।
नमंत नाम नेम सूं, जपंत रोग जावतो।।
करंत याद कीरती, मिटंत दोस मावड़ी।
करो सहाय आप आय, धाय बेल धावड़ी।।[…]
छंद नाराच
करूं प्रणाम जोग धाम संग धाम गो सिरं।
भुजंग दाम कंठ ताम रक्त नाम लेररं।
महान थान छै अकाम मुक्ति ग्राम मगलं
नमो शिवाय सोमनाथ मो अनाथ को मिलं।। १
नगन्न अंग सीस गंग धूत रंग धारणी।
अफीम भंग बीज चंग पान रंग पारणी।
मतंग चाल पे विराज साज ध्यान निस्चलं।।
नमो शिवाय सोमनाथ मो अनाथ को मिलं।। २ […]
सिरोही का राज दरबार खचाखच भरा हुआ था। महाराजा के कहने पर, युवा कवि लाडूदान आसिया ने अपनी स्वरचित कविताएं सुनाना शुरू कर दिया। बच्चे के शक्तिशाली और धाराप्रवाह काव्य वाचन ने दर्शकों को मन्त्र मुग्ध कर दिया, काव्यपठन समापन होते ही करतल ध्वनि और वाहवाही से पूरा राज दरबार गूँज उठा। भीड़ अभी भी विस्मय से युवा कवि के बारे में चर्चा कर रही थी, सिरोही के महाराजा के मन में विचार आया “कितना अच्छा हो यदि हमारे राज्य के इस अमूल्य रत्न की प्रतिभा की महक हर जगह फैले। ” इस सदाशय से सिरोही के महाराजा ने भुज […]
» Read more🌹छंद रेणंकी🌹
नित नित नवलेश शेश कर समरन, जुग अशेश कर क्लेश जरे|
सुमिरत अमरेश शेश पुनि शारद, ध्यांन धनेश गणेश धरे|
विलसत दश देश बेस बल व्यापक, प्रगट विग्यान अग्यान परे|
दिनकर कर निकर उदयगिरि ऊपर, होय उदयकर तिमिर हरे||१ […]
संत समागम कीजे
हो निश दिन …….. संत समागम कीजे
मान तजी संतन के मुखसे,प्रेम सुधारस पीजे।
अंतर कपट मेटके अपना,ले उनकूं मन दीजे।
भव दुःख टले बळे सब दुष्क्रीत,सब विध कारज सीजे।
ब्रह्मानंद कह संत की सोबत,जनम सुफल कर लीजे॥ […]
छंद: नाराच
विडारणीय दैत वंश सेवगाँ सुधारणी।
निवासणी विघन अनेक त्रणां भुवन्न तारणी।
उतारणी अघोर कुंड अर्गला मां अर्गला।
करंत देवि हिंगळा कल्याण मात मंगळा॥1॥
रमे विलास मंगळा जरोळ डोळ रम्मिया।
सजे सहास औ प्रहास आप रुप उम्मिया।
होवंत हास वेद भाष्य वार वार विम्मळ।
करंत देवि हिंगळा कल्याण मात मंगळा॥2॥[…]
।छंद : नाराच।
चंडी सुभद्र सद्र अद्र आसणं चडी चडी।
भुजाक डाक डैरवां वडां वडां वडां वडी।
करे हुंकार वार वार दाणवां डकारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥1॥
नहीं सो माय बाप आप तैं ज आप ऊपणी।
सुसावित्री उमां रमां शचि अनूप रुपणी।
धिनो प्रचंड खंड मै अखंड जोत धारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥2॥ […]
🌹सूर्य वंदना के भाव के🌹
वंदन कर विख्यात,जगत तात जगदीस ने।
प्हेली ऊठर प्रात,काछप सुत भज काळिया।111
अवनी भरण उजास,नह चूके नित ऊगणौ।
सदा- रथिन् सपतास,काछप सुत भज काळिया॥112
भास्कर आदित भांण, मित्र मिहिर मार्तंड वळ।
करवा जग कल्यांण,कायम ऊगै काळिया॥113 […]
छंद – मोतीदाम
रटूं दिन रात जपूं तुझ जाप,
अरूं कुण नाद सुणै बिन आप
नहीं कछु हाथ करे किह जीव,
सजीव सजीव सजीव सजीव ।।1
लियां तुझ नांम मिटे सब पीर ,
पङी मझ नाव लगे झट तीर ।
तरै तरणीह कियां तुझ याद ,
मृजाद मृजाद मृजाद मृजाद ।।2 […]
सोच रहयो हर रोज सीतावर, कैसा खेल रचाया।
मिळे कठे हर खोजो मंदिर,अजु समझ नही आया।1।
लोग कहे ओ मीरां ने लाधो,सुरती जाय समाणी।
आवत जात दिखी नह आँखे,पाणी मिळयो पाणी।2।
ईसर दास तो हतो खुद ईसर,घोडा समद धुमाया।
परभु य आय बांह ते पकड़ी,ले झट गळे लगाया।3। […]