जगजामी जगदीश जयो
वराह अवतार धार इल़ रदनं, वार सुरां हरसार बणै।
वसुधर तण भार उतारण, विठ्ठल़ हाथ धार हिरणाख हणै।।
जय जय सुर जाप जपै जगतारण, भू भय हारण तुंही भयो।
नामी नवखेल रचै घणनामी, जगजामी जगदीश जयो।।
जयो जगतारण जगन्नाथ जयो।।३
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वराह अवतार धार इल़ रदनं, वार सुरां हरसार बणै।
वसुधर तण भार उतारण, विठ्ठल़ हाथ धार हिरणाख हणै।।
जय जय सुर जाप जपै जगतारण, भू भय हारण तुंही भयो।
नामी नवखेल रचै घणनामी, जगजामी जगदीश जयो।।
जयो जगतारण जगन्नाथ जयो।।३
आज बिरज में धूम है, जन जन करे धमाल।
फागुन छाया है सखी!, बरसे लाल गुलाल।।१
गोरी गोरे गाल की, जिसके नैन विशाल।
उससे होली खेलता, नागरिया नंद लाल।।२
सिर पर छोटी बेंदुली, चमके जिसका भाल।
उससे होली खेलता, नागरिया नँदलाल।।३
बातें मिसरी की डली, लगती मोहनथाल।
उससे होली खेलता, नागरिया नंद लाल।।४
आँखें है जादूगरी, नेह नीर के ताल।
उससे होरी खेलता, नागरिया नंद लाल।।५[…]
परथम अजर अमर अपरमरा
जररा जरण भगतरा जोर
नररा नंग नागरा नाथण
नमो निगमरा अणगम नोर
खळरा दळण लंकरा खेधण
कळरा अकळ कंसरा काळ
गिरिरा धरण मोहरा गाळण
प्रमरा अप्रम प्रजारा पाळ […]
।।छंग – चर्चरी / चंचरीक।।
इक निशि ससि अति उजास, प्रौढ शरद रूतु प्रकास,
रमन रास जग निवास, चित विलास कीन्है।
मुरली धुन अति रसाल, गहरे सुर कर गुपाल,
तान मान सुभग ताल, मन मराल लिन्है।
ब्रह्मतिय सुन भर उछाव, बन ठन तन अति बनाव,
चितवत गत नृत उछाव, हाव भाव साचै।
हरि हर अज हेर हेर, बिकसित सुर बेर बेर,
फरगट घट फेर फेर, नटवर नाचै।।१[…]
🌸छंद रेणंकी🌸
सर सर पर सधर अनर तर अनुसर,कर कर वर घर मेल करे|
हरि हर सुर अवर अछर अति मनहर,भर भर अति उर हरख भरे|
निरखत नर प्रवर प्रवर गण निरजर,निकट मुकुट सिर सवर नमें|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें| १
झणणणण झणण खणण पद झांझर,गोम धणण गणणण गयणे|
तणणण बज तंत ठणण टंकारव,रणणण सुर धणणण रयणे|
त्रह त्रह अति त्रणण घणण अति त्रांसा,भ्रमण भमरवत रमण भमें|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें| २ […]
राजस्थान रै लोक देवतावां में एक नाम भभूता सिद्ध रो ई है। उन्नीसवें शताब्दी रै पूर्वार्द्ध में भभूता सिद्ध रो जनम चारणवाल़ा रा सोलंकी गोमसिंह रै घरै होयो। कविवर शंकर रै आखरां में – गोमा सुतन प्रगट गढ कोटां मोटा भूपत मानै। मेवा मिसठान पतासा मिसरी थिरू चढावै थानै।। कवि रुघजी रतनू आपरै रंग रै दूहां में इण भांत लिखै – सातम है सिद्धराज री, चहुंकूंटां व्है चाव। अमलां वेल़ा आपनै, रंग सोलंकी राव।। सर्पदंश सूं भभूता सिद्ध देवलोक होया। काल़ीनाडी मुख्य स्थान है। आथूणै समूल़ै राजस्थान में घणी मानता। गांव गांव थान। म्हारै दादोसा (गुणजी हरदानजी रा) रा दादोसा […]
» Read moreश्री करनी सुख करनी, अजरामर ए!
आदि शक्ति अवतार, जय देवेशि जये।।1 ।।
विश्व विमोहन कारणि, भवतारिणी ए!
जय जय त्रिगुणातीत, जय देवेशि जये।।2।।[…]
🌸छंद त्रिभंगी🌸
भट वेद पठंदा,संध्या वंदा,कर्मन फंदा,उर्झंदा|
ओंकार जपंदा,मौन रहंदा,अंतर मंदा,मुर्झंदा|
पुनि कथा कहंदा,लोग ठगंदा,विकल फिरंदा,वर्तंदा|
सदगुरु का बंदा,ब्रह्मानंदा,साँच कहंदा, सब हंदा|| १ […]
स्तुति
मढ हूँत बेग पलाण मखत्ती,बावन झूल सहेत बखत्ती
हेकण ताल़ी बाघ हकत्ती, सीस उबेल़ण आव शकत्ती।
साख बीससत काज सरन्नी, बेद किसो जिण जाय बरन्नी
धाबल़ लोवड़ ताय धरन्नी, कवि उबारण आव करन्नी।
शीश चाड जणा साद सुणीजेभारी हुवै कामल़ी भीजे
देबी आय बेग सुख दीजे,किनियाणी अब जेज न कीजे […]
शार्दूलविक्रीडीतवृत्तम्
य: षड्भावविवर्जिताङक्षरपदस्थानादिमुक्त:स्वयं|
स्वेष्टाङ्ज्ञावशवर्तनाङप्तनृजनि सच्चारणज्ञातिक:|
सिद्धार्थ:सुरकोटिगो मतिमतां मूर्धन्य ईष्टव्रती|
आजीवाङदृतनैष्ठिको विजयते श्रीलाडुसंज्ञ:कवि:||१