गुलाब लाजवाब है

छंद नाराच

हरी हरी ज पांनडी लगे घणी सुहावणी।
कळी फबै है फूटरी मनां तनां लुभावणी।
पणां सँभाळ कंटकां इ’रा घणा खराब है।
लख्यौ ललाम लाल वो गुलाब लाजवाब है॥1

कळी कळी महेकती गळी गळी सुबास है।
सुगंध चारू कूंट में हरेक रो औ खास है।
जणां जणां मनां तणो रिझावणौ जनाब है।
लख्यौ ललाम लाल वो गुलाब लाजवाब है॥2 […]

» Read more

बरसी काळी बादळी

बरसी काळी बादळी, हरसी धरा अनंत।
दरसी हरियल ओढणे, सुंदर सी गुणवंत॥
सुंदरसी गुणवंत, गोरडी सज धज बैठी।
आभा जेण अनंत, सरस नरपत मन पैठी।
हरियल भाखर तणी, कंचुकि धारण करसी।
धरती आभा पीव, काज जद बादळ बरसी॥

» Read more

रिषिवर धर रूप अनुपम तरुवर

🌺छंद रेणकी🌺
आतप मँह छाय करे जन जन औ, रुत पावस सिर त्राण करे।
शुभ पवन सुबांटत शीतल सुंदर, विहग सदा जिण पर विहरे।
दिल सूं उपकार करे वह हरदम, जिणरो सभी बखाण करे।
रिषिवर धर रूप अनूपम तरुवर, कायम जग कल्याण करे॥1

तीरथ सरवर वळ ताल नदी तट, वट गुलर अस्वत्थ वळे।
बिच ओरण केर बोर बण ओपत, जंगळ गिर पर जोत जळे।
करता बहु नीड विहग घण कलरव, इसडो कुण उपकार करै।
रिषिवर धर रूप अनूपम तरूवर,कायम जग कल्याण करे॥2 […]

» Read more

फोग रो छंद

छंद – नाराच
फबै थल़ी ज फोग तूं फल़ै ज फूठरो फबै
महक्क धोरियां मुदै सजै ज मोहणो सबै
थल़ी ज थाट तूंज सूं रल़ीज पूरणो रसा
अपै ज रूप ओयणां जुड़ैज होड ना जसा १

मुदै ज मात भोम सूं सप्रीत रीत तो सिरै
दखांज भोम दूसरी धिनो ज ध्यान ना धरै
बहैज एक वाट ही मरू रूपाल़ तूं मँडै
मनां तनां थल़ू मही ज तूं छटांक ना छँडै २ […]

» Read more
1 3 4 5