चौमासो
उमड़ी जद कांठळ उतरादी,
भुरजां में बीजळ पळकी है।
अड़बड़ता वरस्या बादळिया,
खळहळती नदियां खळकी है।।
पालर सूं धोरा हद धाप्या,
तालर में डेडरिया बोलै।
मुधरा बोलै देख मोरिया,
कोयलियां कंठ मीठा खोलै।।
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उमड़ी जद कांठळ उतरादी,
भुरजां में बीजळ पळकी है।
अड़बड़ता वरस्या बादळिया,
खळहळती नदियां खळकी है।।
पालर सूं धोरा हद धाप्या,
तालर में डेडरिया बोलै।
मुधरा बोलै देख मोरिया,
कोयलियां कंठ मीठा खोलै।।
।।छंद – रोमकंद।।
उमड़ी उतराद अटारिय ऊपड़, कांठल़ सांम वणाव कियो।
चित प्रीत पियारिय धारिय चातर, आतर जोबन भाव अयो।
वसुधा धिनकारिय आघ बधारिय, वा बल़िहारिय बात बही।
सुरराज करी गजराज सवारिय, मौज वरीसण आज मही।।
जियै, मौज समापण राज मही।।1 […]
घनघोर घटा नभ में गरजै,
धुनि जाण नगाड मृदंग बजै।
कलशोर करै पिक, मोर करै नृत, ढेलडियां शिणगार सजै।
डक डौ डक दादुर झिंगुर जाणक, बीण मँजीर बजावणा है।
अनुराग सुराग बिहाग समा दिन पावस रा रल़ियावणा है।
घनश्याम सखी!मन भावणा है।
घनश्याम घणा मन भावणा है।।१ […]
वादल़िया वल़िया थल़ी, सधरा घुरै सजोर।
छटा अनोखी निरख छिब, मधरा बोलै मोर।।1
आयो सुरपत उमँगियो, काल़ी कांठल़ कोर।
ढब सज लाडो ढेल रो, मनभर नाचै मोर।।2
उमँग्यो मास असाढ में, तण तण वासव तोर।
जबर सवागत जेणरी, मनसुध सजियो मोर।।3 […]
।।गीत बडो साणोर।।
परम आसरो पामियो अठे नित पंथिये,
चरम त्रिप्ती थई पूर्ण इंछा।
बावळां नरम नाजुक घड़ी विचारो,
रूंख रिछपाळ री करो रिच्छा।
इये ने राखियों टळै दर आपदा,
सदा चाकर रहै पवन वरसा।
प्राणदा हरित ने पोखजो प्राणियों,
कुदिन निवडे़ हुवे सुखी करसा।
प्रहास शाणोर बिरखा रो
उरड़ियो आज उतराध सूं ऐरावतपति
खरै मन उमड़ियो बहै खातो।
गहरमन नाज अगराजतो घुमड़ियो
मुरड़ियो काल़ रो देव माथो।।1
राखजौ जतना सूं आछी
जगत धरणी जोत नै
इण जीव शरणी भोम नै
गंगा सा निरमल नीर नै
फूलां सशोभित बाग नै
बागां महकती पवन नै
।।छंद त्रिभंगी।।
आषाढ ऊच्चारं, मेघ मलारं, बनी बहारं जलधारं।
दादुर डकारं, मयुर पुकारं, सरिता सारं विस्तारं।
ना लही संभारं, प्यास अपारं, नंद कुमारं निरधारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गीरधारी !!
मुरधर रमवा आवै आंधी।
बल़-कल़ आप बतावै आंधी।
फूस बुहारी करै फूठरी।
थल़ रो रूप सजावै आंधी।।
थल़ियां -थल़ियां हीमत देखण।
तीर! रावड़िया बावै आंधी।।
धूड़ गैंतूल़ा चहुंदिस करिया
निरमल़ नभ में छावै आंधी।। […]
आंगण ऊभौ नीम सजणवा!
हर पळ संग हकीम सजणवा!
खारो है पण लागै प्यारौ,
निरखणदोनी नीम सजणवा!
चैत म्हौरतौ फूल फौरतौ,
सुंदर सहज असीम सजणवा!