चारण साहित्य का इतिहास – पांचवाँ अध्याय – मध्यकाल (द्वितीय उत्थान) – [Part-A]
मध्यकाल (द्वितीय उत्थान) (सन् १६५०-१८०० ई.) (१) – काल-विभाजन मध्यकाल (प्रथम उत्थान) से आगे चलकर हम एक ऐसे युग में प्रवेश करते है जो इतिहास में मुगल-साम्राज्य का ‘पतन-काल’ कहा जाता है हिन्दी-साहित्य के लेखक जिसे रीति-काल (१६४३-१८४३ ई.) कहते हैं, डॅा. मेनारिया उसे राजस्थानी साहित्य के उत्तरकाल की संज्ञा देते हैं। यह काल सम्राट् औरंगजेब के सिंहासनारूढ़ होने के समय से (१६५८ ई.) सम्राट् शाहआलम तक (१८०३ ई.) अंग्रेजों के दिल्ली पर अधिकार करने तक प्रवाहमान होता है। चारण-काव्य की दृष्टि से यह युग पृथक महत्व रखता है क्योंकि परिवर्तित राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक एवं साहित्यिक परिस्थितियों से प्रभावित होकर […]
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