घनघोर घटा, चंहु ओर चढी – कवि मोहन सिंह रतनू

।।छंद – त्रोटक।।
घनघोर घटा, चंहु ओर चढी, चितचोर बहार समीर चले।
महि मोर महीन झिंगोर करे, हरठोर वृक्षान की डार हले।
जद जोर पपिहे की लोर लगी, मन होय विभोर हियो प्रघले।
बन ओर किता खग ढोर नचै, सुनि शोर के मोहन जी बहलै।[…]

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हे चारणी सुख कारणी – आई सोनल माँ कृत स्तुति

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हे चारणी सुख कारणी ब्रह्मचारणी आई सरण।
सच्चिदानंद सारदा मंगळमयी मणमूं चरण।।1।।[…]

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આઇ શ્રી ખોડીયારનો છંદ – કવિ કાનદાસ મેહડુ

।।છંદ – સારસી।।
ભણત કવિયંદ શાહર, તૂજ વાહર ઘણી જાહર કંધર; 
દૈતાવ ડાહર મતિ શાહર ઉપર તાહાં અમપરં; 
પાંથવા પાહર તુંજ વાહર, મેખ માહર ઝળમળી; 
ખટવ્રણા સંકટ પડી ખોડલ, આવ્ય માત ઉતાવળી…૧
હે ભવાની ! હે આઈ ! કવિઓ આપની સહાય યાચી રહ્યા છે, ત્યારે આપ તેની મદદે આવો . દૈત્યો-દુષ્ટો સૌને ડરાવી રહ્યા છે, ત્યારે અમારી મતિ-બુદ્ધિ તો આપનું જ સ્મરણ કરે છે. અમને તો આપનો જ ભરોસો છે. દૈત્ય મહિષાસુર (પાડો)ને મારનારા હે આઈ ! કવિઓ આપની પ્રાર્થના કરે છે. કવિઓ પર આવી પડેલ સંકટ વેળાએ હે ખોડિયાર આઈ ! આપ સત્વરે તેમની મદદે આવજો.[…]

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कर मत आतमघात – कवि मोहन सिंह रतनू

आत्म हत्या महा पाप है, विगत कई सालों से बाडमेर जिले में आत्म हत्याएं करने वालो की बाढ आ गई है। मैंने इस विषय पर कतिपय दोहे लिखे जो आपकेअवलोकनार्थ पेश है-

कायर उठ संघर्ष कर, तन देवण नह तंत।
पत झड रे झडियां पछै, बहुरि आय बसंत।।1

अंधकार आतप हुवै, मघवा बरसै मेह।
ऊंडी सोच विचार उर, दुरलभ मानव दैह।।2

लाख जनम तन लांघियो, पुनि मानव तन पात।
बिरथा देह बिगाड़ नै, कर मत आतम घात।।3

सुख दुख इण संसार मे, है विधना के हाथ।
दुर दिन सनमुख देखनै, कर मत आतम घात।।4[…]

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रंगभर सुंदर श्याम रमै – स्वामी ब्रह्मानंद जी

।।छंद – रेणकी।।
सर सर पर सधर अमर तर अनसर,करकर वरधर मेल करै।
हरिहर सुर अवर अछर अति मनहर, भर भर अति उर हरख भरै
निरखत नर प्रवर प्रवरगण निरझर, निकट मुकुट सिर सवर नमै।
घण रव पर फरर धरर पद घुघर, रंगभर सुंदर श्याम रमै।।[…]

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कहाँ वे लोग कहाँ वे बातें (गाँव सींथल का एक वृतांत) – सुरेश सोनी (सींथल)

आज आपके सींथल का एक वृतान्त पेश करता हूं –
सींथल गांव किसी भी कालखंड में परिचय का मोहताज नहीं रहा है, क्योंकि हर युग ने इस गांव की उर्वरा भूमि पर प्रतिभावानों, बुद्धिमानों, व्यापारियों, समर्थों व श्रेष्ठों की उत्पत्ति मन लगाकर की है।
यहां के हजारों किस्से बीकानेर, शेखावाटी, मारवाड़ व मेवाड़ तक के गांवों की हथाइयों में आज भी कहे जाते हैं और उन किस्सों के नायक आज भले ही इतिहास के अंग बन गए हैं, मगर लोगों की जुबानों पर आज भी भली-भांति जिन्दा हैं।
बात उस जमाने की है, जब मेरा तो जन्म भी नहीं हुआ था। गांव के किसरावतों के बास में रहने वाले कालूदानजी ‘बडोजी’ गांव के मौजीज आदमी हुआ करते थे।[…]

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काव्य कलरव स्नेह मिलन समारोह खुड़द

।।छप्पय।।
मह पावन मरूदेश, मुदै कियो महमाई।
किनियाणी करनल्ल, आप घर सागर आई।
जणणी धापू जोय, नाम जग इंद्रा नामी।
चारण वरण चकार, वंश रतनू वरियामी।
खुड़द नै अचड़ दीनी खमा, आणद अपणां आपिया।
जूनकी रीत पाल़ी जगत, केवी व्रन रा कापिया।।1[…]

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काव्य-कलरव सांंस्कृतिक संगम एवं स्नेह मिलन समारोह (१३-१४ जुलाई २०१९ खुड़द)

  • दो दिवसीय सांस्कृतिक संगम एवं स्नेहमिलन समारोह संपन्न
  • श्रीमढ खुड़द धाम की आस्था के उजास पर पढ़े गए छंद एवं गीत
  • सोशल मीडिया की उपादेयता एवं प्रासंगिकता” विषयक संगोष्ठी में की विद्वानों ने शिरकत
  • विशिष्ट साहित्यिक सांस्कृतिक प्रतिभाओं का किया गया अभिनन्दन
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श्री इंन्द्रबाईसा अन्दाता के जन्म-दिवस पर – राजेन्द्रसिंह कविया संतोषपुरा सीकर

संम्वत गुनी’सै त्रैसटियां, साणिकपुर सामान।
शुकल पक्ष आसोज मे, श्री हिंगऴाज सुथान।।

चराचर जगत की हलचल की हर भांति की गतिविधियां अपने अपने नियत निर्धारित परिसंचरण तंत्राधिन सक्रिय सहयोग कर ब्रह्माण्ड संचालन में परम सत्ता के प्रति उत्तरदायित्व का परिपोषण करती है। इसी नियम से ही आसुरी शक्तियों के उद्भव को पराभूत पराजित करने के लिए श्रृष्टि चक्र मे अवतार अवतरण की सनातन परम्परा चलती आ रही है, जिसमें शक्ति अवतार की श्रृंखला भी समय समय पर सदा-सर्वदा चलती रही है।[…]

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गीत वांमणावतार रौ – महाकवि नांदण जी बारहठ

गीत वांमणावतार रौ (नांदण कहै)

आखै दरबार ब्रिहामण उभा,अंग दिसै लुघ वेदअगांह।
रीझ सु इती दीधयै मो राजा,मांडू मंढी जिती भुंम मांह।।1

विप्र विनंतिपयंपै वांमण,मैहर करै लेइस माप।
इळ थी आठ पांवडा अमकै,एकण कुटी जिती तूं आप।।2

जग ताहरा तणौ सांभल जस,हूं आयो मन करै हट।
दुज उंचरै दीये मो दाता,धर्मसाला जेतली धर।।3[…]

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