म्है अबै पाणी तिलाक दियो!!
एक समय हो जद लोग आपरी बात री कीमत जाणता अर हिम्मत रै साथै उण माथै कायम रैता। मर जाणा कबूल पण दूध- दल़ियो नीं खाणा री बात माथै अडग रैता। आज लोग लांठै मिनख री नगटाई अर नुगराई रो विरोध करण सूं डरै अर उणरै आगै लटका करै। क्यूंकै ‘कुतको बडी किताब, लांठाई लटका करै’ पण उण बखत अन्याय अर अत्याचार रै खिलाफ उठ ऊभा होवता तो का तो बात मनायर छोडता अर पार नीं पड़ती तो उण जागा नै तिलाक सदैव रै सारू छोड देता। छोड देता तो पछै भलांई कोई कितरा ई चीणी रा धोरा बतावो वांरो मन नीं डिगतो।
ऐड़ो ई एक किस्सो है महाराजा सूरतसिंहजी बीकानेर री बखत रो। […]