ज्वारडा! खम्मा घणी!ओ ठाकरां
तावडा ज्यूं क्यूं तपौ हो आकरा,
ज्वारडा! खम्मा घणी ओ ठाकरां!
बाजरी रो एक कण दीधा बिनां,
बोरियां भर बांटिया क्यूं काकरा!
छाल़ियां द्यो आज चरवा सीम में,
काल ले लिजौ भलां दुय बाकरा||
Charan Community Portal
तावडा ज्यूं क्यूं तपौ हो आकरा,
ज्वारडा! खम्मा घणी ओ ठाकरां!
बाजरी रो एक कण दीधा बिनां,
बोरियां भर बांटिया क्यूं काकरा!
छाल़ियां द्यो आज चरवा सीम में,
काल ले लिजौ भलां दुय बाकरा||
उठै मन में भाव बीरा!
कलम कागद लाव बीरा!
दूर बैठौ पोल़ में क्यूं,
आव घर में आव बीरा!
करे संको मती मन में,
सहज दे प्रतिभाव बीरा!
तान लय री छेड नें थूं,
गीत गज़लां गाव बीरा!
भाव है मोटौ ठिकाणौ, […]
हाल मनवा! दूर अनहद देस; चालां,
ले कमंडल, प्हैर भगवौ भेस; चालां।।१
चिट्ठीयां नी डाकियौ नी है कबूतर,
तोई कुण भेजे रियौ संदेश; चालां।।२
बाट में रूकणौ बटाऊ ठीक है पण,
पंथ री दूरी लखै हम्मेश; चालां।।३
छाछ, बाटी, राबडी रो स्वाद लेवा,
गांव, ढांणी, झूंपडी के नेस; चालां।।४ […]
લાગો મને નટવરથી નેડો…
લાગો મારે નટવરથી નેડો,
કે હવે મેં તો શિર નાખ્યો છેડો રે; -ટેક
કે સહુ મળી ને મુજને વારી,
કે અટકી મન વૃતિ મારી,
કે ધણી મેં તો ધાર્યા ગિરિધારી રે,-લાગો
કે શું મતલબ મારે કોઇ સાથે,
કે મહેણું મારે મોહન નું માથે,
કે હરિવરે મુંને ઝાલી હાથે રે, -લાગો
जींदगी रा गीत री पंक्ति घणी है|
वां सबां में आध इक म्है गणगणी है|
आज भाल़ी बाट तो औ ठा पडी के,
जिंदगाणी थां बिना लंबी घणी है||
बे विपद रा भाखरां ने काट देवै,
हाथ जिण रे धैर्य री हीराकणी है||
पावतां ही परस निरमल डील होवै,
प्रेम अर प्रियतम उभय पारस मणी है|| […]
🌸छंद अडिल्ल🌸
विमल देह वाणी ब्रह्माणी,
सादर आव अठै सुर राणी।
लय छंदों री करवा ल्हाणी,
वसौ कंठ मां वीणा पाणी।।१ […]
कवि नरपत दान आसिया की जुबानी अपने नानोशा कवि अजयदान जी रोहडिया के जीवन की कुछ रोचक घटनाएं: काशी नागरी प्रचारिणी सभा की विशारद की परीक्षा में मेरे नानोशा अजयदान जी लखाजी रोहडिया, मलावा भुगोल में फेल हो गए, फिर क्या था उन्होंने भुगोल के सारे सवाल के जवाब कविता में लिखकर तैयार किए और एक कुंजी काव्यमय भुगोल की बना दी। उनको फिर भुगोल में दुसरी बार परीक्षा देने पर सौ में से तेरानवै नंबर आए. कुछ उदाहरण: प्रश्न :भारत में उत्तम बंदरगाह की क्यों कमी है? जवाब:तट प्रदेश का कटा, फटा, रेतीला, सम है। इसी लिए भारत में […]
» Read more
।।छंद: हरिगीतिका/सारसी।।
शुभ स्वेत वसना, ललित रसना, दडिम-दसना, उज्जवला।
कलहंस करती, फरर फरती, तिमिर हरती, निर्मला।
सिर मुकुट सुंदर, हार गल वर, माल मनहर कर अति।
प्रिय पुस्तपाणि, वाक-वाणी, वीण पाणी, सरसती।।१[…]
मेरे मित्र अवधेश सा देवल से वलदरा में मिलने का हुआ तो उन्होने मुझे सिरोही जिले के ऐतिहासिक पौराणिक सरस्वती मंदिर जो अजारी गांव में स्थित है उसका जिक्र किया और निवेदन किया की आप पर सरस्वती की कृपा है सो सिरोही जिले के अजारी गाँव स्थित सरस्वती मंदिर के अवश्य दर्शन लाभ लें। मैंने उनको बताया था कि हम दोनों साथ साथ चलेंगे और वहां दर्शन करने जाने से पूर्व एक सरस्वती वंदना मेैं मां की बनाने की कोशिश करूंगा। और जब दर्शन करेंगे तो मां के सामने सस्वर पठन करेंगे। आज उस बात को ध्यान में रखते हुए […]
» Read moreदूध की सुधि नहिं बछरानहु, पागुर और न गाय करे है|
पौन समर्थ रहै नँह गौन हू मंद ही मंद वही विचरे है|
चालत सूर्य सुता जल ह्वै थिर भूधर होत द्रवित झरे है|
आलि!कहा कहों जो मुरली मुरलीधर ले अधरान धरे है||१