કાંકરી – કવિ શ્રી દુલા ભાયા કાગ

કુળ રાવળ તણો નાશ કીધા પછી, એક દી રામને વહેમ આવ્યો;
“મુજ તણા નામથી પથ્થર તરતા થયા, આ બધો ઢોંગ કોણે ચલાવ્યો?”
એ જ વિચારમાં આપ ઊભા થયા, કોઇને નવ પછી સાથ લાવ્યા;
સર્વથી છૂપતા છૂપતા રામજી, એકલા ઉદધિને તીર આવ્યા. 1
ચતુર હનુમાનજી બધું ય સમજી ગયા, […]

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शिरोमणि दानी सांगो गौड -अजय दान जी लखदान जी रोहडिया (मलावा)

वीरता में ज्यूं राजस्थान, रियौ है आगे प्रान्त अजोड।
त्यूहिं परसिध है जग सौराष्ट्र, शूरवीरों री धर सिरमोड।।१
जिको गांधी भी जलम्यो जेथ, कियो भारत नें जिण आजाद।
कहो किण रे मनडे रे मांय, नहीं है इण धरती री याद।।२
जठे कइ वेगा वीर जवान, मरण लग जिको न तजता माण।
पण्ड पर सह लेता सब पीड, पिरण पर दे देता पण प्राण।।३[…]

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शारदा स्तुति -प्रबीन सागर से

🍀भुजंग प्रयातम् छंद🍀
ओंकार प्रेमं प्रभा नाद बिंदा।
जयो मातुरा चातुरा भेद छंदा।
गिरा ग्यान गोतीत गूढं गनानी।
जयो पार विस्तारता वेद बानी।।१[…]

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हेत हु की न करो तुम हांसी – प्रबीन सागर से सवैया

सागर रावरे कागद को इत
ज्योंज्यो लगे अरहंट फरेबो।
त्यौं त्यों हमे अखियान अहोनिश
बार की धार धरी ज्यौं ढरैबो।
ज्यों ज्यों प्रवाह बहै अँसुवानको
त्यों त्यों व्रिहा हिय हौज भरैबो।
ज्यों ज्यों सुरंज सनेह चढै मधि
त्यों त्यों जिया निंबुवा उछरेगो।।१[…]

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सजधज हालां,घूमर घाला

सजधज हालां, घूमर घाला, ले रिपियां री थेली।
बैठौ साजण सेठ बजारां, आव सखी! अलबेली।।

हेली हालों भाल़वा, बैठौ कुण बजार।
चख डंडी मन पालडै, जोखै नेह जँवार।।
जोखै नेह जँवार, करै नी बिलकुल धोखो।
बालम रो व्यवहार, चातुरी भरियौ चोखो।
मोठ बाजरी मूंग, बांटतौ भर भर थेली।
किं रूपियां रो काम, हेरतां देसी हेली।।
मन रो भोल़ो, हेत हबोल़ो, फिकर मती कर गैली!
बैठौ साजण सेठ बजारां, आव सखी! अलबेली।।१

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गोख खडी छै गोरडी

चंदा थारी चांदणी, कीकर पडगी मंद?
गोख खडी छै गोरडी, निरखण नें नँद नंद।।१
अली !कली सूं आज कल, रहे न क्यूं रति रंग?
राधा मिसरी री डल़ी, चली श्याम रै संग।२

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अलूजी लाळस रा बारहमासा

॥छंद रोमकंद॥
अषाढ घघुंबिय लुंबिय अंबर बादळ बेवड चोवळियं।
महलार महेलीय लाड गहेलिय नीर छळै निझरै नळियं।
अंद्र गाज अगाज करे धर उपर अंबु नयां सर उभरियां।
अजमाल नथु तण कुंवर आलण सोहि तणी रत सांभरिया ।
म्हानै सोहि तणी रत सांभरिया॥ 1 ॥[…]

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घनश्याम सखी!मन भावणा है

घनघोर घटा नभ में गरजै,
धुनि जाण नगाड मृदंग बजै।
कलशोर करै पिक, मोर करै नृत, ढेलडियां शिणगार सजै।
डक डौ डक दादुर झिंगुर जाणक, बीण मँजीर बजावणा है।
अनुराग सुराग बिहाग समा दिन पावस रा रल़ियावणा है।
घनश्याम सखी!मन भावणा है।
घनश्याम घणा मन भावणा है।।१ […]

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वाह भड सांदू वाह!

आज रे भौतिकता वादी जुग में ई राजस्थान री इण पावन धरा रे मांय दान री परंपरा री अनवरत गंगा चालू है। जो आदू समै री गंगोत्री सूं कल कल करै है। इण रो परिचय सोशियल मीडिया रे मांय अबार ई थोडा दिन प्हैली वियोडी एक घटना है जिकण औ सिद्ध कर दियौ के आदू पुराणी दान अर दातारी री बातां कोइ दंतकथा या महज किस्सा कहाणी नी हा पण बे चीजां आखर आखर साच ही।
आज मैं बात मांडणी चावूं हूं एक निजानंदी कवि अर घोडां रा सौदागर नीतिराज सिंह सांदू सिहु री जिकण घोडी रो दान एक गुणी कवि मीठे खांजी मीर नें देयर पुराणी दान री परिपाटी नें पुनर्जिवीत करण री कोशिश करी।

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दोहा नें सब रंग दे, शेर गजल नें दाद|

जाहिद शराब पीने दे मस्जिद मे बैठकर,
या वह जगह बता जहां पर खुदा नहीं।
~~मिरज़ा गालिब (1797-1869)

मने करण दे मौलवी, मस्जिद में मदपान।
(या)जगह जगत में बावडौ, जठै नही भगवान॥
~~नरपत आवडदान आशिया “वैतालिक” […]

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