बाळ जाण माँ बगसजे

काढो शुभ कादंबरी, करणी मां रे काज।
आरोगेला ईसरी, मेहाई महराज।।६२२
सरल मनां सुणजे सगत, गरल घणो मन म्हां ज।
बाळ जाण बगसो भवा, मेहाई महराज।।६२३
सदा ह्रदय सरसावजे, स्नेह सुधा सरिता ज।
अवगाहण मिस आवडा, मेहाई महराज।।६२४
किनियांणी कोटिक गुनां, रोज करूं रिधु राज।
बाळ जांण मां बगसजै, मेहाई महराज।।६२५[…]

» Read more

शक्रादय स्तुति का भावानुवाद

स्तुति शक्रादय री सरस, कविता कीरत राज।
मांड रह्यो सुण मावडी, मेहाई महराज।।५५२
अरिकुलभयदा अंबिका, क्रोधित नयणां मां ज।
जया रूप जोगण जबर, मेहाई महराज।।५५३
काळी कांठळ सम कहूं, सिर अध ससि जिण साज।
जया रूप माता जयो, मेहाई महराज।।५५४
कर मँह शंख कृपाण जिण, चक्र त्रशूळां साज।
जया रूप जोगण जबर, मेहाई महराज।।५५५[…]

» Read more

देवीअथर्वशीर्षम् का भावानुवाद

आखर अथर्व शीर्ष रा, देवी दाखूं आज।
उकती दीजो अंबिका, मेहाई महराज।।४५६
सकल देव सुरलोक रा, कहियो करणी मां ज।
कहो आप किनियांण कुण, मेहाई महराज?।।४५७
पुरूख प्रकृति पुहमि पर, जगत चराचर म्हां ज।
शुन अशुन्न सब हीज हूं, मेहाई महराज।।४५८
मात वदी निज मुख मधुर, आखर शुभ रिधु राज।
ब्रह्मरूप हूं भगवती, मेहाई महराज।।४५९[…]

» Read more

आखर आखर आप रा

रचना म्हारी री रिधू, लोवडधर रख लाज।
आखर आखर आप रा, मेहाई महराज।।४४८
रचना सुध मन सूं रची, आखर थारी आ ज।
म्हारी हूं कह किम कहूं, मेहाई महराज।।४४९
सकळ जगत है स्वारथी, जूठा सभी सगा ज।
आखर आखर है खरा, मेहाई महराज।।४५०
सकल जगत है स्वारथी, जूठा सभी सगा ज।
आखर आखर आख ले, मेहाई महराज।।४५१[…]

» Read more

तंत्रोक्त रात्रिसुक्तम का भावानुवाद

रात्रि सुक्त तंत्रोक्त रा, मायड भासा मांझ।
आखर मांडूं ओपता, मेहाई महराज।।४१६
जोगण निद्रा आपरा, कथूं प्रवाडा राज।
उकती शुभ दो अंबिका, मेहाई महराज।।४१७
अखिल जगत अधिराजिनी, धारण वळै धरा ज।
उतपति थिति लय कारणी, मेहाई महराज।।४१८
अनुपम सगती इश री, नींद कहै दुनिया ज।
आवड वपु खुद अंबिका, मेहाई महराज।।४१९[…]

» Read more

ॠगवेदोक्त रात्रिसुक्तम भावानुवाद

रात्रि सुक्त ॠगवेद रा, आखर माडूं आज।
शुभ उकती मां समपजो, मेहाई महराज।।३९९
व्यापक वपु वसुधा तथा, जीव चराचर मांझ।
रात राजराजेस्वरी, मेहाई महराज।।४००
ईहग मन आलोकिणी, धारण सकळ धरा ज।
जथा करम फलदायिनी, मेहाई महराज।।४०१
अमरबेल रे जिम अमर, छाई बिरछ घटा ज।
रात राजराजेस्वरी, मेहाई महराज।।४०२[…]

» Read more

सांझ रूप माता स्वयं

लखी ललित शुभ लालिमा, अरुणिम अंबर आ ज।
सांझ रूप माता स्वयं, मेहाई महराज।।३९२
देशाणा मढ मांय नें, सरस पडी है सांझ।
आवड ने अरदा, मेहाई महराज।।३९३
रात प्रात री ब्हैनडी, वय संधिन् वळ सांझ।
चहूदिश चमकै चांदणी, मेहाई महराज।।३९४
पंछी पाछा आविया, वळिया माळा मांझ।
रात रूप रिधु मां नमूं, मेहाई महराज।।३९५[…]

» Read more

ॠगवेदोक्त देवीसुक्तम् का भावानुवाद

रहस कहण ॠगवेद रा, देवी सुक्तम राज।
आखर दीजो अम्बिका, मेहाई महराज।।३५२
सिर पर जिण धरियो ससी, सिंह सवारी साज।
मुख मणिमरकत कांतिमय, मेहाई महराज।।३५३
चौभुज चंडी चक्र धनु, शंख बाण धरिया ज।
तरण तारणी त्रंबका, मेहाई महराज।।३५४
बाजूबंध धर दुय भुजां, कंकण मांहि करां ज।
हीरक गळ बिच हारलो, मेहाई महराज।।३५५[…]

» Read more

नरपत खुद लिखिया नँही

नरपत खुद लिखिया नँही, मां रा आखर मां ज।
लिखिया लोवडवाळ खुद, मेहाई महराज।।३३१
म्हारै मन में उमडिया, आखर बणे अवाज।
मुख सूं तद में भाखिया, मेहाई महराज।।३३२
द्रग देखो देशाणपत, रसन रटो रिधु राज।
करण सुणो किनियांण रव, मेहाई महराज।।३३३
सरळ ह्रदय री डोकरी, रखो नोकरी राज।
तूं अधिपत तिहुलोक री, मेहाई महराज।।३३४[…]

» Read more

अर्गलास्तोत्रम् का भावानुवाद

अजब अर्गला स्तोत्र रा, कथूं कवित मँह राज।
सबद समप सुभकारिणी, मेहाई महराज।।३०४
काळी भद्र कपालिनी, स्वाहा स्वधा शिवा ज।
सचर अचर संचालिनी, मेहाई महराज।।३०५
छिमा, मंगला धातरी, जयँती अर दुरगा ज।
सूर चंद्र कोटि प्रभा, मेहाई महराज।।३०६
दे जय देवी चामुँडा, हारी वपु पीडा ज।
काळरात सब दिश-गता, मेहाई महराज।।३०७[…]

» Read more
1 15 16 17 18 19 30