फेसबुक्क अर वाट्सअेप

फेसबुक्क अर वाट्सअेप रा फंडा अजब निराळा है।
वाह, चाह रै दो मिणियां री, आ वैजन्ती माळा है।
इण माळा रो इक-इक मिणियों, अणबींध्यो सो मोती हैं।
हर मोती री दिप-दिप करती, अेक जगामग ज्योती है।
ज्योती आ जगमगती जग में, अंधारै सूं आज अड़ी।
इणसूं अड़तां अंधारै री, जड़ ऊंडोड़ी उखड़ पड़ी। […]

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इसड़ी म्हारी राम कहाणी

खावण नै फगत उबास्यां है,
पीवण नै आंख्यां रो पाणी।
दुख जा दुख नै दुख सुणावै,
इसड़ी म्हारी राम-कहाणी।।

कूंपळ कूंपळ मगसी मगसी,
पत्तो पत्तो सूखो सूखो।
तितली तितली तिसी तिसी सी,
भंवरो भंवरो भूखो भूखो।।
कोयल री पांखां सा पाटा
आळां मंडराता सण्णाटा।
स्यात म्हारड़ै खातै लिख दी,
विधना जग री सकळ विराणी।। 01।।[…]

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क्रांतिवीर बारहठ केशरी सिंह

वक्त आने पर वतन पे वार दी जिसने जवानी।
और उसके खून में भी थी रवानी ही रवानी।।
बंधु के बलिदान की मां भारती खुद ले बलैयां।
क्रांतिकारी केसरी के त्याग की अद्भुत कहानी।।01।।[..]

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बदळाव

कांई फरक पड़ै कै राज कीं रो है ?
राजा कुण है अर ताज कीं रो है ?
फरक चाह्वो तो राज
नीं काज बदळो !
अर भळै काज रो आगाज
नै अंदाज बदळो !
फकत आगाज ‘र अंदाज ई नीं
उणरो परवाज बदळो !
आप – आप रा साज बदळो […]

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कैड़ी राफारोळ मची है

रचना जग री जबर रची है, बेमाता बेखबर पची है
इन्दर री आंख्या चकराई, सुंदर पोपां बणी सची है।
बाकी सगळा जाणबावळा, बाळ-बाळ बेमात बची है।
सामै ऊभो साच न सूझै, झांकै उण दिस कूड़ जची है।
इणरी उणनैं उणरी इणनैं, कैड़ी राफारोळ मची है।

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खाखी बोली खरी-खरी

करतां इज काम निकरमी बाजूं, करता मो पे गजब करी।
दिल रो दरद दुहेलो उझळ्यो, खाखी बोली खरी-खरी।।

अै नकटा, अै निपट निकरमा, अै गुँडा अै आदमखोर।
अै पापी, अै ढ़ोंगी पक्का, अै पाखंडी, नामी चोर।।
जग रै मूंढै आ जस गाथा, कहो किसी तपतीश करी।
रंज’र रीस टीस बण रड़कै, खाखी बोलै खरी-खरी।।

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सुण कलम सांच बोल्यां सरसी

ओ बगत बायरो बतळावै
उणसूं अणजाण कियां बणसी।
जे भाण ऊगणो भूल्यो तो
सुण कलम साच बोल्यां सरसी।।
जण-जण रै मन में भय जब्बर
रण-रण त्रासां रणकार हुवै।
भण-भण अै लोग भला भटकै
खण-खण खोटी खणकार हुवै।।
देवां रै झालर झणकारां
रैयत रुणकारां दबी पड़ी।
फांफी फणगारा फळफूलै
ईमान धरम पर मार पड़ी।।
कण-कण धरती रो कांपै है
आभो किम धीरज अब धरसी।
मरजाद धरम नै राखण हित
सुण कलम साच बोल्यां सरसी।।01।।[…]

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बूढा घर री साख हुवै

बूढां रो अपमान कर्यां सूं, मिनख जमारो खाख हुवै।
बूढा थारी-म्हारी सोभा, (अै) बूढा घर री साख हुवै।।

इक दिन सबनै बूढो होणो, इणमें मीन न मेख सुणोे।
चार दिन रो जोश जवानी, पछो बुढापो पेख गुणोे।।
शैशव, बाळपणो’र जवानी, अगलो आश्रम दे ज्यावै।
ओ बुढापो कछु नहीं देवै, जीव तकातक ले ज्यावै।
मिटसी महल, ठहरसी गाडी, आं रिपियां री राख हुवै।
बूढा थारी-म्हारी सोभा, (अै) बूढा घर री साख हुवै।। 01।।[…]

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स्वार्थ रूपी होलिका की गोद में जीवनमूल्य रूपी प्रहलाद का भविष्य

रंग, उमंग और हुड़दंग के रंगारंग पर्व होली की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं। हमारे पूर्वजों ने जीवन के हर कदम पर कुछ प्रतीकात्मक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए हमें जीवन जीने की सीख प्रदान की है। होली से जुड़े कुछ प्रतिमानों पर आज विचार करने की जरूरत आन पड़ी है। “जमाना बदलता है तो सब कुछ नहीं तो भी बहुत कुछ बदल जाता है” यह उक्ति हर देश, काल एवं परिस्थिति पर सही-सही चरितार्थ होती रही है लेकिन हाल ही में देश-दुनिया में घटित अनेक घटनाएं संवेदनशील लोगों के लिए अत्यन्त पीड़ादायक हो गई है। जानबूझ कर जिंदा मख्खी निगलना आम […]

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खुद रै बदळ्यां बिना बावळा

खुद रै बदळ्यां बिना बावळा,
राज बदळियां के होसी ।
कंठां सुर किलकार कर्यां बिन,
साज बदळियां के होसी।।

कितरा राज बदळता देख्या,
सीता रै पण कद सौराई।
जनक आपरै वचन जिद्द में,
परणावण री सरत पौलाई।। […]

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