नर लेगो नवकोट रा
मारवाड़ रो इतियास पढां तो एक बात साम्हीं आवै कै मारवाड़ रा चांपावत सरदार सामधर्मी सबसूं ज्यादा रह्या तो विद्रोही पणो ई घणो राखियो यानी रीझ अर खीझ में समवड़। मारवाड़ में चांपावतां नै चख चांपा रै विरद सूं जाणीजै। जिणांनै कवियां आंख्यां री संज्ञा दी है तो बात साव साफ है कै उणां आंख्यां देखी माथै ई पतियारो कियो-
आंख्यां देखी परसराम, कबू न झूठी होय। अर जठै हूती दीठी उठै राज रा सामधर्मी रह्या अर जठै अणहूती दीठी उठै निशंक राज रै खिलाफ तरवारां ताणण में संकोच नीं कियो।[…]