बारहमासा गीत – विरह शृंगार

॥सावन॥
सावन बरसे! सब जन हरसे, झिरमिर बरसे मेह!
बैठे तुम परदेस में प्रियतम, निठुर छोड़ के नेह!!
बूँदों की पाजेब पहनकर, ओढ़ चुनरिया धानी!
करे नवोढ़ा धरती इस रुत, बादल से मनमानी!!
राह तकूँ मैं बैठ अकेली, सूनी सरोवर पाल!
घर आजा परदेसी! तुम बिन, जीना हुआ मुहाल!![…]

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यह मंदिर मंदिर नहिं केवल, यह गौरव सौगात है

 आज प्रफुल्लित अवध धरा है, पूर्ण अधूरे काम हुए पुनः प्रतिष्ठित नव मंदिर में, भारत गौरव राम हुए सदियों की काली अंधियारी, जैसे बीती रात है। यह मंदिर मंदिर नहिं केवल, यह गौरव सौगात है।।01।। आज उल्लसित कण-तृण सारे, स्वयं पधारे रघुनंदन। लेत बलैयां झुकी लताएं, करते पादप अभिनंदन। मधुर मधुर स्वर छेड़ विहंगन, सबका हिय हरखात है। यह मंदिर मंदिर नहिं केवल, यह गौरव सौगात है।।02।। मंदिर की क्या बात राम के, मंदिर हर इक ग्राम मिले। घर घर में मंदिर भारत के, हर मंदिर में राम मिले। हर हिन्दू के स्वाभिमान का, नाता इसके साथ है। यह […]

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ओ कोरोना पाछो आयो

ओ कोरोना पाछो आयो।
टाबरियां मिल ढोल घुरायो।
नव्वीं तक की छुट्टी होगी,
दसवीं वाळां मुँह लटकायो।
निर्देशकजी सिर खुजलायो।
ओ कोरोना पाछो आयो।।01।।[…]

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नाथी का बाड़ा के निमित्त

किसी भी भाषा के मुहावरे एवं कहावतें उस भाषा के सांस्कृतिक इतिहास एवं सामाजिक विकास की कहानी के साक्षी होते हैं। इन कहावतों में उस क्षेत्र के लोगों की मानसिकता भी परिलक्षित होती है। हमारे यहां पुरुष प्रधान मानसिकता हावी रही है अतः बहुधा उसके प्रभाव से कहावतों के निर्माण को देखा समझा जा सकता है। पापां बाई रो राज,  नाथी रो बाड़ो, खाला रो घर, पेमली रा परचा आदि कहावतों के पीछे भी कहीं न कहीं हमारी कुंठाओं का हाथ है।[…]

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चुगलखोर री चावना

सजन सबै संसार नैं, चुगली हंदो चाव।
गजादान चुगली बिना, बंतळ बेरस साव।
बंतळ बेरस साव, हुई बिन हुई हथाई।
भरै पेट में गैस, रंच नहिं रितै रिताई।
निंदा-रस निठतांह, रस-नौका मझधार में।
शोध-बोध-संबोध, सुकवि कहै संसार नैं।।01।।[…]

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अड़वाँ नैं ओळमा

हा रूप रूपळा रूंख रूंख री, डाळी डाळी हेत भरी।
हो हरियो भरियो बाग बाग में, बेल लतावां ही पसरी।
खिलता हा जिणमें फूल, फूल वै रंग रंग रा रळियाणां।
पानां पानां पर पंछीडा, मंडराता रहता मन भाणां।
बो बाग दिनो दिन उजड़ै है, सो कहो कठै फ़रियाद करां।
(म्हे) लिखां ओळमा अड़वाँ नैं, या खुद माळी सूं बात करां।।[…]

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भारत री छत्राणी

थारै मन री बात लाडेसर, म्हारै सूं अणजाणी के।
जे आँख्यां में पाणी ल्याऊं, भारत री छत्राणी के।

कन्त हजारी बाग जेळ में, बेटो जेळ बरेली में।
देवर जी जंगळ में भटकै, गोरा घुसिया हेली में।
जामाता जूझै गोरां सूं, सगळां मन में ठाणी के।
जे आँख्यां में पाणी ल्याऊं, भारत री छत्राणी के।[…]

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बीज अर माटी री बंतळ

जद बीज जमीं में गाडीज्यो,
अंतस अकुलायो दुख पायो।
बचबा रा गेला बंद देख
रोयो घबरायो पछतायो।
तद माटी उण सूं यूं बोली
रे बीज मती ना घबरावै।
जो जुड़ै जमीं सूं जड़ उणरी
कोई पण काट नहीं पावै।[…]

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