काजी ई काजी रैयग्या

अेक समै री बात । पांच मिनख आपोसरी मांय कोई बात पर उळझग्या। जिद बहस रै बिचाळै रीस में रसाण पैदा हुयो। माड़ै दिन रो फेर आयो। अेक जवानड़ै रीस ई रीस में सामलै रै कुजाग्यां दे मारी। देखतां ई देखतां सामलो चित्त। नीचै पड़्यो अर प्राण पंखेरू उडग्यो। आपरै सागलै री मौत देख बाकी च्यारूं धोळा-धप्प हुग्या। च्यारां रा मूंढा जूतां ऊं कूट्योड़ा सा। लागै जाणै बापड़ां रा माइत मरग्या हुवै। पैली जोर-जोर सूं चीख अर गाळ बकणियां अबार निसासां न्हाखै। आप जाणो कै रीस स्याणी घणी हुवै। बा तो लारली गळ्यां भाजगी। अबै च्यारूं अेक-दूजै रै सामी जोवै।[…]

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गीत लाछां माऊ रो

।।गीत – प्रहास साणोर।।
अमर कथ करेवा पैंड जस भरेवा अहो,
समर हर नाम कर काम साचां।
मंडेवा गुमर इम नेसड़ां महिपर
लोवड़धर जचायो जमर लाछां।।1

रतनुवां दैण धिन कीरती रसापर,
धूरतां असा कज मोत धीबी।
आदलग जसा ही रीत रख इल़ा पर
जगत में बसा गी सुजस झीबी।।2[…]

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जसोड़ां रा बूंठा छोड देई

दिन अर दशा हरएक री बदल़ती रैवै, इणी कारण इणनै घिरत-फिरत री छिंयां कैयो गयो है। जिकै जसोड़ कदै ई जैसलमेर में जोरावर होता, जिणां रो राज में घातियो लूण पड़तो पण सगल़ी मिनखां री माया रा प्रताप हा!कृपारामजी खिड़िया सटीक ई लिख्यो है कै-

नरां नखत परवांण, ज्यां ऊभां संकै जगत।
भोजन तपै न भांण, रांवण मरतां राजिया!!

ज्यूं-ज्यूं मिनखां रो तोटो आयो, ज्यूं-ज्यूं जसोड़ पतल़ा पड़िया अर त्यूं-त्यूं उणां रो मरट मिटतो ग्यो।[…]

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वाह रे! अमरा वाह!!

राजस्थान रै इतियास में दो अमरसिंह घणा चावा है। एक अमरसिंह कल्याणमलोत अर दूजा अमरसिंह गजसिंहोत। दोनूं ई राठौड़ अर आपरी आखड़ी पाल़ण रै सारू आज ई अमर है।
अमरसिंह गजसिहोत तो घणो चावो नाम है पण अमरसिंह कल्याणमलोत नै कमती ई लोग जाणै। जदकै ऐ अमरसिंह किणी मायनै में कम नीं हा।
राव कल्याणमल बीकानेर रा सपूत अर महाराजा रायसिंह रा अनुज अमरसिंह स्वाभिमान रो सेहरो अर गुमेज रो गाडो हा। आपरै भाई रै साथै अकबर रै दरबार में उपस्थित हा। मुगल पातसाह अकबर अरगीज्योड़ै राजपूतां पेटै कोई हल़को आखर परोटियो। दरबार में विरोध करण री किणी बीजै री हिम्मत नीं होई जाणै गाडर रै कानै माथै जूती राखी होवै पण ओ वीर अगराज उठियो अर बिनां पातसाह री रजा दरबार छोड घोड़ै जीण कस बारोटियो होयो।[…]

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म्हारी तिणखा इसड़ी राणी

म्हारी तिणखा इसड़ी राणी
(ज्यूं) तातै तवै पडंतो पाणी।

नातो हार-थकेलै वाळो, है कड़वी कैंटीन साथ में।
तणखां रै दिन दांईं नहचै, बिल इणरो आ जाय हाथ में।
उमर, उधारी रीत अेकसी, लीनी जकी पड़ै लौटाणी।।
म्हारी तिणखा इसड़ी राणी
(ज्यूं) तातै तवै पडंतो पाणी।[…]

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दे नादावत भीमड़ा

जोधपुर महाराजा गजसिंह जैड़ा दातार अर वीर हा वैडा ई दातार अर वीर इणां रा केई सामंत ई हा। इणां रै ऐड़ै ई एक दातार सामंत रो नाम हो पड़िहार भीम नादावत। भीम रै विषय में किणी कवि लिखियो है कै ‘सतजुग में बल़ि, द्वापुर में करन अर कल़जुग में विक्रमादित्य रै साथै भोज इण परंपरा नै सहेत टोरी पण हालती बखत में दातारगी री गाडी रा पहियां धसण लागा उण बखत भीम आपरो सबल़ खांधो देय जुतियो–

तिणवार भीम नादा तणो,
धुर जीतो ताडा धमल़।।

जाझीवाल़ रा जागीरदार भीम नादावत, नादै पड़िहार रा बेटा हा। भीम रो मन मोटो हो। कोई किणी वेल़ा आयग्यो तो ई नाकारो नीं कियो।[…]

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गायां तांझी नीं मांझी गी!!

दासोड़ी रै उतरादी कांकड़ रै कड़खै एक मोटो धोरो है, जिणनै गौयर धोरो कैवै। गौयर मतलब गायां रै स्थाई बैठण री जागा। रात री बखत चौमासै में गांम री गायां अठै बैठती अर इण गायां रो ग्वाल़ो मोहर अथवा मेहर जात रो मुसल़मान हो। पैला दासोड़ी में इण जातरै मुसल़मानां रा खासा घर हा।
एक दिन रात री गायां बैठी अर बो सूतो हो कै अचाणचक उणनै लागो कै कोई गायां नै टोर रैयो है। बो हाकल करर उठियो कै उणनै तीन -च्यार जणां पकड़र बांध दियो। उण पड़ियै पड़ियै ई किरल़ी (जोर से किसी को हेला करना या आवाज देना) करी।

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दोय उदैपुर ऊजल़ा!!

उण दिनां उदयपुर माथै महाराणा जगतसिंह राज करै। उदार अर मोटै मन रा राजा। जिणां रै विषय में ओ दूहो घणो चावो है-

पारेवा मोती चुगै,
जगपत रै दरबार!!

एक दिन उणां रो दरबार उमरावां अर कवियां सूं थटाथट भरियो। बात चाली कै ‘आज री बखत महाराणा जगतसिंह री बराबरी रो कोई दातार नीं!! जितै किणी कैयो कै एक है!! उदयपुर छोटा(शेखावाटी) रा धणी टोडरमल!!’
किणी कैयो कै ‘कठै बापड़ो उदयपुरियो अर कठै उदयपुर!! तुलै सोनो अर मींडीजै ईंटां!!’

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भाज गई भेडांह !!

बीकानेर महाराजा दलपतसिंह स्वतंत्र प्रकृति रा पुरूष हा। इणां री इण प्रकृति रो कुफायदो केई लोगां उणां रै कुंवरपदै में उठायो ई हो जिणरै परिणामस्वरूप बाप-बेटे में खटरास ई पड़ियो पण इणां इण बात री कोई घणी गिनर नीं करी।
महाराजा रायसिंह रै सुरगवास पछै ऐ पाट बैठा। इणां नर नानाणै री गत महाराणा प्रताप रै चीले बैतां थकां मुगल़ सत्ता री घणी कद्र नीं करी।
जैड़ोकै आपां सगल़ा जाणां कै इणां रो नानाणै मेवाड़ महाराणा प्रताप रै घरै हो। इणां ई विद्रोह रो झंडो भलांई ऊंचो नीं राखियो पण मेलियो ई नीं!! इणसूं घबराय पातसाह जहांगीर इणांरै विद्रोही भाई महाराज सूरसिंह रो पख लियो अर बीकानेर माथै सेना मेली।[…]

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विश्वासां रै गळै कटारी

जूत्यां में पगथळियां वांरी, कियां कटाणी, आ सीखां।
विश्वासां रै गळै कटारी, कियां चलाणी, आ सीखां।

लज्जा रै चिळतै लूगडि़यै, पैबंदां रै जाळ फंसेड़ी।
(इण) कारी वाळी नैं महतारी, नहीं बताणी, आ सीखां।[…]

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