अम्मा तेरी है क मेरी

आ दुनिया अलबेली है। इणमें बडाबडी रा डेरूं बाजै। अेक सूं अेक उपरला पीर पैदा हुवै। हर मिनख खुद नैं दुनिया रो सबसो स्याणो अर सही आदमी मानै अर दूजोड़ां रै कामां में कमियां निकाळै। खुद री अकल माथै इधको गुमेज राखै। कई बार जाणबूझतां लोग जागतां नैं पगांथियां न्हाखण री असफळ कोसीसां करै। कई बार तो फब ज्यावै पण कई बार खुद रो वार खुद पर भारी पड़ ज्यावै। आपसूं उपरलो उस्ताद मिल्यां आंख्या चरड़-चरड़ खुल ज्यावै। नहलै पर दहलो मारणियां रो घाटो कोनी, इण खातर घणी हुंस्यारी दिखाण सूं पैली आदमी नैं सोचणो जरूर चाईजै।

आपणै अठै घरां मांय सासू अर बहू री छोटी-मोटी खींचताण आम बात मानीजै। सासू अर बहू री खींचताण में दुधारी तलवार रा रगड़का बापड़ै बीं मिनख रै लागै जको अेक रो बेटो अर अेक रो घरधणी है। बो दो पाटां रै बिचाळै पिसीजै। बात घणी बधज्यावै जणां न्यारा-न्यारा होवणो पड़ै। अेकर इयांकलै ई जंजाळ में फंस्योड़ै अेक मोट्यार राड़ आडी बाड़ करण री सोच’र आपरी मा नैं गाम में राखी अर बहू नैं शहर मांय ले आयो। पण न्यारी हुयां पछै ई बहू रै मन में सासू रै प्रति भाव सागण ई रैया। सासू-बहू रै ठीकरी में घाली ई नीं रळै। बहू आपरी सासू नैं सबक सिखावणो चावै।[…]

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वीर मेहा मांगल़िया संबंधी भ्रामक धारणाएं व निराकरण

पाबू हरभू रामदे, मांगल़िया मेहा।
पांचू पीर पधारिया, भड़ गोगा जेहा।।

इस लोक रसना पर अवस्थित दोहे में मध्यकालीन पांच जननायकों के सुयश की सौरभ गांव-गांव, ढाणी-ढाणी में अपनी सुवास लिए आज भी संचरित हो रही है। उल्लेखनीय यह बात है कि गोगाजी, पाबूजी, रामदेवजी, आदि का जहां प्रामाणिक जीवन परिचय यहां की ख्यातों, बातों, लोक काव्य व डिंगल काव्य में उपलब्ध है वहीं मेहाजी मांगलिया का जीवन परिचय बातों, ख्यातों व लोक काव्य में कम ही प्राप्त होता है, परंतु डिंगल काव्य में जरूर मिलता है लेकिन वो भी प्रचुर मात्रा में नहीं। यही कारण है कि इस जननायक के विषय में जितना भी लिखा गया उसमें इनसे संबंधित जानकारी नहीं देकर मेहराज सांखला से संबंधित जानकारी दी जाती रही है। मेहाजी मांगलिया पर लिखने वाले तमाम लेखकों ने कमोबेश आम पाठक के मन मे यह भ्रामक धारण सुदृढ़ करने का काम किया कि मेहराज सांखला ही मेहा मांगलिया के नाम से प्रसिद्ध हुए हैं। मेहाजी मांगलिया अपने समय के उदार क्षत्रिय, वीर पुरुष, और प्रणवीर थे। राजस्थान के महान पांच जननायकों अथवा ‘पंच पीरों’ की अग्र पंक्ति के लोकमान्य नायकों में शुमार हैं, ऐसे में आम पाठक को इनकी सही और प्रामाणिक जानकारी होनी ही चाहिए, इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए इनकी जानकारी देना समीचीन रहेगा।[…]

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भद्रकालिका नाराचवृत्त स्तवनम्

🌺भद्रकालिका स्तवन🌺
।।नाराच वृत्तम्।।
संस्कृत
शवासनी स्मशानवासिनी शिवे, दयानिधे।
अघोरघोर गर्जनी, रता मदे दिगंबरी।
विशाल-व्याल केशिनी, प्रपूजिता मुनिश्वरैः।
महाकपालि! मुण्डमालि! भद्रकालिकां भजे।।१[…]

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हुकम!ओ ई चंदू रो भतीजो है!!

कोई पण जिण रेत में रमै अर जिण कुए सूं काढ पाणी पिवै उणरो असर कदै ई जावै नीं। इणगत रा पुराणा दाखला आपांरी मौखिक बातां अर ख्यातां में पढण अर सुणण नै मिल़ै। ऐड़ी ई एक रेत अर पाणी रै असर री मौखिक कहाणी सुणणनै मिल़ै जिकी आप तक पूगती कर रैयो हूं। ठिरड़ै (पोकरण) रो गाम माड़वो आपरी वीरत अर कीरत रै पाण चारण समाज में ई नीं अपितु दूजै समाजां में चावो रैयो है। इणी धरा माथै हिंगल़ाज सरूपा देवल रो जनम होयो तो देवल सरूपा चंदू माऊ जनमी, जिणरै कोप सूं पोकरण ठाकुर सालमसिंह मरियो-

जमर चंदू थूं जल़ी, तैंसूं कूण त्रिसींग।
पोढी हंदो पाटवी, सोख्यो सालमसींग।
चंदूबाई परचो चावो रे, आयल म्हारै हेलै आव।।
~~जगमालजी मोतीसर

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महा पदारथ लाधो संतो! – गज़ल

महा पदारथ लाधो संतो!
अलख-ब्रह्म आराधो संतो!
मूरख पढ पढ बणिया ग्यानी,
दो आखर इक आधो संतो!
भाव-नगर, री पोल़ पूगिया,
क्यूं नीं तोरण-वांदो संतो?
सबद भाव हांडी धर चूल्है,
मन तांदल़जो रांधो संतो!
सबद-अमर इण जग सोनलिया,[…]

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आप गिनायत हो! नीतर मांगता सो हाजर

कवि अर कविता री कूंत रो अद्भुत प्रसंग

किणी कवि कविता नै संबोधित करतां कविता नै चारणां रैअठै हालण रो सटीक कारण बतायो है, कै चारण प्राकृतिक रूप सूं काव्य रा प्रेमी होवै सो कविता अधूरी है तो पूरी करावैला अर जे पूरी है तो मुक्तकंठ सूं प्रशंसा करेला-

हाल दूहा उण देसड़ै, जठै चारण बसै सुजाण।
करै अधूरा पूरती, पूरां करै बखाण।।

ऐड़ो ई एक काव्य प्रेम रो अजंसजोग प्रसंग है ऊजल़ां रै गुलजी ऊजल़ (गुलाबजी) रो। ठिरड़ै रो गाम ऊजल़ां आपरी साहित्यिक अर सांस्कृतिक विरासत रै पाण चावो रैयो है। मोगड़ा रा संढायच गोपालजी रै तीन बेटा 1रानायजी 2सोढजी 3ऊदलजी (शायद ऊदलजी रो ई नाम ऊजल़जी होवैला) इणी ऊदलजी री वंश परंपरा में लालैजी नोखावत नै गोविंद नारावत ऊजलां गाम सांसण इनायत कियो। इणी गौरवशाली वंश परंपरा में[…]

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ओल़्यू

बालमजी नें जाय कहिजो रे आवो म्हारै देस!
ओल़्यू थांरी आवे म्हानैं रे छोडो परदेस!!

बागां में कोयल बोले रे, भँवरा भटकेह!
पण थां बिन पुरी प्रथमी रे, खाविंद खटकेह!!
एकर अरजी म्हानौ मारी रे छोडो परदेस रे थें छोडो परदेस!
बालमजी नें जाय कहिजो रे आवो म्हारे देस![…]

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जैतो-कूंपो, मरग्या कै जीवै!!? (जनता रै अद्भुत विश्वास री कहाणी)

मारवाड़ नर-नाहरां री खाण रैयो है। एक सूं एक सूरवीर, सधीर, अर गंभीर नर पुंगव अठै जनमियां, जिणां रै पाण ओ कैताणो चावो होयो कै ‘मारवाड़ नर नीपजै, नारी जैसलमेर।’ राव रिड़मलजी री ऊजल कुल़ परंपरा में बगड़ी री बांकी धरा रा सपूत जैतो अर कूंपो आपरै अदम्य आपाण (साहस) निडरता, देशभक्ति, स्वामीभक्ति अर उदारता रै ताण मुलक में जिको माण पायो बो अपणै आप मे अतोल है। राव रिड़मलजी रै मोटै बेटे अखैजी रै बेटे पंचायण रै घरै जैता रो अर छोटे बेटे महराज रै घरै कूंपा रो जनम होयो। जद कूंपो 11वर्षां रो हो जद वि.सं.1570 में गायां रै हेत महावीर महराज रणखेत रैयो, जिणरी साख रा डिंगल़ में गीत उपलब्ध है। कवि भरमसूरजी रतनू लिखै कै पांडव श्रेष्ठ किसन रै अंतेवर (जनाना) री रुखाल़ी नीं कर सकियो अर मरण सूं डरग्यो जदकै गायां री रुखाल़ी सारु महावीर महराज वीरगति वरी-

पांडव मरै न सकियो भिड़ि भुंई, रूकै चढै मुवौ राठौड़।
किसन तणी अंतेवरि कारणि, महिर धेन काज कुल़ मौड़।।[…]

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महादेवी देवलजी रो गीत

।।गीत प्रहास साणोर।।
भलै सोढवत धरै तूं अवतरी माड भू
साच मन ईहगां वाच सेवी
वीरी तणै उदर रमी तूं बीसहथ
देवला रूप हिंगल़ाज देवी१
साहल़ां सांभल़ै बधारै संतजन
देव जस जगत मे लियै दाढा
ऊजल़ा संढायच किया कुल़ ऊपनी
ऊजल़ा नांनाणै किया आढा२
मोद तो ऊपरै करै इल़ माड़वो
सोढ री ऐल़ ओलाद सारी
चाढियो नीर चहुं पखां कुल़ चारणी
धिनो बण मानवी देह धारी३[…]

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सांस्कृतिक संबंधां रो साकार सरूप ठाकुर नाहरसिंहजी जसोल

राजस्थानी रा सिरै कवि रायसिंहजी सांदू मिरगैसर आपरी रचना “मोतिया रा सोरठा” में ओ सोरठो जिण महामनां नै दीठगत राखर लिखियो उणां में नाहरसिंहजी हर दीठ सूं खरा उतरै-

राखै द्वेष न राग, भाखै नह जीबां बुरो।
दरसण करतां दाग, मिटै जनम रा मोतिया।।

किणी मध्यकालीन कवि ठाकुर सुरतसिंह री उदार मानसिकता नै सरावतां कितो सटीक लिखियो हो-

सुरतै जिसै सपूत, दिस दिस मे हिक हिक हुवै।
चारण नै रजपूत, जूना हुवै न च्यारजुग।।

आज जद आपां नाहरसिंहजी जसोल नै देखां तो बिनां किणी लाग लपट उण मध्यकालीैन क्षत्रिय मनीषियां री बातां अर अंजसजोग काव्य ओल़ियां याद आ जावै जिकी इणां चारण कवियां री स्वामी भक्ति, सदाचरण, साहित्य रै प्रति समर्पण, सांस्कृतिक चेतना, सत्य रो समर्थन साच कैवण रो साहस अर सही सलाह रै उदात्त गुणां नै देखर कैयी।[…]

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