शहीद प्रभू सिंह राठौड़ नें श्रध्धांजली

अड़यो ओनाड़ वो आतंक सूं सिंवाड़ै
मौद सूं फूल नह कवच मायो।
अमर कर नाम अखियात इण इळा पर
अमरपुर सिधायो चंदजायो।।

प्रभू नै पियारो होयग्यो प्रभुसिंह
सोयग्यो चुका कर कर्ज सारो।
मौयग्यो मरद वो हिन्द री भोम नै
तनक में खोयग्यो चंद-तारो।।[…]

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सच है वो समंदर के

🍀गज़ल🍀
सच है वो समंदर के अंदर नहीं गया है।
आँखों से खौफ का पर मंजर नहीं गया है।।
हाँ उसको मारने की, दी थीं सुपारियाँ पर,
कातिल ही वार करके खंजर नहीं गया है।।
सरसब्ज खेत आते हों राह अब भले ही,
यादों से वो पुराना, बंजर नहीं गया.है।[…]

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याकूब आमीर के तरही मिसरे पर गज़ल

आप से रोशन हुई राहें सभी चारों तरफ।
अब न भटकेगी मिरी आवारगी चारों तरफ॥
चांद, तारों, बादलों, फूलों, बहारों में जरा,
ढूंढले बिखरी पडी है शायरी चारों तरफ॥
कौन यह आया कि सहरां भी गुलिस्तां हो गया,
जिसकी आहट नें करी जादूगरी चारों तरफ॥[…]

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माता

प्रेम को नेम निभाय अलौकिक,
नेम सों प्रेम सिखावती माता।
त्याग हुते अनुराग को सींचत,
त्याग पे भाग सरावती माता।
जीवन जंग को ढंग से जीत के,
नीत की रीत निभावती माता।
भाग बड़े गजराज सपूत के,
कंठ लगा दुलरावती माता।।1।।[…]

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साम्हो लड़्यो शैतान

बाणासर री वीर भू, मरटधारी नर मान।
दीठो जग सह दाखलो, सांप्रत जदु शैतान!!1
पाधर पग रोप्या सुपह, सज धर राखण शान।
चीन -हीण दल़ चींथिया, सज रण सूर शैतान।।2
आडा नित उतराध रै, जाडा धिन जदुरान।
एकर कथ पाछी अवस, साच करी शैतान!!3
आडा रह्या कपाट इम, अरि दल़ थँभण अचान।
पुनि कहावत रोप पग, सच रण रचि शैतान!!4[…]

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धिन्न विशणु प्रगट्यो धरा

धिन्न विशणु प्रगट्यो धरा, देव मिनख री देह।
जंभ नाम जग जाणियो, गुणधर लोहट गेह।।१
गौ भगती कीधी गहर, अहर निसा कर आप।
महर करी नैं मोचिया, पींपासर में पाप।।२
समराथल़ तपियो समथ, धोरै ऊजल़ धिन्न।
अन्न जल़ दियो अहर निस, भूखां नैं भगवन्न।।३
ग्यान नदी खल़की गहन, नित उपदेस नवल्ल।
पसरी चहुंदिस पहुम पर, गुरु जंभै री गल्ल।।४[…]

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किनियाणी करनल्ल!!

पाप हरण जग जणण पुनि, दरण दूठ दाकल्ल।
करण काज दुख काटणी, किनियाणी करनल्ल!!1
धिन जंगल राखी धरा, सात्रव सारा सल्ल।
मंगल़ करणी मावडी, किनियाणी करनल्ल!!2
अहर निसा रख महर इम, गहर रखी धर गल्ल।
आवै हेलै आध सूं, किनियाणी करनल्ल!!3
परी करै पातक सबै, हरि चढ आवै हल्ल।
धरि आपरां ध्यान धुर, किनियाणी करनल्ल!!4[…]

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नैणां उडगी नींद

लूट लूट घण लालची, भरिया भ्रष्ट भँडार।
लेखै धन लाली गयो, हिरदै हाहाकार!!1
काल़ी कर करतूतियां, धुर घर सँचियो धन्न।
सो तो हुयग्यो धूड़ सम, हुई सो जाणै मन्न!!2
वीसलदे ज्यूं बावल़ां, ऊंडो धरियो आथ।
खायो नकोज खरचियो, विटल़ां रखी न बात!!3
कण घण सँचिया कीड़ियां, खट चुग तीतर खाय।
पापी वाल़ो पेखलो, जर तो परल़ै जाय!!4[…]

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ज्यूं-ज्यूं लाय लपरका मारे!!

500-1000 के पुराने नोटों के नहीं चलन की घोषणा के बाद मजदूरों, व अध्यापकों के सिवाय सभी जगह मायूसी छाई नजर आ रही है। आजसे पहले जब धन या धनवानों पर अध्यापकों की दृष्टि जाती तो वे भी झिझक महसूस करते थे कि काश हम भी इनके रिस्तेदार या रिस्तेदारी में होते तो कितना अच्छा रहता ! लेकिन जैसे ही मोदीजी ने कहा कि कोयलों की दलाली करने वालों के हाथ ही नहीं, मुंह भी काला होगा !! तो इस वर्ग ने बड़ी राहत महसूस की और मन ही मन में कहा कि भई हम तो ‘घणो खावां न को कुवेल़ा जावां।’ घाटा भी सुखदायक और आनंदित करने वाला होता है इसका अहसास माननीय मोदीजी ने करवाकर मजदूरों व अध्यापकों में जोश का संचार कर दिया। […]

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बदळण रो हेलो कर बेली

तन भूखो अर मन उदियासू,
जीवण धारा डंक डसेली।
समय शंख में मंत्र फूंक अब,
बदळण रो हेलो कर बेली।।

जनशोषक सत्ता गळियारा,
जनगण मंगळ यूं गावै है।
शेषनाग री बांबी जाणै,
इमरत रो घट ढुळकावै है।
जनपथ सूळ, धूळ जन आंख्यां,
सपनां में जहरल गुळ भेली।
समय शंख में मंत्र फूंक अब,
बदळण रो हेलो कर बेली।।01।।

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