घी ढूळ्यो तो ई मूंगां मांहीं
आपणै राजस्थानी लोकजीवण मांय अेक कैबत चालै कै “घी ढूळ्यो तो ई मूंगां मांहीं”। इणरो प्रयोग साधारण रूप सूं उण ठौड़ करीजै जठै आपणै कोई नुकसाण हुवै पण उण नुकसाण सूं आपांनैं घणो धोखो कोनी हुवै क्यूंकै आपणै नुकसाण सूं कोई आपणै ई खास आदमी नैं फायदो हुवै जणां उण नुकसाण री मनोमन भरपाई करल्यां। जियां कोई लावणो बांटण आवै अर बडै भाई री ठौड़ छोटकियै भाई रै घरै लावणो देज्यावै। पछै जद ठा पड़ै तो कईजै कै कोई बात नीं घी ढूळ्यो तो मूंगां मांहीं।[…]
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