ओपै सूं रूठै ! बो म्हांरै सूं रूठै! अर म्हांरै सूं रूठै उण सूं सिरोही रूठै

कवि विश्वास अर सम्मान रो एक ऊजल़ो प्रेरक प्रसंग ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ सिरोही माथै वैरीसाल देवड़ा राज करै। उण रो एक सिरदार चांदो देवड़ो उण सूं रीसाय बारोटियो होयग्यो। सिरोही में घणा उजाड़ किया पण बख में नीं आयो। चांदो अपरबली । उण सूं कुण बाथां आवै – चांदा चोरंगवार उरल़ां बगलां ऊबड़ै। अरजण रो अवतार दुसासण तूं देवड़ा।। छेवट वैरीसाल दरबार बुलाय उमरावां सूं सलाह करी कै चांदै नैं कीकर वश में कियो जावै। उमरावां सलाह दीनी कै आप पेशवा रा आढा ओपाजी नैं चांदै कन्नै मेलो। बो इणां नै ओपो भाई कैय बतल़ावै सो हरगिज ई ओपैजी नैं नट नीं […]

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जा रै डोफा चाखू कोट रो ई कोजो लगायो !

आधुनिक सोच राखणिया अर सामंती जीवण मूल्यां सूं अजाण लोग आपरी मूंछ ऊंची राखण सारु जिण भांत सामंतवाद नैं भूंडै उणां नैं शायद जमीनी धरातल़ रो लेस मात्र ई ज्ञान नीं है या उणां किताबां सूं ओ ई ज्ञान पायो है कै उणकाल़ अर उण शासकां नैं विगोवो। ओ ई कारण है कै ऐड़ै लोगां नैं बै ठाकुर शोषक, क्रूर अमानवीय व्यवहार वाल़ा अर प्रजा रै सारु राकस रै समरूप निगै आवै। पण एक दो नै छोड र बाकी रा शासक दिल रा दरियाव, मिनखपणै सूं मंडित अर दया री प्रतिमूर्त हा। ऐड़ो ई एक किस्सो आप री निजर कर […]

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कीरत रै खातर कवि सूं कोरड़ा खाया

कवि अर कविता री कूंत रा मध्यकालीन उदाहरण आज ई बेजोड़ है। ऐड़ो ई एक उदाहरण है कणवाई रा ठाकुर खंगारसिंह लाडखानी अर मूंजासर रा बीठू उदयरामजी रो। उदयरामजी अमल रा जितरा मोटा बंधाणी। उतरा ई मोटा कवि। घण जोड़ै कवि रै रूप उदयरामजी री ख्याति चौताल़ै चावी। घूमता घूमता एकर कणवाई पूगा। कणवाई रा ठाकुर खंगारसिंह कविता रा कद्रदान अर कवियां रा गुणग्राहक। उदयरामजी ठिकाणै आयां ठाकुर साहब रो मन राजी होयो। जोरदार हथाई जची। इतिहास अर साहित्य री सरस चर्चा चाली। रात रा कवि विश्राम करण सोया। आधीक रात रा डोकरै रै होकै री बायड़ उठी। अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम। वाल़ी बात डोकरै रै आधी रात रो कुण होको भरै। हाजरिया जाय सूता। डोकरै सूतै-सूतै ई हाजरियै नैं हेलो कियो पण आधी रात रा नींद में गैल़ीजिया हाजरिया किणरी गिनर करै! उणां कवि नै कोई पूगतो जवाब नीं दियो। कवि रो हेलो रावल़ै पोढिया ठाकुर साहब रै कानां पड़ियो।[…]

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आसू रो तो घर है !

आसू रो तो घर है ! चारण अर राजपूतां रा संबंध कितरा प्रगाढ हा, इणरो एक उदाहरण आपनै देवूं। लगै-टगै आजादी रै आवण री बगत रै आसै- पासै रो किस्सो है। जोधपुर अर बीकानेर री सीमाड़ै रूपावतां रो एक ठीकाणो हो ऊदट। उण दिनां ऊदट ठाकुर हा अमरसिंह।अमरसिंह चोखल़ै चावा। उणां रै मिनखपणै री घणी बातां चावी। उणां तीन ब्याव किया पण जोग सूं टाबर नीं होयो। चोथो ब्याव उणां भाटियां में कियो। ठाकुर जितरा ई उदार ठकराणीसा उतरा ई मन रा माठा। ऊदट ठिकाणै में दासोड़ी रा रतनू आसूदान रैवता। कंवारा हा सो नीं कोई जावण रो कैवणियो अर नीं […]

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मजूरण

मजूरण रै उणियारै में प्रतख दीखतो उण विधाता रो रूप जिकै इण जग नैं रचियो पण अरपण कीधो बीजां नैं। अरे! इणी विध इण भुजां रै आपाण कई घड़िया सतखंडिया आभै सूं अड़िया बे महल जिणां रै सिरजण में समरपण कीधो इण जीवण आपरो जोबन सारो विसरी ममता मिसरी सी छिटकाया हांचल़ रा फूल उजाड़्यो घर बिगाड़्यो कारज फगत इणां री नीव सीसै री करण नैं! पण ! ऐ सदियां सूं नुगरा साथी स्वारथ रा कद पाल़ै हा प्रीत पूरबल़ी जद आ सांझ सवार रै जांदां सूं आंती मार्योड़ी मांदगी रै हाथां लड़खड़ाती बूढापै री फेट सूं भूख सूं बाथेड़ा […]

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डांग अर डोको

कांई कैयो आप
आपरै कन्नै डांग है !
बा ई बंध्यां वाल़ी
नींगल़्योड़ी!
पण किणरै सारु
बता सको हो आप ?
म्हनै तो लागै है
इण डोकै रै आगै
आपरी डांग बापड़ी है
निजोरी है।
आप ई जाणो हो आ बात ! […]

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पतियारो

कुड़कै में फसियोड़ो
धसियोड़ो धरती में
हांफल़तो
झांफल़ा खावतो सो
आकल़ -बाकल़ सो
तड़फड़तो सो लागै पतियारो।
अणसैंधौ
अणखाणो सो
अणसुल़झ्यो […]

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मायड भाषा ने मिळै

मायड भासा ने मिळे, राज मानता राज।
औ अरजी है आप नें, मेहाई महराज।।७२१
डिंगळ डिगती डोकरी, थां बैठां किण काज।
मायड दीजो मानता, मेहाई महराज।।७२२
डिंगळ री डणकार रा, बोल्या सब कविराज।
मायड दीजो मानता, मेहाई महराज।।७२३
डिंगळ डिगती डोकरी, थारै हाथां लाज।
मायड दीजो मानता, मेहाई महराज।।७२४[…]

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दसमहाविधामयी मेहाई वंदना

धारी सिर जिण धाबळी, कंकण वळे करां ज।
झणण पद शुभ झांझरां, मेहाई महराज।।६८५
माळा फेरत मावडी, मढ बैठ’र रिधुराज।
रात दिवस हिरदै बसो, मेहाई महराज।।६८६
सिंदुर चरचित भाळ शुभ, हेम हार गळ राज।
मालक मां देशांणमढ, मेहाई महराज।।६८७
काळी प्हैरी कांचळी, बिछिया पग रिधु राज।
कर त्रिशूळ किनियांण रे, मेहाई महराज।।६८८[…]

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