नवरूप नाम माल़ा
।।छंद – त्रिभंगी।।
आयल इल़ आई मामड़याई सातूं बाई सुरराई,
समंदर सुखाई उदर समाई संत सहाई सुखदाई।
पह माड पुजाई थान थपाई दुष्ट दबाई कीध दमै,
बीसांहथ वाल़ी बुड्ढी बाल़ी हेतव वाल़ी भीर हमै।।१।।[…]
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।।छंद – त्रिभंगी।।
आयल इल़ आई मामड़याई सातूं बाई सुरराई,
समंदर सुखाई उदर समाई संत सहाई सुखदाई।
पह माड पुजाई थान थपाई दुष्ट दबाई कीध दमै,
बीसांहथ वाल़ी बुड्ढी बाल़ी हेतव वाल़ी भीर हमै।।१।।[…]
गीत-प्रहास साणोर
करो बात नै सार इम धार नै कवियणां,साचरी चारणां कोम संभल़ो।
भूत रे भरोसै रेवसो भरम मे, बगत री मांग रे साथ बदल़ो।।१
पढावो पूत रु धीवड़्यां प्रेम सूं, रीत धर चारणां जदै रैसी।
निडरपण उरां मे बहो मग नीत पर, कोम री कीरती जगत कैसी।।२
सजो इक धार ने संगठन साबता, भूल सूं बुरी मत बात भाल़ो।
समै रै सामनै सजो मजबूत मन, टेम सूं करो मत आंख टाल़ो।।३[…]
लाख असी चव जोणिय मांझल जाणिय मानव श्रेष्ठ जमारो।
धीर विवेक तुला पर तोल अमोल सतोल सुबोल उचारो।
तारण या भवसागर सों गजराज न दीखत और सहारो।
बार हि बार उचार अलौकिक अम्ब सुनाम उबारण वारो।।1।।[…]
।।गीत सोहणो।।
ओ सच की देख जमानो आयो, जो मिनखां तो मून झली।
सून मिल़ी चवड़ै सिटल़ां नै, भू विटल़ां री बात भली।।१
मिनखाचार रखै सो मूरख, गेडछाप अह बजै गुणी।
पितलज जिकै पूजीजै पेखो, सतवाद्यां री काट सुणी।।२
बहुमत हुवो बापड़ो बेखो, बल़ बाहू नै लोग वदै।
बुध बल़ री बात करै बावल़िया, कावल़िया लठ गिणै कदै।।३[…]
।।छंद – रेंणकी।।
परमारां कोम भोम पींपासर, काट पाप निकल़ंक करी।
घणनामी रीझ आय लोहट घर, धर उण पावन देह धरी।
हंसा री गोद रम्यो कर हर हर, भू तर तर विसवास भयो
जगदीसर रूप नमो जग जाहर, जंभेसर गुरु नाम जयो।।१[…]
भाव कथे हर भाख में,उर रा घणे उमंग।
कवि सुरसत कंठाभरण,रंग रे दुहा रंग॥1
ब्रज भासा डिंगळ तथा,गुर्जर भासा गंग।
उत्तर भारत रा अजब,दुहा छंद ने रंग॥2
नवरस री नव कल्पना,सरस उकति रे संग।
कल्पक रा कविता कथन,रंग रे दुहा रंग॥3 […]
१९ वें सईके रै पूर्वार्द्ध में टेलगिरीजी महाराज हुया। दसनामी संप्रदाय रै बाबै टेलगिरीजी दासोड़ी में तपस्या करी। बाबै रै केई चमत्कारां री बातां लोक में प्रचलित है। बाबै दासोड़ी गांव में जीवित समाधि लीनी। बाबै रै लोक प्रचलित चमत्कारां माथै एक सांगोपांग किताब लिखी जा सकै। दासोड़ी अर आसै- पासै रै इलाके में बाबै रै प्रति घणी आस्था है। घणै समय पैला म्है एक छंद रचियो। हालांकि ओ छंद प्रकाशित है पण आपरी सेवा में इण खातर मेल रैयो हूं कै टेलगिरीजीै जैड़ै त्यागी अर तपस्वी रै नाम सूं आपरी ओल़खाण हो सकै- […]
» Read more।।छंद-त्रिभंगी।।
केसर नखराळी, अस वा काळी, जींद निहाळी, जोराळी।
आयो हठियाळी, बैय उंताळी, मांगी जाळी, मतवाळी।।
मीसण मछराळी, रूठ रढाळी, नहीं संभाळी, गल सारी।
पाबू पणधारी, भू पर भारी, वीरत थारी, बळिहारी।।1
सतवट बातां, धर सारी।।[…]
कुंझडियां परदेसियां,आवै अर उड जाय।
साच नेह सफरी तणो,जळ भेळी सूखाय॥1
पावस मास विदेस पिव,जळूं विरह री झाळ।
थूं कुरजां बरसात में,भींजै सरवर पाळ॥2
कुरजां थारी पांख पर,आखर लिखूं अथाह।
बालम नें बंचाय दे,बिरहण मन री आह॥3 […]
🌺मननें तुझको पा लिया🌺
जब तू धावा बोलती, पलकों की जागीर।
तब तब मैंने थामली, हाथ-कलम-शमसीर॥1
जब तू मुझ पर पीर का, डाले सखी अबीर।
तब मन बनता राधिका,-कान्हा ,रांझा -हीर॥2
जब तू मुझपर नेह की,करे सखी बौछार।
तब उर गोमुख से बही,कल-कल कविता-धार॥3 […]