स्वामी गणेशपुरी कृत सूर्यमल्ल स्तुति

।।भाषा गुरु मिश्रण चारण सूर्यमल्ल स्तुति।।
।।मनोहर छंद।।
मित्र सनमान, सत्यवान, स्वर ज्ञान मध्य,
इक्क न समान, कहौं का सम करेरो में?।।
प्राकृत, पिसाची, सौरसेनि, अपभ्रंस पूर्न,
होसु हैं न, ह्वैं न हर हायन लौं हेरो मैं।।
देख्यो मुहि दीन विद्या दीन्ह त्यौं विवेक दीन्ह,
दिग्घ बर दीन्ह, घन आनंद को घेरो मैं।।
बारन बदन बर चारन बरन बीच,
तारन तरन रविमल्ल चर्न चेरो मैं।। […]

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छंद करनीजी रा – कवि गंगारामजी बोगसा

छंद करनीजी रा-गंगारामजी बोगसा रा कहिया 

देवी डाढाल़ीह, काछेली हेलो कियां।
आवै उंताल़ीह, व्रन रुखाल़ी वीसहथ।।

।।छंद।।
बोत विरोध विचार अकब्बर
नीच अनीत करी अनियाई।
भामण तेड़ लही छल़ भीतर
हिंदूस्थान म्रजाद हटाई।
साहल़ भूप पीथल्ल की सांभल़
एकण साद तणै पुल़ आई
वीसहथी करनी व्रन वाहर म्हांरीय साय करो महमाई।।१[…]

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सोनल स्तवन – अजय दान जी लखाजी रोहडिया

🌺छंद -रेणकी🌺
चारण प्रिय पर्म धर्म जब तज कर, करन कर्म प्रतिकूल लगे।
कारण इन कु-मन सुमन भय दिन दिन,दया दान सब दूर भगे।
मारन मद मोह ताहि मय तन्मय, यह लख नवलख चिंत्य करम।
करनल दुःख दूर करन सोय दारूण, धर पर सोनल रूप धरम्॥1

निरमल मति अंग गंग सम उज्जवल ,वचन वारि अघ ओघ दलम।
निश्छल जिहि कान पान कर खल दल, काल व्याल तें तुरत टलम।
अविचल गति गहन सरल चित अविरल,हरि हर जो गुणगान करम।
करनल दुःख दूर करन सोय दारूण, धर पर सोनल रूप धरम्॥2[…]

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सोनल स्तुति – अजय दान लखाजी रोहडिया

।।मत्तगयंद सवैया।।
आज परे हम पे दुःख दारुण , लाज तजी निज काज सँवारे।
देव कहाय, भये पर दानव, मानव के सद् गुण बिसारे।
काह कहें न कह्यो कछु जायजु, है सबही विधि हिम्मत हारे।
सोनल मात सहाय करो हम पापी तथापि है पुत्र तिहारे।।1

फैल फितूर मे फूल रहै अरु, भूल अतूल भरे हम भारे।
खेलत खेल खुले खल सों मिल, ऐसे है हाल हवाल हमारे।
काल कराल के गाल में कालहि, जावनों पें न जराहि बिचारे।
सोनल मात सहाय करो हम पापी तथापि है पुत्र तिहारे।।2[…]

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श्री सिध्धेश्र्वरा महादेव स्तुति

।।छंद त्रिभंगी।।
समरत जेहि शेषा, दिपत सुरेशा, पुत्र गुणेशा, निज प्यारा।
ब्रह्मांड प्रवेशा, प्रसिध्ध परेशा, अजर उमेशा, उघ्धारा।।
बेहद नरवेसा, क्रत सिर केशा, टलत अशेषा, अधरेशा।
जयदेव सिध्धेशा, हरन कलेशा, मगन हमेशा, माहेशा।।1।।[…]

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करणी जी रो गीत

गीत – सपाखरु

वेदां वरन्नी आलोकां भेदां तुळज्जा तरन्नी बाळा,
रंगी शूळ तोकां ओकां भरन्नी रगत्त।
अधोकां राकेश शीश धरन्नी धरन्नी ईस,
सरन्नी त्रिलोकां नमो करन्नी शगत्त॥1॥

आभा निलै नूर छाजै नवीनां मयंक वाळी,
छीनां लंक वाळी वाजै घंटका छुद्राळ।
जुगां वाळी देहा री पै वेहा री अनुजा जयो,
मेहा री तनुजा जयो घंटाळी मुद्गाळ॥2॥

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आवडजी रो चित्त इलोळ गीत

।आवडजी रो चित्त इलोळ गीत।
उमा रुप अनूप अवनि, आवडां लखि आदि।
बरण चारण जलम बाढी,आप किरती अनादि।
तौ अन्नादि जी अन्नादि अंबा अवतरी अन्नादि॥1॥
तौ धन्य जैसलमेर धरती,ग्राम चाळक गण्य।
साहुआं शाख तणो सुरज,मामडो कवि मन्य।
तौ धन्य हो जी धन्य,धारी देह उण धर धन्य॥2 […]

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प्रेमहि के नहिं जाति रु पांतिहु – चाळकदान रतनू ‘मोड़ी चारणान’

प्रेमहि के नहिं जाति रु पांतिहु, प्रेमहि के दिन राति न पेखो।
प्रेमहि के नहिं जंत्र रु मंत्रपि, प्रेमहि के नहिं तंत्र परेखो।
प्रेमहि के नहिं रंग रु रूपहि, प्रेम के रंक न भूप नरेखो।
प्रेमहि को अद्भुत्त प्रकार स लोह रु पारस सों लख लेखो।। […]

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माताजी रा आवाहण रा चाडाउ छंद

।छंद : नाराच।

चंडी सुभद्र सद्र अद्र आसणं चडी चडी।
भुजाक डाक डैरवां वडां वडां वडां वडी।
करे हुंकार वार वार दाणवां डकारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥1॥

नहीं सो माय बाप आप तैं ज आप ऊपणी।
सुसावित्री उमां रमां शचि अनूप रुपणी।
धिनो प्रचंड खंड मै अखंड जोत धारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥2॥ […]

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आवाहण गीत

गोखां गिरनार हुंत गज गामण,
कामणराय आप शिव कामण,
जवाळामुखी आव जग जामण
संकट हरण महा सुर सामण॥1॥

धवळ गिरे सौधे धिणयाणी.
सिहलदीप हूंतां सूर राणी
कामरु देश कमख्य कहाणी
करि छोरु उपर किनीयाणी ॥2 […]

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