स्वामी गणेशपुरी कृत सूर्यमल्ल स्तुति
।।भाषा गुरु मिश्रण चारण सूर्यमल्ल स्तुति।।
।।मनोहर छंद।।
मित्र सनमान, सत्यवान, स्वर ज्ञान मध्य,
इक्क न समान, कहौं का सम करेरो में?।।
प्राकृत, पिसाची, सौरसेनि, अपभ्रंस पूर्न,
होसु हैं न, ह्वैं न हर हायन लौं हेरो मैं।।
देख्यो मुहि दीन विद्या दीन्ह त्यौं विवेक दीन्ह,
दिग्घ बर दीन्ह, घन आनंद को घेरो मैं।।
बारन बदन बर चारन बरन बीच,
तारन तरन रविमल्ल चर्न चेरो मैं।। […]