सबसूं है मोहन सिरमोड़ !
गीत – वेलियो
मोहन बल़ तणी बात आ महियल़,
लखियो नकूं कोई लवलेश।
डिगतो बह्यो डांग कल़ डोकर,
अधपतियां करियो आदेश।।1
बीजो बुद्ध अवतरियो बसुधा,
अहिंसा तणो उपासक आप।
गुणधर पांण विनाशक गोरां,
पराधीनता काटण पाप।।2[…]
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गीत – वेलियो
मोहन बल़ तणी बात आ महियल़,
लखियो नकूं कोई लवलेश।
डिगतो बह्यो डांग कल़ डोकर,
अधपतियां करियो आदेश।।1
बीजो बुद्ध अवतरियो बसुधा,
अहिंसा तणो उपासक आप।
गुणधर पांण विनाशक गोरां,
पराधीनता काटण पाप।।2[…]
सामधरम रो सेहरो, मातभोम रो मांण।
आसै रै घर ऊगियो, भलहल़ दुरगो भांण।।1
आभ मरूधर आस घर, ऊगो अरक उजास।
जस किरणां फैली जगत, दाटक दुरगादास।।2
नर-समंद मुरधर नमो, इल़ पर बात अतोल।
रैणायर दुरगो रतन, आसै घरै अमोल।।3
चनण तर दुरगो चवां, सुज धर पसर सुवास।
निमल़ कियो घर नींब रो, सूरै सालावास।।4[…]
।।छन्द – भुजंगी।।
कया वैण सो काळवीं क्यों न केनों,
धरा भूप ले जावंत बाल धेनों।
महा दुष्ट खींची गयो मांह मोड़ै,
जबे पाल घोड़ी मांगी हाथ जोड़ै।।१।।
द्यों काळवीं मुज्झ नों बैण दीजै,
करै वाहरु धेन रा बोल कीजै।
भणै अम पाबू सुणो हो भवानी,
ममु वेण दीजै तमों साच मानी।।२।।[…]
स्वाभिमान अर हूंस आजरै जमाने में तो फखत कैवण अर सुणण रा ईज शब्द रैयग्या। इण जमाने में इण दो शब्दां नै लोग जितरा सस्ता अर हल़का परोटै, उणसूं लागै ई नीं कै कदै, ई शब्दां रा साकार रूप इण धर माथै हा। आज स्वाभिमान अर हूंस राखणा तो अल़गा, इण शब्दां री बात करणियां नै ई लोग गैलसफा कै झाऊ समझै। पण कदै ई धर माथै ऐड़ा मिनख ई रैवता जिकै स्वाभिमान री रुखाल़ी सारू प्राण दे सकता हा पण स्वाभिमान नै तिल मात्र ई नीं डिगण देता। कट सकता हा पण झुक नीं सकता। ‘मरणा कबूल पण दूध-दल़ियो नीं खाणा।’ यूं तो ऐड़ै केई नर-नाहरां रा नाम स्वाभिमान री ओल़ में हरोल़ है पण ‘सांवतसिंह झोकाई’ री बात मुजब ‘मांटियां रो मांटी अर बचकोक ऊपर’ री गत महावीर बलूजी(बलभद्र) चांपावत रो नाम अंजसजोग है।[…]
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तुंवर मो तारेह, आंख सुधारै ईसवर।
थेटू श्रण थारेह, रैणव वसिया रांमदै।।१।।
तै दीधा कर तोय, पीळा आखा पातसा।
सिंढायच कुळ सोय, आदू शरणै आपरै।।२।।
परी मटाडै पीड, दे जोती आंखां दुरस।
भांणव पडतां भीड, आव मदत अजमाल रा।।३।।
तुं साचौ किरतार, दुःख मेटण प्रगट्यौ दुनि।
वीगरी कर वार, अबखी पुळ अजमाल रा।।४।।
वीदग बारंबार, करुणानिधि वीणत करै।
तार किसन अवतार, मात पिता तु रामदे।।५।।[…]
आय वस्यौ अजमाल, कासमीर मारूधरा।
भला चौधरी भाल़, मलीनाथ रा राज में।।१
कासमीर में छोड़िया, जंह गाडा अजमाल।
गाडाथल़ वाजै जगा, जाणै सगल़ा हाल।।२
पुत्र कामना पूर, जद वापी अजमाल रै।
झलियौ नेम जरूर, दरसण करवा द्वारका।।३
साधू रै उपदेस, कीधी सेवा किसन री,
पुत्र दियौ परमेस, वीरमदे रै नांम रौ।४
अरज करी अजमाल, कांनूड़ौ जनमै कंवर।
देखै भाव दयाल़, प्रगट्या उण घर पाल़णै।।५[…]
(गोपाल़सिंह जी खरवा नै समर्पित)
।।दूहा।।
मुरधर चावो नरसमँद, बात जगत विखियात।
नखतधारी नर निपजिया, रसा उजाल़ण रात।।1
समै सार के सूरमा, हुवा इयै धर हेर।
जस नै ज्यां तो जोरबल़, घाल्यो घर में घेर।।3[…]
कांई तेजो जाट इणी धरा रो सपूत हो?
सुणण में तो आ ई आवै
पण मनण में नीं आवै।
आवै ई कीकर
वो मिनख हो
कै बजराग!
जिको मोत सूं मिलण
चार पाऊंडा
साम्हो गयो।[…]
।।महाराणा प्रताप नै।।
।।छप्पय।।
मिहिर ऊग मा’राण, तिमिर दल़ अकबर तोड़्यो।
करां झाल किरपांण, माण मानै रो मोड़यो।
वन जमियो वनराव, भाव आजादी भूखो।
नह डिगियो नख हेक, लियो पण भोजन लूखो।
साहस रो रूप भूपां सिरै, मुगट मेवाड़ी मोहणो।
कीरती कल़श चढियो कल़ू, स्वाभिमान भड़ सोहणो।।1[…]