श्री करनी विजय स्तुति – श्री जोगीदान जी कविया सेवापुरा

।।छन्द त्रोटक।।

करणी तव पुत्र प्रणाम करै
धरि मस्तक पावन ध्यान धरै
कलिकाल महाविकराल समै
बिन आश्रय हा तव बाल भ्रमै।१।

हम छोड़ चुके अब इष्ट हहा,
रिपु घोर अरष्टि अनिष्ट रहा।
पथ भ्रष्ट हुये जग माँहि फिरैं
घन आपत्ति के नभ भाग्य घिरैं।२। […]

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कवित्त करणीजी रा

वय पाय थाकी हाकी न केहर सकै शीघ्र
कान न ते सुने नहीं किसको पुकारूं मैं
चखन तें सुझै नहीं संतन उदासी मुख
कौन ढिग जाय अब अश्रुन ढिगारुं मैं
तेरे बिन मेरो कौन अब तो बताओ मात
दृष्टि मे न आत दूजो हिय धीर धारूं मै
कहै गीध चरणन मे छांह मिले थिर
शरण जननी की फिर मन को न मारूं मै १ […]

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करणी धाम – सुवाप

सुवाप गाँव मांगळियावाटी क्षेत्र, तहसील फलौदी, जिला-जोधपुर में स्थित है। यह गाँव मेहोजी मांगळिया द्वारा किनिया शाखा के चारणों को सांसण (स्वशासित) के रूप में प्रदत्त किया गया था। पूर्व पुरूष किनिया जी की नौवीं पीढ़ी में मेहोजी किनिया हुए है यथा- (1) मेहा (2) दूसल (3) देवायत (4) रामड़ (5) भीमड़ (6) जाल्हण (7) सीहा (8) करण और (9) किनिया। सुवाप गाँव के निवासी इन्हीं मेहाजी किनिया के घर देवल देवीजी आढ़ी की कोख से विक्रमी संवत्- 1444 की आसोज शुक्ला सप्तमी को भगवती श्री करणी जी का अवतरण हुआ। श्री करणी जी सात बहनें थी यथा- लालबाई, फूलबाई, […]

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