चारण साहित्य का इतिहास – चौथा अध्याय – मध्यकाल (प्रथम उत्थान) – [Part-A]
मध्यकाल (प्रथम उत्थान) (सन् १५००-१६५० ई.) (१) – काल विभाजन हिन्दी एवं राजस्थानी साहित्य के मर्मज्ञों ने आलोच्यकाल का विभाजन अपने-अपने ढंग से किया है। अत: चारण साहित्य की तत्कालीन प्रवृत्तियों को हृदयंगम करने में कोई सहायता नहीं मिलती। इस काल में भक्ति विषयक रचनाओं की एक अविच्छिन्न धारा फूट पड़ी, जो अपनी मन्थर गति से इस काल के द्वितीय उत्थान तक कल्लोल करती रही। भाषा एवं साहित्य की दृष्टि से यह आदान-प्रदान का समय था। राजस्थानी के कवि ब्रजभाषा में भी काव्य-रचना करने लगे। डॉ. मेनारिया के ‘राजस्थान का पिंगल साहित्य’ ग्रंथ से इस कथन की पुष्टि होती है। […]
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