कल़ायण !

धरती रौ कण-कण ह्वे सजीव, मुरधर में जीवण लहरायौ।
वा आज कल़ायण घिर आयी, बादळ अम्बर मं गहरायो।।

वा स्याम वरण उतराद दिसा, “भूरोड़े-भुरजां” री छाया !
लख मोर मोद सूँ नाच उठ्यौ, वे पाँख हवा मं छितरायाँ।।

तिसियारै धोरां पर जळकण, आभै सूँ उतर-उतर आया।
ज्यूँ ह्वे पुळकित मन मेघ बन्धु, मुरधर पर मोती बरसाया।।[…]

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शहीद दलपतसिंह शेखावत

जोधपुर रियासत रा देसूरी परगना रा देवली गांव रा शेखावत हरजीसिंह जी, महाराजा साब जसवंतसिंहजी अर सर प्रताप रा घणा मर्जींदान मिनख हा। आप आपरै जीवन रो घणो समय आं सर प्रताप रै साथै रावऴी सेवा में ही बितायो। आं हरजीसिंहजी रे दो बेटा मोभी दलपत सिंहजी अर छोटा जगतसिंहजी हां। हरजीसिंह जी री असामयक मौत हुवण रै बाद दोनां भाईयां री पढाई भणाई रो बंदोबस्त सर प्रताप करियो अर दलपत सिंह जी मेजर जनरल रा पद पर आसीन हुवा।[…]

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मैं विप्लव का कवि हूँ !

मैं विप्लव का कवि हूँ ! मेरे गीत चिरंतन।

मेरी छंदबद्ध वाणी में नहीं किसी कृष्णाभिसारिका के आकुल अंतर की धड़कन;
अरे, किसी जनपद कल्याणी के नूपुर के रुनझुन स्वर पर मुग्ध नहीं है मेरा गायन !

मैं विप्लव का कवि हूँ ! मेरे गीत चिरंतन।[…]

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हे गाँव, तुझे मैं छोड़ चला

था एक दिवस जब तेरे इस आँगन में फूली अमराई !
था एक दिवस जब मेरे भी मन में झूमी थी तरुणाई !
पीपल की फुनगी पर बोली, पंचम स्वर में कोयल काली !
मादक मधु-ऋतु के स्वागत में, कोसों तक फैली हरियाली !
पावस की मतवाली संध्या, आती अम्बर से उतर-उतर !
उन खेतों की पगडंडी पर, वह बैलों की घंटी का स्वर ![…]

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रे धोरां आळा देस जाग

धोराँ आळा देस जाग रे ऊँटाँ आळा देस जाग।
छाती पर पैणा पड़्या नाग रे धोराँ आळा देस जाग।।

उठ खोल उनींदी आँखड़ल्यां नैणाँ री मीठी नींद तोड़।
रे रात नहीं अब दिन ऊग्यो सपनाँ रो कू़डो मोह छोड़।।
थारी आँख्याँ में नाच रह्या जंजाळ सुहाणी रातां रा।
तूं कोट बणावै उण जूनोड़ै जुग री बोदी बातां रा।।
रे बीत गयो सो गयो बीत तूं उणरी कू़डी आस त्याग।।
छाती पर पैणा पड़्या नाग रे धोराँ आळा देश जाग।।१।।[…]

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विप्लव का कवि “मनुज देपावत”

धोरां आळा देस जाग रै, ऊंठा आळा देस जाग।
छाती पर पैणां पड़्या नाग रै, धोरां आळा देस जाग।।

इस क्रान्तिकारी कवि का जन्म कार्तिक कृष्णा चतुर्दशी विक्रम संवत 1984 को बीकानेर जिले के देशनोक ग्राम में हुआ। इनका असली नाम मालदान देपावत था, परन्तु रचनाकार के रूप में ये मनुज देपावत के नाम से जाने जाते थे। आप डिंगल भाषा के ख्याति प्राप्त कवि श्री कानदान जी देपावत के सुपुत्र थे। मनुज ने श्री करणी-विद्यालय देशनोक और फोर्ट हाई स्कूल बीकानेर से क्रमशः मिडिल और मेट्रिक पास की।[…]

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गजेन्द्र मोक्ष पर समान बाई का सवैया

पान के काज गयो गजराज,
कुटुम्ब समेत धस्यो जल मांहीं।
पान कर्यो जल शीतल को,
असनान की केलि रचितिहि ठाहीं।
कोपि के ग्राह ग्रह्यो गजराज,
बुडाय लयो जल दीन की नांहीं।
जो भर सूँड रही जल पै तिहिं,
बेर पुकार करि हरि पाहीं।।[…]

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झालामान शतक – नाथूसिंह जी महियारिया

नाथूसिंहजी महियारिया रचित झालामान शतक सर कोटि री उंचे दरजे री बेजोड़ रचना है, जिण कृति में सादड़ी (मेवाड़) रै राजराणा झाला मानसिंह जी रै उद्भट शौर्य, अदम्य साहस अर सूरापण, अर बिना सुवारथ बऴिदान रो बड़ो बर्णन करियो है। हऴ्दीघाटी री लड़ाई रो बड़ वीर नायक झालामान आप रै प्राणा नै निछावर कर आपरा धणी महाराणा रा प्राण बचाय इतियास मं अखीजस खाटियो।
हेक मान मुगलांण दिस, हेक मान हिंदवाण।
कूरम गज हौदे रह्यो, सुरग गयो मकवांण।।[…]

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चारण मनोहरदास नांदू (गांव – सुरपाऴिया, नागौर)

इतिहास में केई काऴ भुरजाऴ जंगी जोधारां रा संगी साथी ऐहड़ा कण पाण वाऴा अर आत्म बलिदानी होवता हा कि उणानै आपरै स्वामी री भक्ति आगै आपरो जीवण तोछो लखावतो अर बखत जरूरत माथै बलिदान देवण में कदैई शंकै अर हबक नें नैड़ी नीं आवण देवता। आज इतियास रा ऐहड़ा शूरवीर री चतुराई अर वीरत री वारता रो लेखो जोखो आंके करावां सा।[…]

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नायिका शिख नख वर्णन (राम रंजाट)

यह छंद महाकवि सूर्यमल्ल रचित खंडकाव्य राम रंजाट से लिया गया है। उल्लेखनीय है कि महाकवि ने इस ग्रन्थ को मात्र १० वर्ष की आयु में ही लिख डाला था।


।।छंद – त्रिभंगी।।
सौलह सिनगारं, सजि अनुसारं, अधिक अपारं, उद्धारं।
कौरे चख कज्जळ, अति जिहिं लज्जळ, दुति विजज्जळ, सुभकारं।।[…]

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